*किन्नौर जिले की ग्राम पंचायत रकछम के महिला मंडल सदस्यों और गांववासियों ने मस्तरंग स्थान में गारगे नाले में बादल फटने से आई भीषण तबाही के दौरान एकता, साहस और मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है*
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हिमाचल में रकछम के मस्तरंग स्थान पर बादल फटने से ग्राम पंचायत रकछम के महिला मंडल सदस्यों ने निभाई 'आपदा रक्षक' के रूप में निभाई भूमिका किन्नौर के मस्तरंग स्थित द्वितीय वाहिनी भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के परिसर में अचानक आई प्रलयंकारी बाढ़ ने चारों ओर तबाही के निशान छोड़ दिए। गारगे नाले में आए उफान के बाद बाढ़ का पानी आईटीबीपी परिसर में घुस गया, जिससे पूरे कैंप में भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और बोल्डर जमा हो गए। परिसर का बड़ा हिस्सा मलबे से भर गया और जवानों के बैरकों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया।
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राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी भी जवान को कोई नुकसान नहीं पहुंचा और जनहानि की कोई सूचना नहीं है। इसके बावजूद अचानक आई इस बाढ़ ने यह साफ कर दिया कि सीमावर्ती दुर्गम क्षेत्रों में तैनात हमारे जवान किस तरह हर पल प्राकृतिक आपदाओं के बीच भी देश की सुरक्षा में डटे रहते हैं
किन्नौर के मस्तरंग स्थित द्वितीय वाहिनी भारत तिब्बत सीमा पुलिस बल के परिसर में अचानक आई प्रलयंकारी बाढ़ ने चारों ओर तबाही के निशान छोड़ दिए और पूरी की पूरी परिषर बोल्डर और मलवे से भर गया और खाने तथा अन्य सभी व्यवस्थाएँ प्रभावित हो गई , तभी ग्राम पंचायत रकछम की सभी महिलाओं और सभी ग्रामवासियों ने निस्वार्थ सेवा भाव और एकजुटता का परिचय दिया क्योंकि हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में भौगोलिक कठिनाइयों और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ता है ऐसे में रकछम पंचायत के सभी महिला मंडल सदस्यों और अन्य सभी वर्गों ने साबित कर दिया कि स्थानीय समाज ही आपदा के समय सबसे पहला और मजबूत 'रक्षक' होता है। उनकी इस एकजुटता और निस्वार्थ सेवाभाव की पूरे क्षेत्र और प्रशासन द्वारा काफी सराहना की जा रही है।
*संकट की घड़ी में स्थानीय निवासियों का योगदान* हिमाचल प्रदेश के इन दुर्गम और दूरदराज के इलाकों में अक्सर तकनीकी साधन या तुरंत बड़ी सरकारी मशीनरी नहीं पहुंच पाती। ऐसे कठिन समय में रक्छम और आसपास के गाँव के निवासियों (गाँव वासियों) की भूमिका ही संकटमोचक होती है:
*राहत और बचाव कार्य*: आपदा के तुरंत बाद स्थानीय लोग एकजुट होकर बचाव कार्यों में जुट गए और फंसी हुई गाडियों एवं लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया। *आपसी सहयोग*: रक्छम पंचायत के सभी लोग एक-दूसरे को आश्रय (सहारा) देते हैं और अपनी सुविधाओं में से को जरूरतमंदों के साथ साझा करते हैं और इस विकट परिस्थिति में भी सभी ने अपने अपने घरों में भोजन बनाकर सभी को भोजन करवाया।
*सड़क बहाली में स्थानीय समर्थन*: प्रशासन और बचाव टीमों (जैसे ITBP या NDRF) के साथ मिलकर स्थानीय ग्रामीण भी सड़कों से मलबा और पत्थर हटाने के श्रमसाध्य कार्य में योगदान दे रहे हैं।
*आश्रय और भोजन की व्यवस्था*: पर्यटकों और जरूरतमंदों के लिए ग्रामीणों ने अपने घरों के दरवाजे खोल दिए और उनके लिए रहने व खाने-पीने का पूरा इंतजाम किया।
*ग्राम पंचायत रकछम की प्रधान श्रीमती सुनीला नेगी जी , उपप्रधान श्रीमान शमशेर नेगी जी , और रकछम वार्ड की सदस्या उमा नेगी जी और अन्य सभी सदस्यों ने कहा कि के जब हम सभी संगठित हो और निस्वार्थ सेवा भाव और आत्मीयता का भाव हमारे मन में हो तो समाज में कोई भी विकट परिस्थिति क्यों ना आ जाए उसका सामना किया जा सकता है और जरूरतमंदों की हर संभव मदद की जा सकती है। इस आपदा की घड़ी में सभी रकछम पंचायत की सभी माताओं , बहनों , भाईयों और युवाओं ने इन सभी भावों का परिचय दिया औऱ कंधे से कंधे मिलाकर हर मोर्चे में अड़िग होकर खड़े हैं।*