सीएचसी कदौरा में जन्म प्रमाण पत्र बना कमाई का जरिया!
8 साल से भटक रहा पिता, खर्चा-पानी बिना नहीं चलता काम — डीएम-सीएमओ तक पहुंची शिकायत
कदौरा (जालौन)
सरकारी दफ्तरों में बिना चढ़ावे के काम न होने की शिकायतें अक्सर सुनने को मिलती हैं, लेकिन जालौन के सीएचसी कदौरा में तो मानो यह सिस्टम ही बन चुका है।
यहां एक मासूम के जन्म प्रमाण पत्र के लिए उसका पिता पिछले 8 साल से दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।
मामला अरविंद कुशवाहा का है, जिनके पुत्र का जन्म वर्ष 2016 में सीएचसी आटा में हुआ था।
नियमानुसार जन्म प्रमाण पत्र सीएचसी कदौरा से जारी होना था, लेकिन आज तक यह साधारण सा काम पूरा नहीं हो पाया।
पीड़ित का आरोप है कि वह कई बार सीएचसी कदौरा पहुंचा, लेकिन हर बार उसे टरका दिया गया।
कभी रिकॉर्ड लाने की बात, तो कभी फाइल गायब होने का बहाना।
जब सीएचसी आटा में जानकारी की गई, तो बताया गया कि 2016 का रिकॉर्ड या तो उपलब्ध नहीं है या गुम हो चुका है।
बिना खर्चा-पानी के काम नहीं होगा — बाबू पर गंभीर आरोप
पीड़ित अरविंद कुशवाहा का सीधा आरोप है कि सीएचसी कदौरा में तैनात संबंधित बाबू वीरेंद्र द्वारा इशारों-इशारों में खर्चा-पानी की मांग की जाती है।
जब तक पैसे न दो, फाइल आगे नहीं बढ़ती। यही वजह है कि एक बच्चे का भविष्य वर्षों से कागजों में फंसा पड़ा है।
बच्चे की मानसिक स्थिति ठीक नहीं, फिर भी नहीं पसीज रहे अधिकारी
मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि जिस बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनना है, उसकी मानसिक स्थिति भी सामान्य नहीं है।
बिना जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड के उसे किसी भी विद्यालय में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है।
एक तरफ सरकार सबका साथ, सबका विकास की बात करती है, वहीं दूसरी ओर एक मासूम का भविष्य सिस्टम की लापरवाही में कुचला जा रहा है।
डीएम और सीएमओ तक पहुंची शिकायत, फिर भी कार्रवाई शून्य
पीड़ित ने इस मामले की शिकायत जिलाधिकारी (DM) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) तक भी पहुंचाई है।
बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
इससे साफ है कि या तो शिकायतों को दबाया जा रहा है या फिर जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
अधीक्षक ने दिया आश्वासन, लेकिन भरोसा टूटा हुआ
सीएचसी कदौरा के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. उदय को भी लिखित रूप से अवगत कराया गया है।
उन्होंने जांच कर जल्द समाधान का आश्वासन दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भी सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा?
पहले भी विवादों में रहा है सीएचसी कदौरा
यह कोई पहला मामला नहीं है जब सीएचसी कदौरा सुर्खियों में आया हो।
इससे पहले भी यहां लापरवाही, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं।
बावजूद इसके न तो सिस्टम सुधर रहा है और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई हो रही है।
बड़ा सवाल — कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि
क्या योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति जालौन में लागू नहीं होती?
क्या एक बच्चे का भविष्य सिर्फ इसलिए अंधेरे में जाएगा क्योंकि उसके पिता खर्चा-पानी देने में असमर्थ हैं?
और आखिर कब तक सरकारी बाबुओं की मनमानी यूं ही चलती रहेगी?
अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।
आपकी क्या राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं ??
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Kalpi, Jalaun | Jun 14, 2026