
वाकई, प्रभात कुमार जैसे ईमानदार, निष्पक्ष और निर्भीक प्रशासनिक अधिकारी बहुत कम देखने को मिलते हैं।
हो सकता है कि उनके कुछ निर्णयों से किसी को लाभ हुआ हो और किसी को असहमति भी रही हो, लेकिन शायद ही कोई इस बात से इनकार कर सके कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ किया। उनका मानना था कि एक अधिकारी की पहचान सिर्फ कार्यालय में बैठने से नहीं, बल्कि सड़क पर उतरकर जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने से बनती है। यही कारण था कि वे अक्सर क्षेत्र का लगातार भ्रमण करते और मौके पर ही समस्याओं के समाधान का प्रयास करते थे।
गरीब, कमजोर और पीड़ित लोगों की शिकायतों को वे सिर्फ सुनते ही नहीं थे, बल्कि उन पर बिना देर किए कार्रवाई भी करते थे। आम लोगों के प्रति उनकी संवेदनशीलता और न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता उन्हें एक अलग पहचान देती थी।
कई लोगों की राय है कि अवैध बालू और मिट्टी के कारोबार के खिलाफ उनकी सख्त कार्रवाई के कारण वे ऐसे तत्वों को बिल्कुल पसंद नहीं थे। लेकिन कानून का पालन कराने और जनहित को सर्वोपरि रखने की उनकी कार्यशैली ने आम जनता के बीच उन्हें एक ईमानदार और कर्मठ अधिकारी की पहचान दिलाई।
ऐसे जनसेवक पद से नहीं, बल्कि अपने कार्यों और व्यवहार से लोगों के दिलों में जगह बनाते हैं। बिक्रमगंज में उनकी सेवाओं और कार्यशैली को लंबे समय तक याद रखा जाएगा। प्रभात कुमार सर के उज्ज्वल भविष्य और नई जिम्मेदारियों के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ।