पांच तिब्बती गैर सरकारी संगठनों तिब्बत वीमेन एसोसिएशन, इंटरनेशनल मिडिल वे मूवमेंट, उत्संग छोलका, धोमे छोलका तथा धोतोए छोलका ने ने संयुक्त पत्रकार सम्मलेन में कहा है कि चीन देश तिब्बती समुदाय पर लगातार छह दशकों से अत्याचार कर रहा है. आज जीरकपुर में पत्रकार सम्मेलन के दौरान तिब्बती नेताओं दावा टी सेरिंग, टीसेरिंग डोलमा, शयन तथा तेनज़ीन चोफेल ने पत्रकारों को बताया कि चीन ने तथाकथित जातीय एकता एवं प्रगति कानून लागू करके तिब्बती समुदाय की भाषा, संस्कृति, धर्म, परंपराओं तथा मौलिक अधिकारों को समाप्त करने का प्रयास किया है. इस कानून को लागू करके चीन ने करीब 10 लाख तिब्बती बच्चों को बोर्डिंग स्कूलों में भेजकर तिब्बती संस्कृति को समाप्त करके बच्चों को चाइना संस्कृति में बदलने का प्रयास किया जा रहा है. भारत में रह रहे पांच तिब्बती गैर संगठनों ने चीन द्वारा लागू किये गए नये कानून के विरोध में अंतर्राष्ट्रीय सतर पर दबाव बनाने के उद्देश्य से हिमाचल के धर्मशाला से हरियाणा के कुरुक्षेत्र तक पदयात्रा शुरू की है. यह पदयात्रा 30 अक्टूबर को धर्मशाला से शुरू होकर आज जीरकपुर पहुंची, जहां लोकहित सेवा समिति अध्यक्ष सतीश भारद्वाज , भारत भारती नगर संयोजक जनकराज शर्मा तथा तथास्तु चेरिटेबल सोसायटी अध्यक्ष डा. सरबजीत कौर ने अपने प्रतिनिधियों के साथ यात्रा का स्वागत करते हुए चीन की तिब्बती विरोधी नीतियों तथा तिब्बतियों पर किए जा रहे अत्याचारों की घोर निंदा करते हुए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से तिब्बतियों की मदद के लिए आगे आने की अपील की. तिब्बती गैर सरकारी संगठनों के नेताओं ने यह भी बताया है कि वे भारत देश के आभारी हैँ कि उन्होंने तिब्बतियों को करीब छह दशक से भारत में शरण देकर लगातार उनके धर्म गुरु दलाई लामा को सार्थक सहयोग दिया है. उन्होंने कहा है कि चीन द्वारा किये जा रहे अत्याचारों तथा नये कानून का करीब 30 देशों में तिब्बती समुदाय द्वारा संगठित होकर विरोध किया जा रहा है. उन्होंने यह भी माना है कि इस मुद्दे का स्थायी समाधान केवल आपसी संवाद, पारस्परिक सम्मान, न्याय और मौलिक मानवधिकारों के माध्यम से ही किया जा सकता है, बल प्रयोग,जबरदस्ती तथा किसी समुदाय की पहचान को दबाने से समाधान संभव नहीं है. उन्होंने बताया है कि चीन सरकार के अत्याचारों से तंग आकर अब तक 170 से अधिक तिब्बती निवासी आत्मदाह कर चुके हैँ. उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय नेताओं, सरकारों, सांसदों, संगठनों एवं तिब्बत के मित्र देशों से अपील की है कि वे तिब्बती जनता के अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक स्वतंत्रता तथा गरिमा को बहाल करवाने के लिए चीन सरकार पर दबाव बनाने हेतु अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके हमें सहयोग करें !!
(रिपोर्ट राकेश गांधी)
Thanesar, Kurukshetra | Nov 2, 2026