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Pushpanjali Today

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30 वर्षों से सड़क का इंतजार, बरसात में कंधों पर मरीज ले जाने को मजबूर ग्रामीण

दिमनी विधानसभा के ग्राम कंचन सिंह का पूरा, बीलपुर, पोस्ट कुठियाना के ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से लगाई गुहार

मुरैना। पंचायती राज व्यवस्था का उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर, समृद्ध और मूलभूत सुविधाओं से सुसज्जित बनाना है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा हर गांव के विकास के दावे किए जाते हैं, लेकिन मुरैना जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती दिखाई दे रही है।

जिले की जनसुनवाई में बड़ी संख्या में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें लगातार सामने आती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के दावे कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है।

इसी क्रम में दिमनी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कंचन सिंह का पूरा, बीलपुर, पोस्ट कुठियाना के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उनका गांव पिछले लगभग 30 वर्षों से सड़क सुविधा से वंचित है। ग्रामीणों के अनुसार गांव तक पहुंचने के लिए आज भी बरसात के दिनों में घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ता है। करीब एक से डेढ़ किलोमीटर पैदल चलने के बाद ही मुख्य सड़क तक पहुंचा जा सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के समय सबसे अधिक परेशानी बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में होती है। कई बार मरीजों को चारपाई पर लिटाकर कंधों के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है, जिसके बाद ही वाहन मिल पाता है।

ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए गए हैं। बाढ़ और बरसात के दौरान अधिकारी क्षेत्र का निरीक्षण करने भी आते हैं और आवेदन लेकर आश्वासन देते हैं, लेकिन अब तक सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि गांव के भविष्य के लिए है। उनका कहना है कि यदि सड़क बन जाए तो बच्चों की शिक्षा, किसानों की आवाजाही और मरीजों के उपचार जैसी मूलभूत समस्याओं का समाधान हो सकता है।

ग्रामीणों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि गांव की वर्षों पुरानी सड़क की समस्या का शीघ्र समाधान कराया जाए, ताकि उन्हें भी अन्य गांवों की तरह मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके।यदि चाहें, इसे और अधिक खोजी (Investigative) और प्रभावशाली समाचार शैली में भी तैयार किया जा सकता है।
चार साल से गुहार, फिर भी नहीं सुनी गई फरियाद! नई बस्ती सिंगल बस्ती के शासकीय प्राथमिक विद्यालय पर कब्जे और जर्जर भवन का आरोप

मुरैना। शहर के नई बस्ती सिंगल बस्ती स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। विद्यालय के प्राचार्य ने आरोप लगाया है कि स्कूल की जमीन पर स्थानीय दबंगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है, जबकि विद्यालय का भवन जर्जर और डिस्मेंटल की स्थिति में पहुंच चुका है। उनका कहना है कि पिछले चार वर्षों से जिला शिक्षा अधिकारी, डीपीसी कार्यालय सहित संबंधित विभागों को लगातार पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

प्राचार्य के अनुसार, हाल ही में दोबारा शिकायत देने पर उन्हें केवल यह निर्देश दिया गया कि जिन भवनों की स्थिति ठीक है, उनमें बच्चों को शिफ्ट कर दिया जाए। उनका कहना है कि इससे मूल समस्या का समाधान नहीं होगा।

प्राचार्य ने बताया कि विद्यालय की चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) नहीं होने के कारण असामाजिक और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग स्कूल परिसर में आकर शराब पीते हैं तथा अन्य अनुचित गतिविधियां करते हैं। इससे विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चों पर गलत प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विद्यालय में स्वयं सहायता समूह के माध्यम से दिया जाने वाला मध्यान्ह भोजन निर्धारित मेनू के अनुरूप नहीं है और उसकी गुणवत्ता भी खराब है। इस संबंध में भी संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।

