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पीलीबंगा: गोलूवाला पुलिस ने जुआ अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए सार्वजनिक स्थान पर सट्टा लगाते हुए एक आरोपी को किया गिरफ्तार

गोलूवाला पुलिस ने जुआ अधिनियम में कार्रवाई करते हुए सट्टे की खाई वाली करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आज सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि जगमोहन सिंह हेड कांस्टेबल ने मय टीम आरोपी रोहन निवासी गोलूवाला निवादान को सार्वजनिक स्थान पर सट्टे की कार्यपाली करते हुए गिरफ्तार किया है।पुलिस ने आरोपी के खिलाफ जुआ अधिनियम में कार्रवाई कर जांच शुरू कर दी

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पट्टा दिलाने के नाम पर ₹7 हजार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप, पीड़ित विधवा महिला ने एसडीएम से की उच्च स्तरीय जांच की मांग
L.b. Bhakhar #LalbahadurbhakharJournalist 
​पीलीबंगा (हनुमानगढ़) #लालबहादुर_भाखर 
उपखंड क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम पंचायत रामपुरा में आयोजित सरकारी ग्रामीण सेवा शिविर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव की ही एक बेसहारा विधवा महिला ने स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन और शिविर से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों पर आवासीय पट्टा जारी करने के एवज में ₹7,000 की कथित रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित महिला ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
​प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम बीती 6 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है, जब राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत रामपुरा में आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन किया गया था। इस शिविर में गांव की निवासी विधवा महिला शीला देवी पत्नी स्वर्गीय ओमप्रकाश ने भी अपने आवासीय मकान का वैध सरकारी पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। शिकायत में उल्लेख है कि ग्राम पंचायत द्वारा उनके नाम से पट्टा तैयार भी कर दिया गया था।
​पीड़ित महिला शीला देवी का आरोप है कि पट्टा देने की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी करने और उसे सुपुर्द करने के एवज में कथित तौर पर प्रशासक (सरपंच) पति एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) द्वारा उनसे ₹7,000 की राशि की मांग की गई, जिसे मजबूरी में महिला को देना पड़ा। शिकायत में आगे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जब महिला ने बाद में पट्टे पर अंकित आधिकारिक रसीद राशि के बारे में जानकारी चाही, तो उसे पता चला कि उस पर मात्र ₹2,100 ही अंकित हैं।
​पीड़िता का कहना है कि रसीद और ली गई राशि में भारी अंतर देखकर जब उसने शिविर प्रभारी तथा वहां मौजूद अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से इस विसंगति की शिकायत करने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय कथित रूप से सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार लगाई और शिविर स्थल से बाहर कर दिया।
​उपखंड अधिकारी को दी गई शिकायत में पीड़िता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार द्वारा आमजन और गरीब परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन किया जाता है, परंतु स्थानीय स्तर पर पट्टा वितरण सहित अन्य लोक कल्याणकारी कार्यों में कथित रूप से अनियमितताएं और भ्रष्टाचार पनप रहा है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी या उच्चाधिकारी से जांच करवाई जाए, ताकि शिविर की पारदर्शिता बनी रहे और पीड़ित को न्याय मिल सके।
लालबहादुर भाखर संवाददाता 
9875131305
7014718676📞📞☎️☎️✅✅

