एक आवाज़… जो पहाड़ की धड़कन बन गई
कुछ आवाज़ें सिर्फ कानों तक नहीं पहुँचतीं,
वे सीधे दिल में उतर जाती हैं।
श्री नरेंद्र सिंह नेगी जी की आवाज़ भी ऐसी ही एक आवाज़ है—
जिसमें हमें अपना गाँव सुनाई देता है,
अपनी माँ की बोली सुनाई देती है,
खेतों की मिट्टी की खुशबू आती है,
पहाड़ की पगडंडियाँ दिखाई देती हैं
और दूर शहरों में बसे अपने लोगों की याद आती है।
उनके गीतों में सिर्फ सुर और शब्द नहीं हैं…
उनमें पूरा उत्तराखंड सांस लेता है।
कभी उनके गीत पहाड़ के प्रेम को गुनगुनाते हैं,
कभी गाँव की खुशियों को,
कभी पलायन के दर्द को,
कभी खाली होते घरों को,
तो कभी व्यवस्था से सवाल करते हुए
हमारे भीतर सोई हुई आवाज़ को जगा देते हैं।
शायद यही वजह है कि
दशकों बाद भी उनके गीत पुराने नहीं लगते…
क्योंकि पहाड़ का दर्द पुराना नहीं हुआ,
पहाड़ का प्रेम कम नहीं हुआ,
और अपनी मिट्टी से हमारा रिश्ता आज भी वही है।
नेगी जी,
आपने सिर्फ गीत नहीं लिखे…
आपने हमारी पीढ़ियों की यादें लिखी हैं।
हमारे पहाड़ की कहानी लिखी है।
हमारी पहचान को आवाज़ दी है।
आज आपके जन्मदिन पर
बस इतनी-सी कामना है—
आपकी आवाज़ यूँ ही गूंजती रहे,
आपकी कलम यूँ ही पहाड़ के मन को शब्द देती रहे
और आने वाली पीढ़ियाँ भी आपके गीतों में
अपने पहाड़ को महसूस करती रहें।
जन्मदिन की अनंत शुभकामनाएँ नेगी जी 🙏
@officialnegida 🫰♥️