सात समंदर पार से गयाजी पहुंचे पितरों के मोक्षार्थी, विदेशी श्रद्धालुओं ने फल्गु तट पर किया पिंडदान।
गयाजी में पितृपक्ष की आस्था ने सरहदों की सीमाएं मिटा दी हैं। पितरों के मोक्ष और पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना लेकर जर्मनी, इटली, स्पेन, रूस, नाइजीरिया समेत कई देशों के करीब 48 विदेशी श्रद्धालु गयाजी पहुंचे हैं। विष्णुपद मंदिर के देवघाट पर विदेशी महिला तीर्थयात्रियों ने भारतीय परिधान में विधि-विधान से पिंडदान और तर्पण किया। अपने पूर्वजों को याद करते हुए कई श्रद्धालु भावुक भी हो गए। विदेशी श्रद्धालुओं ने विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरण चिह्न के दर्शन कर गयाजीधाम की धार्मिक परंपराओं को करीब से जाना।
भारतीय परिधान में विदेशी युवतियों ने किया पिंडदान
गयाजी के देवघाट पर उस वक्त श्रद्धा का अनोखा नजारा देखने को मिला, जब विदेशी युवतियां भारतीय परिधान साड़ी पहनकर पिंडदान करने पहुंचीं। साड़ी में सजी विदेशी महिला श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के तट पर श्राद्ध कर्म पूरा किया और तर्पण कर अपने पितरों को श्रद्धांजलि दी। यह दृश्य वहां मौजूद श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहा।
विष्णुपद में किए भगवान विष्णु के दर्शन
गयाजी पहुंचने के बाद विदेशी तीर्थयात्रियों ने गयाजी के प्रमुख धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया। सभी विष्णुपद मंदिर पहुंचे और भगवान विष्णु के चरण चिह्न के दर्शन किए। मंदिर की धार्मिक मान्यताओं और गयाधाम में पिंडदान की परंपरा को जानने में भी विदेशी श्रद्धालुओं ने विशेष रुचि दिखाई।
48 विदेशी श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान
विदेशों में इस्कॉन से जुड़े प्रचारक स्वामी लोकनाथ गौड़ के अनुसार जर्मनी, स्पेन, इटली और रूस समेत विभिन्न देशों से करीब 48 विदेशी तीर्थयात्री पहले चरण में गयाजी पहुंचे हैं। उन्होंने फल्गु तट पर पिंडदान, श्राद्ध कर्म और तर्पण कर अपने पूर्वजों के मोक्ष की कामना की।
5 अक्टूबर को फिर पहुंचेगा विदेशी श्रद्धालुओं का जत्था
स्वामी लोकनाथ गौड़ ने बताया कि विदेशी श्रद्धालुओं के गयाजी आने का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। दूसरे चरण में अफ्रीका से विदेशी तीर्थयात्रियों के 5 अक्टूबर को गयाजी पहुंचने की जानकारी दी गई है।
गयाजी की ओर बढ़ रहा विदेशी श्रद्धालुओं का रुझान
गयाजी में विदेशी श्रद्धालुओं के पिंडदान का सिलसिला पहले भी देखने को मिला है। वर्ष 2023 में भी कई देशों से विदेशी तीर्थयात्री पितृपक्ष मेले में पहुंचे थे और फल्गु तट, अक्षयवट और विष्णुपद में पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की थी।पितृपक्ष में गयाजी को पितरों के मोक्ष और तर्पण का प्रमुख तीर्थ माना जाता है। ऐसे में सात समंदर पार से आए श्रद्धालुओं का फल्गु तट पर पिंडदान करना गयाधाम की धार्मिक परंपरा की अंतरराष्ट्रीय पहुंच का अनोखा दृश्य पेश कर रहा है।