पट्टा दिलाने के नाम पर ₹7 हजार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप, पीड़ित विधवा महिला ने एसडीएम से की उच्च स्तरीय जांच की मांग L.b. Bhakhar #LalbahadurbhakharJournalist ​पीलीबंगा (हनुमानगढ़) #लालबहादुर_भाखर उपखंड क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम पंचायत रामपुरा में आयोजित सरकारी ग्रामीण सेवा शिविर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव की ही एक बेसहारा विधवा महिला ने स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन और शिविर से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों पर आवासीय पट्टा जारी करने के एवज में ₹7,000 की कथित रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित महिला ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। ​प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम बीती 6 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है, जब राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत रामपुरा में आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन किया गया था। इस शिविर में गांव की निवासी विधवा महिला शीला देवी पत्नी स्वर्गीय ओमप्रकाश ने भी अपने आवासीय मकान का वैध सरकारी पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। शिकायत में उल्लेख है कि ग्राम पंचायत द्वारा उनके नाम से पट्टा तैयार भी कर दिया गया था। ​पीड़ित महिला शीला देवी का आरोप है कि पट्टा देने की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी करने और उसे सुपुर्द करने के एवज में कथित तौर पर प्रशासक (सरपंच) पति एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) द्वारा उनसे ₹7,000 की राशि की मांग की गई, जिसे मजबूरी में महिला को देना पड़ा। शिकायत में आगे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जब महिला ने बाद में पट्टे पर अंकित आधिकारिक रसीद राशि के बारे में जानकारी चाही, तो उसे पता चला कि उस पर मात्र ₹2,100 ही अंकित हैं। ​पीड़िता का कहना है कि रसीद और ली गई राशि में भारी अंतर देखकर जब उसने शिविर प्रभारी तथा वहां मौजूद अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से इस विसंगति की शिकायत करने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय कथित रूप से सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार लगाई और शिविर स्थल से बाहर कर दिया। ​उपखंड अधिकारी को दी गई शिकायत में पीड़िता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार द्वारा आमजन और गरीब परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन किया जाता है, परंतु स्थानीय स्तर पर पट्टा वितरण सहित अन्य लोक कल्याणकारी कार्यों में कथित रूप से अनियमितताएं और भ्रष्टाचार पनप रहा है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी या उच्चाधिकारी से जांच करवाई जाए, ताकि शिविर की पारदर्शिता बनी रहे और पीड़ित को न्याय मिल सके। लालबहादुर भाखर संवाददाता 9875131305 7014718676📞📞☎️☎️✅✅

Pilibanga, Hanumangarh | Jul 8, 2026

पट्टा दिलाने के नाम पर ₹7 हजार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप, पीड़ित विधवा महिला ने एसडीएम से की उच्च स्तरीय जांच की मांग
L.b. Bhakhar #LalbahadurbhakharJournalist 
​पीलीबंगा (हनुमानगढ़) #लालबहादुर_भाखर 
उपखंड क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम पंचायत रामपुरा में आयोजित सरकारी ग्रामीण सेवा शिविर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव की ही एक बेसहारा विधवा महिला ने स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन और शिविर से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों पर आवासीय पट्टा जारी करने के एवज में ₹7,000 की कथित रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित महिला ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
​प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम बीती 6 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है, जब राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत रामपुरा में आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन किया गया था। इस शिविर में गांव की निवासी विधवा महिला शीला देवी पत्नी स्वर्गीय ओमप्रकाश ने भी अपने आवासीय मकान का वैध सरकारी पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। शिकायत में उल्लेख है कि ग्राम पंचायत द्वारा उनके नाम से पट्टा तैयार भी कर दिया गया था।
​पीड़ित महिला शीला देवी का आरोप है कि पट्टा देने की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी करने और उसे सुपुर्द करने के एवज में कथित तौर पर प्रशासक (सरपंच) पति एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) द्वारा उनसे ₹7,000 की राशि की मांग की गई, जिसे मजबूरी में महिला को देना पड़ा। शिकायत में आगे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जब महिला ने बाद में पट्टे पर अंकित आधिकारिक रसीद राशि के बारे में जानकारी चाही, तो उसे पता चला कि उस पर मात्र ₹2,100 ही अंकित हैं।
​पीड़िता का कहना है कि रसीद और ली गई राशि में भारी अंतर देखकर जब उसने शिविर प्रभारी तथा वहां मौजूद अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से इस विसंगति की शिकायत करने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय कथित रूप से सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार लगाई और शिविर स्थल से बाहर कर दिया।
​उपखंड अधिकारी को दी गई शिकायत में पीड़िता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार द्वारा आमजन और गरीब परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन किया जाता है, परंतु स्थानीय स्तर पर पट्टा वितरण सहित अन्य लोक कल्याणकारी कार्यों में कथित रूप से अनियमितताएं और भ्रष्टाचार पनप रहा है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी या उच्चाधिकारी से जांच करवाई जाए, ताकि शिविर की पारदर्शिता बनी रहे और पीड़ित को न्याय मिल सके।
लालबहादुर भाखर संवाददाता 
9875131305
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पट्टा दिलाने के नाम पर ₹7 हजार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप, पीड़ित विधवा महिला ने एसडीएम से की उच्च स्तरीय जांच की मांग L.b. Bhakhar #LalbahadurbhakharJournalist ​पीलीबंगा (हनुमानगढ़) #लालबहादुर_भाखर उपखंड क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम पंचायत रामपुरा में आयोजित सरकारी ग्रामीण सेवा शिविर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव की ही एक बेसहारा विधवा महिला ने स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन और शिविर से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों पर आवासीय पट्टा जारी करने के एवज में ₹7,000 की कथित रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित महिला ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। ​प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम बीती 6 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है, जब राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत रामपुरा में आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन किया गया था। इस शिविर में गांव की निवासी विधवा महिला शीला देवी पत्नी स्वर्गीय ओमप्रकाश ने भी अपने आवासीय मकान का वैध सरकारी पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। शिकायत में उल्लेख है कि ग्राम पंचायत द्वारा उनके नाम से पट्टा तैयार भी कर दिया गया था। ​पीड़ित महिला शीला देवी का आरोप है कि पट्टा देने की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी करने और उसे सुपुर्द करने के एवज में कथित तौर पर प्रशासक (सरपंच) पति एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) द्वारा उनसे ₹7,000 की राशि की मांग की गई, जिसे मजबूरी में महिला को देना पड़ा। शिकायत में आगे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जब महिला ने बाद में पट्टे पर अंकित आधिकारिक रसीद राशि के बारे में जानकारी चाही, तो उसे पता चला कि उस पर मात्र ₹2,100 ही अंकित हैं। ​पीड़िता का कहना है कि रसीद और ली गई राशि में भारी अंतर देखकर जब उसने शिविर प्रभारी तथा वहां मौजूद अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से इस विसंगति की शिकायत करने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय कथित रूप से सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार लगाई और शिविर स्थल से बाहर कर दिया। ​उपखंड अधिकारी को दी गई शिकायत में पीड़िता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार द्वारा आमजन और गरीब परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन किया जाता है, परंतु स्थानीय स्तर पर पट्टा वितरण सहित अन्य लोक कल्याणकारी कार्यों में कथित रूप से अनियमितताएं और भ्रष्टाचार पनप रहा है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी या उच्चाधिकारी से जांच करवाई जाए, ताकि शिविर की पारदर्शिता बनी रहे और पीड़ित को न्याय मिल सके। लालबहादुर भाखर संवाददाता 9875131305 7014718676📞📞☎️☎️✅✅

Pilibanga, Hanumangarh | Jul 8, 2026

पट्टा दिलाने के नाम पर ₹7 हजार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप, पीड़ित विधवा महिला ने एसडीएम से की उच्च स्तरीय जांच की मांग
L.b. Bhakhar #LalbahadurbhakharJournalist 
​पीलीबंगा (हनुमानगढ़) #लालबहादुर_भाखर 
