✍️✍️
#खटीमा में जब गुजराती डांडिया महोत्सव का आयोजन होना शुरू हुआ था तो मेरे मन में अक्सर विचार आता था,,,
पर्वतीय समाज आखिर कब अपनी संस्कृति संरक्षण हेतु जागेगा,,✍️
आखिर कब पर्वतीय संस्कृति संरक्षण,लोक कला परंपराओं भाषा संरक्षण पर आधारित आयोजन होंगे,,
क्यों ना खटीमा में छलिया महोत्सव हो, मांगलिक कार्यक्रमों में बुजुर्ग महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले परम्परागत गीत को आगे बढ़ाया जाय,पर्वतीय भाषाओं में युवा पीढ़ी के मध्य संवाद हो✍️✍️
लेकिन इस दिशा में लोग आगे नहीं आ पाए ,या किसी ने हिम्मत नहीं की,,
यह प्रयास सिर्फ कौतिक के दौरान ही कुछ बहुत नजर आया,,,
लेकिन देर में ही सही लेकिन जिला पंचायत सदस्य रीता कफलिया जी ने अपनी महिला टोली के साथ खटीमा में एक प्रयास किया,,,
झोड़ा चांचरी खेल महोत्सव के आयोजन को लेकर,,
जिसकी हम सब को सराहना करनी चाहिए,, ✍️
में देखता हूं की खटीमा में डांडिया महोत्सव को लेकर जो जुनून लोगों में मुझे दिखता है,,
भारी संख्या में इन कार्यक्रमों के स्पॉन्सर्स भी दिखते है,,
लेकिन उत्तराखंड की संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए आयोजित होने वाले कार्यक्रम,गीत भाषा बोली संवर्धन के कार्यक्रमों को सहेजने हेतु आयोजित कार्यक्रमों में लोग आखिर क्यों खुल कर नहीं आते,,,✍️✍️
आपको आगे आना होगा,,✍️
देवभूमि की संस्कृति भाषा परम्पराओं को अगर आप जीवित रख पाए,
तभी हमारे बुजुर्गों द्वारा सदियों से सहेजी हमारे परंपराए संस्कृति
हमारी नई पीढ़ी में हस्तांतरित होगी,,,,,✍️✍️
आइए हम सब मिल कर देवभूमि संस्कृति संरक्षण के इस अभियान का हिस्सा बने ,,
एक बार पुनः झोड़ा चांचरी खेल महोत्सव में उत्साह पूर्वक शामिल हुई मातृ शक्ति एवं आयोजकों को साधुवाद,,,,✍️✍️
जय उत्तराखंड 🙏
जय देवभूमि🙏
बेबाक उत्तराखंड #डिजिटल ✍️✍️✍️
Khatima, Udham Singh Nagar | Aug 31, 2026