
पहाड़ी अपने ही पहाड़ी के इनोवेशन को सपोर्ट नहीं कर सकते, तो कम से कम उसकी आलोचना करके हौसला तो मत तोड़ो!
एक बात आज आप सभी से साझा करना चाहता हूं। आखिर हम पहाड़ी इतने नेगेटिव क्यों होते जा रहे हैं? अपने ही आदमी को सपोर्ट करना तो दूर, उसकी आलोचना करने में सबसे आगे क्यों रहते हैं?
आजकल RMS में सेब और नाशपाती के ड्राइड चिप्स तैयार किए जा रहे हैं। मैंने इस नए प्रोडक्ट को फिलहाल सिर्फ फीडबैक लेने के लिए संजौली की एक दुकान पर रखा है, ताकि पता चल सके कि पर्यटकों को यह कितना पसंद आता है और मार्केट में इसका रिस्पॉन्स कैसा रहता है।
खुशी की बात यह है कि पर्यटक इसे पसंद कर रहे हैं और खरीद भी रहे हैं। लेकिन कुछ अपने पहाड़ी भाई दुकान पर पहुंचते हैं, पैकेट उठाते हैं और बिना इसकी प्रक्रिया समझे बोलते हैं— “RMS का है, महंगा बेच रहा है! दो सेब काटकर दो सौ ग्राम बना दिए, इसे कौन खरीदेगा?”
भाई साहब, जरा इसकी पूरी प्रक्रिया तो समझिए!
18 किलो ताजे सेब को ड्राई करने में लगभग 9 घंटे लग सकते हैं। ड्राइंग के बाद उसका 2.5 kg बोई बनती है ।काफी कम हो जाता है। इसके अलावा बिजली का खर्च, 18 kg fruit ,फल काटने की मेहनत, मशीन की लागत, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और दूसरे खर्च भी जुड़ते हैं। सिर्फ पैकिंग पर ही लगभग ₹ 100 खर्च हो रहे हैं।
इसलिए दो सौ ग्राम के पैकेट की कीमत को केवल दो ताजे सेबों की कीमत से तुलना करके तय नहीं किया जा सकता। प्रोडक्ट बनाने की पूरी लागत समझना भी जरूरी है।
और एक बात स्पष्ट कर दूं— यह मेरा नया कॉन्सेप्ट है, जिसे मैं अभी मार्केट में टेस्ट कर रहा हूं। मेरा उद्देश्य सिर्फ ड्राइड चिप्स बेचना नहीं, बल्कि हिमाचल के बागवानों के लिए सेब और नाशपाती से वैल्यू एडिशन का एक नया रास्ता तलाशना है।
अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो भविष्य में हिमाचल के हजारों बागवानों को अपने फल से अतिरिक्त आमदनी कमाने का अवसर मिल सकता है। इससे फल की बर्बादी कम करने और बागवानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में भी मदद मिल सकती है।
लेकिन किसी नए काम को आगे बढ़ने से पहले ही उसका मजाक उड़ाना और बिना पूरी जानकारी के उसे महंगा बताना कहां तक सही है?
पहाड़ी भाइयों, हर नए काम को खरीदकर सपोर्ट करना जरूरी नहीं है, लेकिन कम से कम उसकी मेहनत और सोच का सम्मान तो कीजिए। कोई कमी नजर आती है तो सकारात्मक सुझाव दीजिए। आलोचना कीजिए, लेकिन ऐसी आलोचना जो किसी के काम को बेहतर बनाए, न कि उसका हौसला तोड़े।
याद रखिए, आज जो प्रयोग है, वही कल हिमाचल के बागवानों के लिए एक नया व्यवसाय बन सकता है।
RMS का उद्देश्य सिर्फ अपना कारोबार बढ़ाना नहीं, बल्कि बागवानों के लिए नए अवसर तलाशना भी है।
RMS doesn't talk… RMS shows! 🍎🍐
Be legal. Be genuine. Support innovation. Support Himachali farmers.