उपखंड क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम पंचायत रामपुरा में आयोजित सरकारी ग्रामीण सेवा शिविर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव की ही एक बेसहारा विधवा महिला ने स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन और शिविर से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों पर आवासीय पट्टा जारी करने के एवज में ₹7,000 की कथित रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित महिला ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
​प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम बीती 6 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है, जब राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत रामपुरा में आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन किया गया था। इस शिविर में गांव की निवासी विधवा महिला शीला देवी पत्नी स्वर्गीय ओमप्रकाश ने भी अपने आवासीय मकान का वैध सरकारी पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। शिकायत में उल्लेख है कि ग्राम पंचायत द्वारा उनके नाम से पट्टा तैयार भी कर दिया गया था।
​पीड़ित महिला शीला देवी का आरोप है कि पट्टा देने की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी करने और उसे सुपुर्द करने के एवज में कथित तौर पर प्रशासक (सरपंच) पति एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) द्वारा उनसे ₹7,000 की राशि की मांग की गई, जिसे मजबूरी में महिला को देना पड़ा। शिकायत में आगे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जब महिला ने बाद में पट्टे पर अंकित आधिकारिक रसीद राशि के बारे में जानकारी चाही, तो उसे पता चला कि उस पर मात्र ₹2,100 ही अंकित हैं।
​पीड़िता का कहना है कि रसीद और ली गई राशि में भारी अंतर देखकर जब उसने शिविर प्रभारी तथा वहां मौजूद अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से इस विसंगति की शिकायत करने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय कथित रूप से सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार लगाई और शिविर स्थल से बाहर कर दिया।
​उपखंड अधिकारी को दी गई शिकायत में पीड़िता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार द्वारा आमजन और गरीब परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन किया जाता है, परंतु स्थानीय स्तर पर पट्टा वितरण सहित अन्य लोक कल्याणकारी कार्यों में कथित रूप से अनियमितताएं और भ्रष्टाचार पनप रहा है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी या उच्चाधिकारी से जांच करवाई जाए, ताकि शिविर की पारदर्शिता बनी रहे और पीड़ित को न्याय मिल सके।
लालबहादुर भाखर संवाददाता 
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पट्टा दिलाने के नाम पर ₹7 हजार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप, पीड़ित विधवा महिला ने एसडीएम से की उच्च स्तरीय जांच की मांग L.b. Bhakhar #LalbahadurbhakharJournalist ​पीलीबंगा (हनुमानगढ़) #लालबहादुर_भाखर उपखंड क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम पंचायत रामपुरा में आयोजित सरकारी ग्रामीण सेवा शिविर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव की ही एक बेसहारा विधवा महिला ने स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन और शिविर से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों पर आवासीय पट्टा जारी करने के एवज में ₹7,000 की कथित रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित महिला ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। ​प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम बीती 6 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है, जब राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत रामपुरा में आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन किया गया था। इस शिविर में गांव की निवासी विधवा महिला शीला देवी पत्नी स्वर्गीय ओमप्रकाश ने भी अपने आवासीय मकान का वैध सरकारी पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। शिकायत में उल्लेख है कि ग्राम पंचायत द्वारा उनके नाम से पट्टा तैयार भी कर दिया गया था। ​पीड़ित महिला शीला देवी का आरोप है कि पट्टा देने की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी करने और उसे सुपुर्द करने के एवज में कथित तौर पर प्रशासक (सरपंच) पति एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) द्वारा