प्राचार्य के मुताबिक, बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए नगर निगम से भी संपर्क किया गया था, लेकिन नगर निगम ने यह कहते हुए निर्माण से इनकार कर दिया कि पहले विद्यालय की भूमि का सीमांकन कराया जाए। इसके बाद सीमांकन कराने के लिए भी कई बार जिला शिक्षा अधिकारी और शासन को पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

विद्यालय परिसर के आसपास रहने वाले कुछ लोगों द्वारा स्कूल के पास कचरा फेंके जाने की शिकायत भी प्राचार्य ने की है। उनका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर कई बार स्थानीय लोगों से विवाद की स्थिति बनी और इसकी लिखित शिकायत भी प्रशासन को दी गई, लेकिन समाधान नहीं निकला।

प्राचार्य का कहना है कि लगातार पत्राचार और शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे विद्यालय की सुरक्षा, बच्चों की पढ़ाई और स्वच्छ वातावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
गोहद थाना पुलिस ने हत्या के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर भेजा जेल

गोहद / गोहद थाना क्षेत्र अंतर्गत दिनांक 02.08.2026 को शहीद खाँन पुत्र सौहरव खाँन उम्र 65 साल निवासी ग्राम खितोली थाना गोहद ने अपने भाई शब्बीर खान की गोली मार कर हत्या करने की रिपोर्ट की थी जिस पर से थाना गोहद पर 06 नामदर्ज लोगो पर अपराध कायम कर विवेचना मे लिया गया।पुलिस अधीक्षक सूरज कुमार वर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रदीप पटेल के निर्देशन में व एसडीओपी महेन्द्र कुमार गौतम के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी गोहद नरेंद्र सिंह कुशवाह के नेतृत्व में आरोपियो की गिरफ्तारी हेतु टीम गठित की गयी।विवेचना के दौरान मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि हत्या का मुख्य आरोपी करबला के आगे गड़रोली रोड़ पर झोपड़ी में छुपा हुआ है। और भागने की फिराक मे है उक्त सूचना प्राप्त होने पर फोर्स को अवगत कराकर करबला के आगे, गड़रोली रोड़ ग्राम भग्गूपुरा से घेरा बंदी कर प्रकरण के मुख्य आरोपी फरमान खान को गिरफ्तार किया गया जिससे एक 12 बोर का देशी कट्टा जप्त किया गया आरोपी को जेआर पर गोहद न्यायालय पेश किया गया। इस दौरान निरीक्षक नरेन्द्र सिंह कुशवाह थाना प्रभारी गोहद, उपनिरीक्षक रवि तोमर, प्रधान आरक्षक सोनू कुमार, संतोष सिंह,  रिपुदमन सिंह, आरक्षकगण भानु तोमर, योगेन्द्र सिंह, बृजेश शर्मा, प्रदीप तोमर, विवेक जाट, सर्वेश तोमर की महत्वपूर्ण भूमिका रही ।
माइनिंग विभाग की बड़ी कार्रवाई, अवैध रेत भंडारण का किया विनष्टीकरण

राजस्व एवं पुलिस विभाग के संयुक्त सहयोग से बैसली गेम के पास केशव पार्क के समीप हुई कार्रवाई

गोहद। अवैध खनिज उत्खनन एवं भंडारण के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत माइनिंग विभाग ने राजस्व तथा पुलिस अधिकारियों के सहयोग से संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध रेत भंडारण का विनष्टीकरण किया।
जानकारी के अनुसार, बैसली डेम के पास स्थित केशव पार्क के बगल में बड़ी मात्रा में अवैध रूप से रेत का भंडारण किया गया था। सूचना मिलने पर माइनिंग विभाग की टीम राजस्व एवं पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंची और नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अवैध रेत भंडारण को नष्ट कराया।प्रशासन ने स्पष्ट किया कि जिले में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा। ऐसे मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
MP की महिला CSP पर 75 लाख की डील का आरोप, CM मोहन यादव तक पहुंची शिकायत

खाकी पर 'वसूली' का दाग:- कटनी में हड़कंप: 30 हज़ार की हफ्ता वसूली से शुरू हुआ खेल अब 75 लाख की 'डील' तक पहुँचा; 3 थानों का प्रभार छीना, ड्राईवर सस्पेंड!

