छोटे कमरे से बड़े कारोबार तक का सफर, मशरूम उत्पादन ने प्रेमलता साहू को बनाया आत्मनिर्भर।
बिहान योजना से मिला आर्थिक संबल, मेहनत और लगन से बनीं ‘लखपति दीदी’, परिवार को मिला खुशहाली और सम्मान का नया आधार।
कभी कच्चे मकान में रहने वाले परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करने वाली ग्राम मुल्ले की श्रीमती प्रेमलता साहू आज अपनी मेहनत और लगन से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन गई हैं। घर के एक छोटे से कमरे से मशरूम उत्पादन की शुरुआत करने वाली प्रेमलता आज बड़े हॉल में मशरूम का उत्पादन कर रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने अपने छोटे से प्रयास को आजीविका के मजबूत साधन में बदल दिया है। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज वे प्रतिमाह लगभग 60 से 70 हजार रुपए की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं और ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
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