उनसे ₹7,000 की राशि की मांग की गई, जिसे मजबूरी में महिला को देना पड़ा। शिकायत में आगे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जब महिला ने बाद में पट्टे पर अंकित आधिकारिक रसीद राशि के बारे में जानकारी चाही, तो उसे पता चला कि उस पर मात्र ₹2,100 ही अंकित हैं। ​पीड़िता का कहना है कि रसीद और ली गई राशि में भारी अंतर देखकर जब उसने शिविर प्रभारी तथा वहां मौजूद अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से इस विसंगति की शिकायत करने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय कथित रूप से सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार लगाई और शिविर स्थल से बाहर कर दिया। ​उपखंड अधिकारी को दी गई शिकायत में पीड़िता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार द्वारा आमजन और गरीब परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन किया जाता है, परंतु स्थानीय स्तर पर पट्टा वितरण सहित अन्य लोक कल्याणकारी कार्यों में कथित रूप से अनियमितताएं और भ्रष्टाचार पनप रहा है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी या उच्चाधिकारी से जांच करवाई जाए, ताकि शिविर की पारदर्शिता बनी रहे और पीड़ित को न्याय मिल सके। लालबहादुर भाखर संवाददाता 9875131305 7014718676📞📞☎️☎️✅✅

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पट्टा दिलाने के नाम पर ₹7 हजार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप, पीड़ित विधवा महिला ने एसडीएम से की उच्च स्तरीय जांच की मांग
L.b. Bhakhar #LalbahadurbhakharJournalist 
​पीलीबंगा (हनुमानगढ़) #लालबहादुर_भाखर 
उपखंड क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम पंचायत रामपुरा में आयोजित सरकारी ग्रामीण सेवा शिविर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव की ही एक बेसहारा विधवा महिला ने स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन और शिविर से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों पर आवासीय पट्टा जारी करने के एवज में ₹7,000 की कथित रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित महिला ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है।
​प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम बीती 6 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है, जब राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत रामपुरा में आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन किया गया था। इस शिविर में गांव की निवासी विधवा महिला शीला देवी पत्नी स्वर्गीय ओमप्रकाश ने भी अपने आवासीय मकान का वैध सरकारी पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। शिकायत में उल्लेख है कि ग्राम पंचायत द्वारा उनके नाम से पट्टा तैयार भी कर दिया गया था।
​पीड़ित महिला शीला देवी का आरोप है कि पट्टा देने की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी करने और उसे सुपुर्द करने के एवज में कथित तौर पर प्रशासक (सरपंच) पति एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) द्वारा उनसे ₹7,000 की राशि की मांग की गई, जिसे मजबूरी में महिला को देना पड़ा। शिकायत में आगे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जब महिला ने बाद में पट्टे पर अंकित आधिकारिक रसीद राशि के बारे में जानकारी चाही, तो उसे पता चला कि उस पर मात्र ₹2,100 ही अंकित हैं।
​पीड़िता का कहना है कि रसीद और ली गई राशि में भारी अंतर देखकर जब उसने शिविर प्रभारी तथा वहां मौजूद अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से इस विसंगति की शिकायत करने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय कथित रूप से सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार लगाई और शिविर स्थल से बाहर कर दिया।
​उपखंड अधिकारी को दी गई शिकायत में पीड़िता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार द्वारा आमजन और गरीब परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन किया जाता है, परंतु स्थानीय स्तर पर पट्टा वितरण सहित अन्य लोक कल्याणकारी कार्यों में कथित रूप से अनियमितताएं और भ्रष्टाचार पनप रहा है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी या उच्चाधिकारी से जांच करवाई जाए, ताकि शिविर की पारदर्शिता बनी रहे और पीड़ित को न्याय मिल सके।
लालबहादुर भाखर संवाददाता 
