#शिकायतकर्ता_चला_गया, लेकिन प्रशासन की आंखें आज तक नहीं खुलीं !
बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या जस की तस, अब लोग पूछ रहे हैं ’’आखिर जिम्मेदार कौन?
बिसाऊ। यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक ऐसे फरियादी की अधूरी पुकार है, जो अपनी गली की समस्या के समाधान की उम्मीद लिए इस दुनिया से चला गया। जिस व्यक्ति ने इस समस्या को लेकर वर्षों तक आवाज उठाई, वह आज इस दुनिया में नहीं है। मगर अफसोस, प्रशासन की नींद आज भी नहीं टूटी। अब क्षेत्रवासी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कार्रवाई कब होगी और आखिर इस लापरवाही का जिम्मेदार कौन है?
बिसाऊ नगर पालिका के वार्ड संख्या 18 स्थित गढ़ के पास वाली गली वर्षों से बदहाली का दंश झेल रही है। बरसात होते ही पूरी गली गंदे पानी से लबालब भर जाती है। सड़क का स्तर सही नहीं होने और नालियों का उचित निर्माण नहीं होने के कारण बरसाती पानी के साथ-साथ घरों का गंदा पानी भी कई-कई दिनों तक जमा रहता है। हालात ऐसे हैं कि पैदल निकलना भी किसी चुनौती से कम नहीं।
इस गली में रहने वाले दिवंगत महेश शर्मा, जो दोनों पैरों से दिव्यांग थे, इस समस्या को लेकर लगातार नगरपालिका के चक्कर लगाते रहे। उन्होंने कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें दर्ज कराईं। स्थानीय लोगों के अनुसार, अपने निधन से महज तीन दिन पहले भी उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन उनकी शिकायत सरकारी फाइलों से आगे नहीं बढ़ सकी।
आज महेश शर्मा इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी शिकायत अब भी अधूरी है। गली की हालत वैसी ही है जैसी उनके जीवनकाल में थी। लोगों का कहना है कि फरियादी तो चला गया, लेकिन प्रशासन आज भी नहीं जागा।
वार्डवासियों के अनुसार, इस समस्या को लेकर तत्कालीन अधिशासी अधिकारी द्वारका प्रसाद, सुरेश कुमार तथा वर्तमान अधिशासी अधिकारी सीताराम कुमावत सहित तीन-तीन अधिशासी अधिकारियों को कई बार शिकायत दी गई, लेकिन किसी भी अधिकारी ने स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाया। वर्षों से शिकायतें होती रहीं, लेकिन हालात नहीं बदले।
गुरुवार को नगरपालिका के पूर्व उपाध्यक्ष दीनदयाल ख्वास ने डिजिटल चेनल शेखावाटी एक्सप्रेस संवाददाता को मौके पर ले जाकर बदहाल स्थिति दिखाई। उन्होंने नगर पालिका प्रशासन से मांग की कि गली का सड़क स्तर तत्काल ठीक कराया जाए, नालियों का निर्माण कराया जाए और वार्डवासियों को इस समस्या से स्थायी राहत दिलाई जाए।
सबसे गंभीर बात यह है कि जिस स्थान पर गंदा पानी भरा रहता है, उसके पास ही एक विद्यालय स्थित है। छोटे-छोटे बच्चों को रोज इसी गंदे पानी से होकर विद्यालय जाना पड़ता है। महिलाएं, बुजुर्ग और आम नागरिक भी मजबूरी में इसी रास्ते से गुजरते हैं, जिससे संक्रमण और दुर्घटना का खतरा हमेशा बना रहता है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो उन्हें मजबूर होकर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।
अब सवाल यही है...
क्या किसी समस्या के समाधान के लिए शिकायतकर्ता का इस दुनिया में होना जरूरी है?
क्या वर्षों तक शिकायत करने वाले एक दिव्यांग नागरिक की आवाज भी प्रशासन तक नहीं पहुंच सकी?
आखिर जिम्मेदार कौन? और वार्ड 18 के लोगों को राहत कब मिलेगी?
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Jhunjhunun, Jhunjhunu | Aug 7, 2026