कटनी! 
एमपी पुलिस की खाकी एक बार फिर दागदार हुई है! इस बार कटनी की नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया पर अवैध वसूली और रिश्वतखोरी के इतने गंभीर आरोप लगे हैं कि पूरा पुलिस महकमा सन्न रह गया है। मामला केवल गाड़ियों की चेकिंग के नाम पर 'हफ्ता वसूली' तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हत्या के एक केस में 75 लाख रुपये की 'डील' कराने तक पहुँच गया है। शिकायत सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव के दरबार तक पहुँच चुकी है, जिसके बाद मैडम का करियर अब तगड़े सवालों के घेरे में आ गया है।

1. ट्रांसपोर्टर से वसूली: 30 हज़ार की माँग, 25 देकर बची गाड़ियाँ/-
पूरा मामला तब गरमाया जब कटनी के ट्रांसपोर्ट कारोबारी महेंद्र जैन ने पुलिस की कारगुज़ारी का पर्दाफाश कर दिया।

क्या था मामला? -
21 जुलाई की रात रेत और डोलोमाइट से भरी गाड़ियों को चेकिंग के नाम पर रोका गया।

सीधा आरोप: -
CSP नेहा पच्चीसिया पर आरोप है कि उन्होंने गाड़ियाँ छोड़ने के एवज में 30,000 रुपये की माँग की।
मौके पर सैटलमेंट: -
ट्रांसपोर्टर ने मौके पर 25,000 रुपये थमाए और अगले ही दिन SP अभिनय विश्वकर्मा की चौखट पर पहुँचकर शिकायत ठोक दी।

2. हत्या के केस में 'मास्टरमाइंड' खेल: 75 लाख की माँग और ज़मीन बेचने का दबाव!
30 हज़ार का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि सीएसपी साहिबा पर 75 लाख रुपये माँगने का महा-आरोप लग गया!

क्या है 75 लाख की डील का सच?-
हत्या के एक मामले में बंद आरोपी आकाश लोधी और उसके परिवार का आरोप है कि CSP नेहा पच्चीसिया और कुठला थाना प्रभारी ने उन पर ज़मीन बेचने और 75 लाख रुपये देकर मामला रफा-दफा करने का दबाव बनाया। जब परिवार ने ज़मीन बेचने से इंकार किया और CM हेल्पलाइन में गुहार लगाई, तो उल्टे आरोपी के पिता और दामाद को भी उठाकर सलाखों के पीछे ठूंस दिया गया!

एक्शन में पुलिस महकमा: छीना प्रभार, सस्पेंड हुआ चालक:-
मामला मुख्यमंत्री तक पहुँचते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। कटनी SP अभिनय विश्वकर्मा ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए CSP के चालक आरक्षक केशव सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया।
पावर सीज़: -
CSP नेहा पच्चीसिया से कुठला, माधवनगर और रंगनाथ नगर—इन तीन प्रमुख थानों का प्रभार छीनकर अजाक DSP शिवा पाठक को सौंप दिया गया है।

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इस हादसे का आखिर कौन होगा जिम्मेदार पब्लिक या बिजली विभाग?
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मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?'

मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है।

वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।
मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?'

मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है।

वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।
मुरैना में फुटपाथ निर्माण पर बवाल, घटिया गुणवत्ता का आरोप; ग्रामीणों और भीम आर्मी ने रुकवाया काम

मुरैना। मुरैना में बेरियल चौराहे से मुरैना गांव तक चल रहे फुटपाथ (पेवर ब्लॉक) निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों और भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए काम रुकवा दिया। उनका आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा।

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि जहां कंक्रीट का उपयोग किया जाना चाहिए, वहां मिट्टी और निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। जब मौके पर मौजूद सुपरवाइजर से निर्माण का एस्टीमेट और स्वीकृत मानक (स्पेसिफिकेशन) दिखाने को कहा गया तो उन्होंने बताया कि एस्टीमेट ठेकेदार के पास है। वहीं, आरोप है कि ठेकेदार ने कहा कि उनके पास कोई एस्टीमेट उपलब्ध नहीं है।