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पट्टा दिलाने के नाम पर ₹7 हजार रिश्वत लेने का गंभीर आरोप, पीड़ित विधवा महिला ने एसडीएम से की उच्च स्तरीय जांच की मांग L.b. Bhakhar #LalbahadurbhakharJournalist ​पीलीबंगा (हनुमानगढ़) #लालबहादुर_भाखर उपखंड क्षेत्र के निकटवर्ती ग्राम पंचायत रामपुरा में आयोजित सरकारी ग्रामीण सेवा शिविर में एक संवेदनशील मामला सामने आया है। गांव की ही एक बेसहारा विधवा महिला ने स्थानीय ग्राम पंचायत प्रशासन और शिविर से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों पर आवासीय पट्टा जारी करने के एवज में ₹7,000 की कथित रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में पीड़ित महिला ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को एक लिखित शिकायत सौंपकर मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। ​प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपे गए शिकायती पत्र के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम बीती 6 जुलाई 2026 का बताया जा रहा है, जब राज्य सरकार के निर्देशानुसार ग्राम पंचायत रामपुरा में आमजन की समस्याओं के त्वरित निस्तारण हेतु 'ग्रामीण सेवा शिविर' का आयोजन किया गया था। इस शिविर में गांव की निवासी विधवा महिला शीला देवी पत्नी स्वर्गीय ओमप्रकाश ने भी अपने आवासीय मकान का वैध सरकारी पट्टा प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। शिकायत में उल्लेख है कि ग्राम पंचायत द्वारा उनके नाम से पट्टा तैयार भी कर दिया गया था। ​पीड़ित महिला शीला देवी का आरोप है कि पट्टा देने की आधिकारिक प्रक्रिया पूरी करने और उसे सुपुर्द करने के एवज में कथित तौर पर प्रशासक (सरपंच) पति एवं संबंधित ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) द्वारा उनसे ₹7,000 की राशि की मांग की गई, जिसे मजबूरी में महिला को देना पड़ा। शिकायत में आगे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि जब महिला ने बाद में पट्टे पर अंकित आधिकारिक रसीद राशि के बारे में जानकारी चाही, तो उसे पता चला कि उस पर मात्र ₹2,100 ही अंकित हैं। ​पीड़िता का कहना है कि रसीद और ली गई राशि में भारी अंतर देखकर जब उसने शिविर प्रभारी तथा वहां मौजूद अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से इस विसंगति की शिकायत करने का प्रयास किया, तो अधिकारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय कथित रूप से सार्वजनिक रूप से डांट-फटकार लगाई और शिविर स्थल से बाहर कर दिया। ​उपखंड अधिकारी को दी गई शिकायत में पीड़िता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार द्वारा आमजन और गरीब परिवारों को राहत देने के उद्देश्य से इन शिविरों का आयोजन किया जाता है, परंतु स्थानीय स्तर पर पट्टा वितरण सहित अन्य लोक कल्याणकारी कार्यों में कथित रूप से अनियमितताएं और भ्रष्टाचार पनप रहा है। महिला ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी या उच्चाधिकारी से जांच करवाई जाए, ताकि शिविर की पारदर्शिता बनी रहे और पीड़ित को न्याय मिल सके। लालबहादुर भाखर संवाददाता 9875131305 7014718676📞📞☎️☎️✅✅

Pilibanga, Hanumangarh | Jul 8, 2026

संत समाज और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी बहस, संत पर युवती ने लगाया था कथित तौर पर झूठा आरोप, विडियो सामने आने पर आई सच्चाई सामने**राजस्थान ब्रेकिंग: सीकर के गनेड़ी में जानकीनाथ मंदिर की बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं की नजर! महंत को फंसाने के लिए युवती का 'हनीट्रैप वीडियो' वायरल, संत समाज में भारी आक्रोश**
L.b. Bhakhar #Lalbahadurbhakharjournalist 
गनेड़ी (सीकर)।** #लालबहादुर_भाखर राजस्थान के सीकर जिले के ऐतिहासिक गनेड़ी गाँव से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ स्थित सुप्रसिद्ध भगवान जानकीनाथ मंदिर की अरबों रुपये की बेशकीमती डोली की भूमि (मंदिर की जमीन) को हड़पने के लिए एक बहुत बड़ी और घिनौनी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। आरोप है कि स्थानीय भू-माफियाओं और एक रसूखदार परिवार ने मंदिर के महंत स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज को अपने रास्ते से हटाने और उनकी छवि को धूमिल करने के लिए एक महिला का सहारा लेकर 'चरित्रहनन' का गंदा खेल खेला है।
इस बीच, सोशल मीडिया पर एक युवती का वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर मंदिर पक्ष का दावा है कि यह वीडियो पूरी तरह प्रायोजित (स्क्रिप्टेड) है और जमीन कब्जाने की नियत से महंत पर दबाव बनाने के लिए जारी किया गया है।
