#संगरिया में आवारा 🐕🦺🦮🐕🐩कुत्तों (टोमी) का 'खूनी आतंक', क्या नगर पालिका अभी भी गहरी नींद में है?
संगरिया की आवाज़
गुरु नानक बस्ती अब धीरे-धीरे "डेंजर ज़ोन" में तब्दील होती नजर आ रही है। सवाल यह है कि आखिर संगरिया नगर पालिका जागेगी कब? या फिर हर नई घटना के बाद केवल फाइलों में ही कार्रवाई होती रहेगी?
संगरिया शहर में आवारा और खूंखार कुत्तों का आतंक इस कदर बढ़ चुका है कि अब नागरिक अपने ही घरों से बाहर निकलने में खौफ महसूस कर रहे हैं। नगर पालिका के दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर अब खुलकर सामने दिखाई दे रहा है। शहर की सड़कें, गलियां और सार्वजनिक स्थल आमजन के लिए असुरक्षित होते जा रहे हैं, जबकि जिम्मेदार तंत्र मानो किसी बड़े हादसे की प्रतीक्षा में बैठा हो।
#आज, 12 जून 2026 को सुबह करीब 7 बजे, गुरु नानक बस्ती (वार्ड नं. 30) में एक और दर्दनाक घटना सामने आई। यहां एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। महिला को हाथ-पैर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं और वे अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं।
घटना के बाद शहरवासियों का गुस्सा फूट पड़ा। वार्ड नंबर 28 से 30 के निवासियों ने एकजुट होकर उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपते हुए नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
खूनी आंकड़े पूछ रहे हैं सवाल — आखिर कब जागेगा प्रशासन?
ज्ञापन में नागरिकों ने उन घटनाओं का उल्लेख किया है जो यह बताने के लिए काफी हैं कि समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है—
🔴 🐕🦺 ताजा हमला: आज ही वार्ड 30 में 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला को कुत्तों ने बुरी तरह लहूलुहान कर दिया।
🔴 🐕बाइक सवार पर हमला: वार्ड 29 के निवासी संजय सोनी पर पालतू कुत्ते ने हमला किया, जिससे वे बाइक सहित गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।
🔴 🦮मौत का शिकार: गत वर्ष वार्ड नं. 16 में एक महिला कुत्तों के हमले से बचने के प्रयास में सड़क पर गिर गई थी, जिससे उसकी असमय मृत्यु हो गई।
🔴 🐕मासूम भी सुरक्षित नहीं: पिछले महीने वार्ड 16 में महज 2 वर्षीय मासूम बालक केशव को कुत्ते ने काटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
🔴 🐕 दिग्गज भी निशाने पर: विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र मोहन ऐरी भी इन खूंखार कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं।
🔴 🐩पुलिस में मामला दर्ज: वार्ड 23 के बुजुर्ग देवीलाल पर हुए हमले के बाद थाने में बाकायदा मामला तक दर्ज कराया जा चुका है।
इसके अलावा वार्ड नंबर 4, 12, 13, 19, 23, 25 और 29 सहित कई क्षेत्रों में आए दिन बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को कुत्तों द्वारा निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सार्वजनिक स्थल बन रहे हैं 'नो-गो ज़ोन'
शहर के मुख्य मार्ग, बाजार, स्कूल-कॉलेज, धार्मिक स्थल जैसे गुरुद्वारा साहिब, एसकेजीवी कॉलेज और चौटाला रोड पर सुबह-शाम कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते देखे जा सकते हैं। रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही वाले इन क्षेत्रों में भय का माहौल बना हुआ है।
कुछ लोगों द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर नियमित रूप से कुत्तों को भोजन डालने के कारण उनकी संख्या एक ही स्थान पर एकत्रित हो रही है, जिससे राहगीरों का निकलना तक मुश्किल हो गया है। दूसरी ओर साफ-सफाई और जनसुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करने वाली नगर पालिका की सक्रियता शायद केवल बैठकों और कागजी रिपोर्टों तक सीमित दिखाई देती है।
वार्डवासियों की प्रमुख मांगें
वार्ड नं. 28 से 30 के नागरिकों ने प्रशासन के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखी हैं—
✔️ संगरिया शहर में विशेष अभियान चलाकर सभी खतरनाक और आक्रामक आवारा कुत्तों को तुरंत पकड़ा जाए।
✔️ जो मालिक अपने पालतू कुत्तों को खुला छोड़ते हैं, उन पर भारी जुर्माना लगाया जाए तथा सभी पालतू कुत्तों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाए।
✔️ नगर पालिका 15 दिनों के भीतर इस समस्या के समाधान की स्पष्ट कार्ययोजना सार्वजनिक करे।
✔️ कुत्तों के हमलों में घायल हुए पीड़ितों को उचित आर्थिक सहायता और मुआवजा दिया जाए।
✔️ जिन अधिकारियों ने पूर्व में प्राप्त शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की, उनकी जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।
15 दिन का अल्टीमेटम, नहीं तो होगा जनआंदोलन
वार्डवासियों, सामाजिक संगठनों और पीड़ित परिवारों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो नागरिक, सामाजिक संगठन, व्यापार मंडल और पीड़ित परिवार संयुक्त रूप से नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन, उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने को मजबूर होंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
एक और बड़ा सवाल, जिसका जवाब नगर पालिका को देना चाहिए
जब पिछले कई वर्षों से कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, तो आखिर पिछले 5 वर्षों में नगर पालिका द्वारा आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए #नसबंदी (ABC) योजना पर क्या कार्य किया गया?
क्या किसी व्यवस्थित #डॉग_शेल्टर_हाउस की स्थापना की गई?
यदि की गई तो उसकी क्षमता, खर्च और वर्तमान स्थिति क्या है?
यदि नहीं की गई, तो आखिर क्यों नहीं?
और यदि योजनाएं बनी थीं, तो उनका परिणाम जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा?
आखिर जनता जानना चाहती है...
क्या नगर पालिका किसी और बड़े हादसे, किसी मासूम की जान जाने या किसी गंभीर जनहानि का इंतजार कर रही है?
या फिर इस बार केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर कार्रवाई भी दिखाई देगी?
संगरिया की जनता जवाब चाहती है — और जवाब अब शब्दों में नहीं, कार्रवाई में चाहिए।
(संगरिया नगर पालिका ने पहले वक्त में सुरों से शहर को निजात दिलाई थी फिर राज्य सरकार नंदी गौशाला व नगर पालिका के सहयोग से मोटे तौर पर नंदीयों से छुटकारा मिल गया तो क्या #आवारा_कुत्तों से छुटकारा नहीं मिल सकता संगरिया नगरपालिका एक प्रयास तो करके देखें)
संगरिया की आवाज़।
Government of Rajasthan संगरिया पुलिस Jai Kaushik
District Collector & Magistrate - Hanumangarh
Sangaria, Hanumangarh | Jun 12, 2026