ग्रामीणों और भीम आर्मी के पदाधिकारियों का आरोप है कि यदि एस्टीमेट और स्वीकृत मानकों की जानकारी उपलब्ध नहीं है तो निर्माण किस आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय नेताओं की मिलीभगत से ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहर की कंपनी द्वारा कार्य किया जा रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। विरोध के दौरान लोगों ने मांग की कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए और गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

मामले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियर श्री विष्णु से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका कॉल रिसीव नहीं हुआ। वहीं, आरोप है कि सुपरवाइजर ने तकनीकी जानकारी देने के बजाय स्थानीय नेताओं से बात कराने का प्रयास किया।

फिलहाल ग्रामीणों और भीम आर्मी के विरोध के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है। लोगों का कहना है कि जब तक गुणवत्ता की जांच नहीं होगी और मानकों के अनुरूप निर्माण का आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
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मुरैना में फुटपाथ निर्माण पर बवाल, घटिया गुणवत्ता का आरोप; ग्रामीणों और भीम आर्मी ने रुकवाया काम

मुरैना। मुरैना में बेरियल चौराहे से मुरैना गांव तक चल रहे फुटपाथ (पेवर ब्लॉक) निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय ग्रामीणों और भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए काम रुकवा दिया। उनका आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा।

विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि जहां कंक्रीट का उपयोग किया जाना चाहिए, वहां मिट्टी और निम्न गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। जब मौके पर मौजूद सुपरवाइजर से निर्माण का एस्टीमेट और स्वीकृत मानक (स्पेसिफिकेशन) दिखाने को कहा गया तो उन्होंने बताया कि एस्टीमेट ठेकेदार के पास है। वहीं, आरोप है कि ठेकेदार ने कहा कि उनके पास कोई एस्टीमेट उपलब्ध नहीं है।

ग्रामीणों और भीम आर्मी के पदाधिकारियों का आरोप है कि यदि एस्टीमेट और स्वीकृत मानकों की जानकारी उपलब्ध नहीं है तो निर्माण किस आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय नेताओं की मिलीभगत से ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहर की कंपनी द्वारा कार्य किया जा रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी और रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। विरोध के दौरान लोगों ने मांग की कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए और गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

मामले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियर श्री विष्णु से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका कॉल रिसीव नहीं हुआ। वहीं, आरोप है कि सुपरवाइजर ने तकनीकी जानकारी देने के बजाय स्थानीय नेताओं से बात कराने का प्रयास किया।

फिलहाल ग्रामीणों और भीम आर्मी के विरोध के बाद निर्माण कार्य रोक दिया गया है। लोगों का कहना है कि जब तक गुणवत्ता की जांच नहीं होगी और मानकों के अनुरूप निर्माण का आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक कार्य शुरू नहीं होने दिया जाएगा।
👉दतिया 12 राउंड में कांग्रेस 13, 542 वोटों से आगे

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दतिया विधानसभा उपचुनाव में पांचवें राउंड की मतगणना तक कांग्रेस ने 308 मतों की लीड बना ली है। 
भाजपा 4282
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आजाद समाज पार्टी 1978 वोट

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Home Department of Madhya Pradesh
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Dr. Narottam Mishra
Devandra Pratap Singh Tomer
Narendra Singh Tomar
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वरिष्ठ भाजपा नेता व प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री श्री पारस चंद्र जैन जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है। शोकमय परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।

ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों व शुभचिंतकों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति दें।