## साजिश का ताना-बाना: जमीन हथियाने के लिए रचा 'हनीट्रैप' का जाल
जानकीनाथ मंदिर प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, गनेड़ी गाँव में स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर के पास करोड़ों-अरबों रुपये की कीमती जमीन है। इस जमीन पर पिछले लंबे समय से कुछ स्थानीय भू-माफिया और एक विशेष परिवार गिद्ध दृष्टि गड़ाए बैठा है।
मंदिर के महंत स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी इस अवैध कब्जे और जमीन को बेचने के प्रयासों के खिलाफ लगातार कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ रहे हैं। जब भू-माफिया मंदिर के महंत को कानूनी रूप से डिगाने में नाकाम रहे, तो उन्होंने संत को बदनाम करने की साजिश रची। इसी साजिश के तहत एक युवती के माध्यम से महंत पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगवाए गए हैं।
## सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, मंदिर पक्ष ने पेश किए सबूत
पिछले कुछ घंटों से इलाके में एक युवती का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह रोते हुए महंत स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी पर गंभीर आरोप लगा रही है। हालांकि, इस वीडियो के सामने आते ही मंदिर प्रशासन और संत के समर्थकों ने पुरजोर तरीके से इसका खंडन किया है।
> **मंदिर प्रशासन का आधिकारिक बयान:**
> "यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी और ब्लैकमेलिंग की नीयत से बनाया गया है। मंदिर पक्ष के पास जमीन के एक-एक इंच के वैध और पुख्ता कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं। भू-माफिया चाहते हैं कि महंत जी डरकर या बदनामी के डर से पीछे हट जाएं और वे मंदिर की संपत्ति को खुर्द-बुर्द कर सकें। लेकिन हम इस गीदड़भभकी से डरने वाले नहीं हैं।"
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## संत समाज और ग्रामीणों में भारी आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग
इस घटनाक्रम के बाद पूरे शेखावाटी क्षेत्र के संत समाज और स्थानीय ग्रामीणों में भारी उबाल है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी का जीवन हमेशा धर्म और समाज सेवा के लिए समर्पित रहा है। उन्हें इस तरह एक सोची-समझी साजिश के तहत बदनाम करना बेहद निंदनीय है।
मंदिर प्रशासन और ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन से मुलाकात कर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मंदिर पक्ष ने मांग की है कि:
 1. **वीडियो की सत्यता की जांच हो:** वायरल वीडियो के पीछे कौन-से भू-माफिया और मास्टरमाइंड छिपे हैं, उनकी कॉल डिटेल और भूमिका की जांच की जाए।
 2. **जमीन के कागजात की सुरक्षा:** मंदिर की भूमि से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड को सुरक्षित रखते हुए भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
 3. **महंत जी को सुरक्षा मिले:** साजिशकर्ताओं द्वारा महंत जी को मानसिक और शारीरिक रूप से नुकसान पहुँचाने की आशंका को देखते हुए उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए।
## प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
सीकर प्रशासन के लिए यह मामला अब गले की फांस बनता जा रहा है, क्योंकि एक तरफ मंदिर की सुरक्षा और संतों का सम्मान जुड़ा है, तो दूसरी तरफ वायरल वीडियो की संवेदनशीलता। स्थानीय पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की तहकीकात शुरू कर दी है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस भू-माफिया तंत्र के खिलाफ कितनी जल्दी और कितनी सख्त कार्रवाई करता है।
**- ब्यूरो रिपोर्ट, राजस्थान समाचार।**
पत्रकार लालबहादुर भाखर 
9875131305
7014718676📞📞☎️☎️✅✅

