🔳विद्यार्थियों को जैविक खाद निर्माण एवं फसलों में उपयोग का दिया गया प्रशिक्षण
🔳जीरो बजट फार्मिंग से कम लागत में बेहतर उपज प्राप्त करने की दी गई जानकारी
🔳कटनी - शासकीय महाविद्यालय विजयराघवगढ़ में विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्राचार्य डॉ. अरुण कुमार सिंह के मार्गदर्शन में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा जैविक खाद निर्माण एवं फसलों में उसके उपयोग का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में जीरो बजट फार्मिंग के अंतर्गत कम समय में तैयार होने वाली जैविक खादों के निर्माण की विधि समझाई गई।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को देशी गाय के गोबर एवं गोमूत्र के जैविक खेती में उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही मटका खाद, जीवामृत, घन जीवामृत, बीज उपचार के लिए बीजामृत तथा कम समय में तैयार होने वाली जैविक खादों के निर्माण एवं फसलों में उपयोग की तकनीक बताई गई।
जैविक कृषि विशेषज्ञ ने जीवामृत खाद बनाने की विधि समझाते हुए बताया कि इसके लिए देशी गाय का 10 किलो गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन, पेड़ के नीचे की 2 किलो मिट्टी और 180 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। सभी सामग्रियों को प्लास्टिक के ड्रम में मिलाकर लकड़ी के डंडे से दिन में दो बार हिलाया जाता है। इसके बाद मिश्रण को छायादार स्थान पर 5 से 6 दिन तक रखा जाता है।
उन्होंने बताया कि तैयार जीवामृत को एक एकड़ फसल में सिंचाई के पानी के साथ दिया जा सकता है। महीने में दो बार इसके उपयोग से कम लागत में अच्छी उपज प्राप्त करने में मदद मिलती है। जीवामृत बनाने के लिए आवश्यक संसाधन गांवों में ही उपलब्ध होने से किसानों को बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इस तकनीक से जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ विद्यार्थियों को स्वरोजगार के लिए भी प्रेरित किया गया।
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53 views | Katni, Madhya Pradesh | Oct 9, 2026