ॐ शांतिः।
मुरैना। जिले के सुमावली थाना क्षेत्र के अटूपुरा गांव में रविवार को एक ही परिवार के चाचा-ताऊ के बेटों के बीच हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच जमकर फायरिंग हुई, जिसमें दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है। घटना की सूचना मिलते ही सुमावली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात पर काबू पाया। गांव में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों पक्ष गुर्जर समाज से हैं और आपस में रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। पुलिस फायरिंग के कारणों और पूरे विवाद की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जौरा रोड पर सड़क निर्माण में घटिया गुणवत्ता के आरोप, मिट्टी पर रखे जा रहे सीमेंट के गट्टे

मुरैना। शहर के जौरा रोड स्थित मथुरा मार्केट के सामने निर्माणाधीन सड़क में घटिया गुणवत्ता के कार्य किए जाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान बिना उचित बेस तैयार किए सीधे मिट्टी के ऊपर सीमेंट के गट्टे (ब्लॉक) बिछाए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि बरसात के मौसम में यदि इस स्थान पर पानी भर गया और उसके ऊपर कोई भारी वाहन खड़ा हो गया, तो सड़क धंसने की पूरी आशंका है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है।

मौके पर जब पुष्पांजलि न्यूज़ चैनल की टीम पहुंची, तो वहां कार्य कर रहे कारीगर और मजदूर कैमरा देखकर मौके से चले गए। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर और भी सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से सड़क निर्माण की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। यदि समय रहते निर्माण कार्य की जांच नहीं हुई, तो भविष्य में यह सड़क आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
यूनिवर्सिटी थाना क्षेत्र में छात्रों पर हमला, 10-15 युवकों ने की मारपीट
सोशल मीडिया पर वायरल पुराने विवाद के वीडियो से जुड़ा बताया जा रहा मामला, विद्यापीठ की लाल टी-शर्ट पहने छात्रों को निशाना बनाने का आरोप,
जौरा रोड पर सड़क निर्माण में घटिया गुणवत्ता के आरोप, मिट्टी पर रखे जा रहे सीमेंट के गट्टे

मुरैना। शहर के जौरा रोड स्थित मथुरा मार्केट के सामने निर्माणाधीन सड़क में घटिया गुणवत्ता के कार्य किए जाने के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान बिना उचित बेस तैयार किए सीधे मिट्टी के ऊपर सीमेंट के गट्टे (ब्लॉक) बिछाए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि बरसात के मौसम में यदि इस स्थान पर पानी भर गया और उसके ऊपर कोई भारी वाहन खड़ा हो गया, तो सड़क धंसने की पूरी आशंका है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा है।

मौके पर जब पुष्पांजलि न्यूज़ चैनल की टीम पहुंची, तो वहां कार्य कर रहे कारीगर और मजदूर कैमरा देखकर मौके से चले गए। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर और भी सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से सड़क निर्माण की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। यदि समय रहते निर्माण कार्य की जांच नहीं हुई, तो भविष्य में यह सड़क आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
5 साल से सड़क का इंतजार, बरसात में जलभराव से बच्चों का स्कूल जाना हुआ मुश्किल, ग्रामीणों ने सरपंच पर लगाए विकास कार्य न कराने के आरोप

मुरैना। जिले की जौरा तहसील अंतर्गत बागचीनी पंचायत के रामसिंह का पुरा गांव में सड़क न होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में रास्ते पर पानी भर जाने के कारण हालात और भी बदतर हो गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव के कारण स्कूली बच्चे तक पढ़ाई के लिए घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी इसी पानी भरे रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों ने पंचायत के सरपंच पर आरोप लगाया है कि पिछले 5 वर्षों में गांव में कोई उल्लेखनीय विकास कार्य नहीं कराया गया। उनका कहना है कि सड़क निर्माण की मांग कई बार उठाई गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के मुख्य मार्ग का जल्द निर्माण कराया जाए, ताकि बरसात के दौरान लोगों और स्कूली बच्चों को होने वाली परेशानी से राहत मिल सके।
मुरैना। 15 जुलाई से 30 जुलाई तक मुरैना पुलिस द्वारा "नशे से दूरी है ज़रूरी" अभियान चलाकर लोगों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूक किया गया। लेकिन अभियान समाप्त होने के बाद भी शहर में अवैध शराब की बिक्री रुकती नजर नहीं आ रही है।
ताजा मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां जौरा रोड स्थित मानस हॉस्पिटल के पास, ड्रीम वैली पब्लिक स्कूल के ठीक सामने एक दुकान पर खुलेआम अवैध देशी शराब बेचे जाने का आरोप है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी दुकान पर सिविल लाइन थाना पुलिस पहले भी दो बार छापेमारी कर अवैध शराब जब्त कर चुकी है। इसके बावजूद उसी स्थान पर तीसरी बार फिर से अवैध शराब की बिक्री शुरू हो गई है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिविल लाइन थाना पुलिस को इस गतिविधि की जानकारी नहीं है, या फिर कार्रवाई के बाद भी अवैध कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे दोबारा उसी स्थान पर कारोबार शुरू कर देते हैं?
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निवास दुष्कर्म मामला फिर गरमाया: पीड़िता ने जिला शिक्षा अधिकारी पर लगाए रिश्वत लेकर आरोपियों को बचाने के आरोप

निवास में हुए चर्चित दुष्कर्म मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। पीड़ित महिला और उसके पति ने जिला शिक्षा अधिकारी भगवान सिंह इंदौलिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने रिश्वत लेकर मामले से जुड़े आरोपी शिक्षकों का तबादला कर दिया।

पीड़िता का कहना है कि एक शिक्षक को पहले ही निलंबित किया जा चुका था, जबकि दूसरे शिक्षक को भी दो दिन पहले निलंबित कर दिया गया। इसके बावजूद तीसरे आरोपी शिक्षक के खिलाफ अब तक कोई निलंबन की कार्रवाई नहीं की गई है।

पीड़ित महिला ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर जिला शिक्षा अधिकारी तीसरे आरोपी को क्यों बचा रहे हैं और उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर तीसरे आरोपी पर भी तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
कट्टा लेकर ससुराल की छत पर चढ़ा शराबी पति, बहोड़ापुर TI आलोक परिहार की 3 घंटे की समझाइश के बाद उतरा
ग्वालियर। महाराजपुरा थाना परिसर में उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब एक भूमि कब्जे के मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर पूर्व सैनिक संगठन के संभागीय अध्यक्ष अरविंद तोमर और पुलिस के बीच तीखी बहस हो गई।
जानकारी के अनुसार, पूर्व सैनिक संगठन का आरोप है कि कुछ दबंगों ने एक भूमि पर कब्जा कर रखा है। संगठन ने पुलिस से मामले में कार्रवाई की मांग की, लेकिन आरोप है कि पुलिस द्वारा समय पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
इसी बात को लेकर थाना परिसर में पुलिस और पूर्व सैनिक संगठन के पदाधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। संगठन ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जिला शिक्षा अधिकारी का जेवराखेड़ा शासकीय स्कूल में औचक निरीक्षण, जलभराव और सांपों के खतरे पर जताई चिंता

मुरैना। जिला शिक्षा अधिकारी ने मुरैना जिले के ग्राम जेवराखेड़ा स्थित शासकीय विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जब वे विद्यालय पहुंचे तो पाया कि शिक्षकों ने शाम 4 बजे ही बच्चों की छुट्टी कर दी थी। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों से समय से पहले छुट्टी करने का कारण पूछा।
निरीक्षण के दौरान विद्यालय परिसर के चारों ओर तालाब का गंदा पानी भरा हुआ मिला। ग्रामीणों और स्कूल स्टाफ ने बताया कि तालाब के आसपास अक्सर सांप निकलते हैं और कई बार विद्यालय की कक्षाओं में भी सांप घुस चुके हैं, जिससे बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा बना रहता है।
स्थिति का जायजा लेने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि विद्यालय की यह समस्या गंभीर है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे इस संबंध में कलेक्टर महोदय से चर्चा करेंगे और ऐसे विद्यालयो