संत समाज और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी बहस, संत पर युवती ने लगाया था कथित तौर पर झूठा आरोप, विडियो सामने आने पर आई सच्चाई सामने**राजस्थान ब्रेकिंग: सीकर के गनेड़ी में जानकीनाथ मंदिर की बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं की नजर! महंत को फंसाने के लिए युवती का 'हनीट्रैप वीडियो' वायरल, संत समाज में भारी आक्रोश** L.b. Bhakhar #Lalbahadurbhakharjournalist गनेड़ी (सीकर)।** #लालबहादुर_भाखर राजस्थान के सीकर जिले के ऐतिहासिक गनेड़ी गाँव से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ स्थित सुप्रसिद्ध भगवान जानकीनाथ मंदिर की अरबों रुपये की बेशकीमती डोली की भूमि (मंदिर की जमीन) को हड़पने के लिए एक बहुत बड़ी और घिनौनी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। आरोप है कि स्थानीय भू-माफियाओं और एक रसूखदार परिवार ने मंदिर के महंत स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी महाराज को अपने रास्ते से हटाने और उनकी छवि को धूमिल करने के लिए एक महिला का सहारा लेकर 'चरित्रहनन' का गंदा खेल खेला है। इस बीच, सोशल मीडिया पर एक युवती का वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर मंदिर पक्ष का दावा है कि यह वीडियो पूरी तरह प्रायोजित (स्क्रिप्टेड) है और जमीन कब्जाने की नियत से महंत पर दबाव बनाने के लिए जारी किया गया है। ## साजिश का ताना-बाना: जमीन हथियाने के लिए रचा 'हनीट्रैप' का जाल जानकीनाथ मंदिर प्रशासन और स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, गनेड़ी गाँव में स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर के पास करोड़ों-अरबों रुपये की कीमती जमीन है। इस जमीन पर पिछले लंबे समय से कुछ स्थानीय भू-माफिया और एक विशेष परिवार गिद्ध दृष्टि गड़ाए बैठा है। मंदिर के महंत स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी इस अवैध कब्जे और जमीन को बेचने के प्रयासों के खिलाफ लगातार कानूनी और सामाजिक लड़ाई लड़ रहे हैं। जब भू-माफिया मंदिर के महंत को कानूनी रूप से डिगाने में नाकाम रहे, तो उन्होंने संत को बदनाम करने की साजिश रची। इसी साजिश के तहत एक युवती के माध्यम से महंत पर झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगवाए गए हैं। ## सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, मंदिर पक्ष ने पेश किए सबूत पिछले कुछ घंटों से इलाके में एक युवती का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह रोते हुए महंत स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी पर गंभीर आरोप लगा रही है। हालांकि, इस वीडियो के सामने आते ही मंदिर प्रशासन और संत के समर्थकों ने पुरजोर तरीके से इसका खंडन किया है। > **मंदिर प्रशासन का आधिकारिक बयान:** > "यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी और ब्लैकमेलिंग की नीयत से बनाया गया है। मंदिर पक्ष के पास जमीन के एक-एक इंच के वैध और पुख्ता कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं। भू-माफिया चाहते हैं कि महंत जी डरकर या बदनामी के डर से पीछे हट जाएं और वे मंदिर की संपत्ति को खुर्द-बुर्द कर सकें। लेकिन हम इस गीदड़भभकी से डरने वाले नहीं हैं।" > ## संत समाज और ग्रामीणों में भारी आक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांग इस घटनाक्रम के बाद पूरे शेखावाटी क्षेत्र के संत समाज और स्थानीय ग्रामीणों में भारी उबाल है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वामी रामप्रपन्नाचार्य जी का जीवन हमेशा धर्म और समाज सेवा के लिए समर्पित रहा है। उन्हें इस तरह एक सोची-समझी साजिश के तहत बदनाम करना बेहद निंदनीय है। मंदिर प्रशासन और ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन से मुलाकात कर इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। मंदिर पक्ष ने मांग की है कि: 1. **वीडियो की सत्यता की जांच हो:** वायरल वीडियो के पीछे कौन-से भू-माफिया और मास्टरमाइंड छिपे हैं, उनकी कॉल डिटेल और भूमिका की जांच की जाए। 2. **जमीन के कागजात की सुरक्षा:** मंदिर की भूमि से जुड़े राजस्व रिकॉर्ड को सुरक्षित रखते हुए भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। 3. **महंत जी को सुरक्षा मिले:** साजिशकर्ताओं द्वारा महंत जी को मानसिक और शारीरिक रूप से नुकसान पहुँचाने की आशंका को देखते हुए उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए। ## प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती सीकर प्रशासन के लिए यह मामला अब गले की फांस बनता जा रहा है, क्योंकि एक तरफ मंदिर की सुरक्षा और संतों का सम्मान जुड़ा है, तो दूसरी तरफ वायरल वीडियो की संवेदनशीलता। स्थानीय पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की तहकीकात शुरू कर दी है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस भू-माफिया तंत्र के खिलाफ कितनी जल्दी और कितनी सख्त कार्रवाई करता है। **- ब्यूरो रिपोर्ट, राजस्थान समाचार।** पत्रकार लालबहादुर भाखर 9875131305 7014718676📞📞☎️☎️✅✅

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