प्रधानमंत्री के हरियाणा दौरे में छात्रों की आवाज़ दबाने का प्रयास, हरियाणा पुलिस ने एनएसयूआई के छात्र नेता एवं कार्यकर्ताओं को रोका
- देश का छात्र जवाब मांग रहा है, भाषण नहीं — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल बर्खास्त किया जाए: मनजीत लांग्यान
भिवानी, 17 जुलाई। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आह्वान पर एवं एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के निर्देशानुसार चलाए जा रहे छात्रों की गूंज अभियान के तहत भिवानी जिले के हजारों विद्यार्थियों की शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, छात्रवृत्ति, रोजगार एवं अन्य छात्र हितों से जुड़े मुद्दों का ज्ञापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपने जा रहे एनएसयूआई के छात्र नेता एवं कार्यकर्ताओं को आज हरियाणा पुलिस द्वारा रास्ते में रोक दिया गया और छात्रों की आवाज़ प्रधानमंत्री तक पहुँचने से रोकने का प्रयास किया गया।
एनएसयूआई भिवानी जिला अध्यक्ष मनजीत लांगायन ने कहा कि आज प्रधानमंत्री अपने भाषण में युवाओं के सपनों और विकसित भारत की बात कर रहे थे, लेकिन दूसरी ओर उन्हीं युवाओं की आवाज़ को पुलिस के बैरिकेडों के पीछे रोक दिया गया। यदि सरकार छात्रों के हितों के प्रति ईमानदार है तो शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने जा रहे छात्र नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को रोकने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
उन्होंने कहा कि आज देश का छात्र सरकार से जवाब मांग रहा है कि नीट पेपर लीक, एचटेट विवाद, प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रही अनियमितताएं, भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता का अभाव, एससी-बीसी विद्यार्थियों की लंबित छात्रवृत्तियां, बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का जिम्मेदार कौन है, लेकिन इन सवालों का उत्तर देने के बजाय सरकार छात्रों की आवाज़ को दबाने में लगी हुई है।
मनजीत लांग्यान ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पूरी तरह नैतिक रूप से विफल साबित हुए हैं। जब बार-बार पेपर लीक हो रहे हैं, परीक्षाएं विवादों में घिर रही हैं और लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लग रहा है, तब केवल भाषणों से काम नहीं चलेगा। धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए, अन्यथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें तुरंत मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें। देश का छात्र अब आश्वासन नहीं, जवाबदेही चाहता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में ज्ञापन देना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि प्रधानमंत्री तक छात्रों की आवाज भी नहीं पहुंचने दी जाएगी, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। पुलिस के बल पर छात्रों की आवाज को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है, लेकिन दबाया नहीं जा सकता।
वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व छात्र नेता उमेश भारद्वाज ने कहा कि जिस सरकार को छात्रों के ज्ञापन से डर लगने लगे, उसे आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। यदि सरकार के पास अपनी शिक्षा नीति और कार्यप्रणाली का जवाब है तो उसे छात्रों की बात सुनने से परहेज नहीं होना चाहिए था, लेकिन आज शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन देने जा रहे छात्र नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को रोककर यह स्पष्ट कर दिया गया कि सरकार छात्रों के सवालों से बचना चाहती है।
उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक, एचटेट विवाद, भर्ती परीक्षाओं की अनियमितताएं, छात्रवृत्ति में देरी और शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं ने देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य संकट में डाल दिया है। इन विफलताओं की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद छोड़ देना चाहिए।
एनएसयूआई ने स्पष्ट किया कि छात्रों की गूंज अभियान किसी राजनीतिक लाभ का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों विद्यार्थियों के भविष्य, शिक्षा और रोजगार के अधिकार की लड़ाई है। सरकार चाहे जितनी बैरिकेडिंग कर ले, छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। एनएसयूआई आने वाले समय में और अधिक मजबूती के साथ छात्रों के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रहेगी।
इस दौरान ऋतिक राणा, संदीप, जतिन, सचिन, इमरान, इरफान खान, कुणाल, साहिल, आर.के., पवन, मोहम्मद, यश और सुनील सहित बड़ी संख्या में एनएसयूआई कार्यकर्ता एवं छात्र उपस्थित रहे।