
फॉर्म-7 की कथित फर्जी आपत्तियों पर गरमाया मामला, पांच लोगों ने दिए शपथ पत्र; हाईकोर्ट जाने की तैयारी
किच्छा। मतदाता सूची में नामों को लेकर फॉर्म-7 के तहत दर्ज कथित फर्जी ऑनलाइन आपत्तियों का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। किच्छा विधायक तिलक राज बेहड़ ने दावा किया है कि ग्राम महाराजपुर निवासी पांच लोगों—अभिषेक पुजारा, शुभम पुजारा, देवेंद्र कुमार, विद्युत खुराना और विकास ठुकराल—ने मतदाता रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ), किच्छा विधानसभा के समक्ष शपथ पत्र प्रस्तुत किए हैं।
विधायक के अनुसार, शपथ पत्रों में संबंधित लोगों ने कहा है कि उन्होंने फॉर्म-7 के तहत किसी भी प्रकार की ऑनलाइन आपत्ति दर्ज नहीं की। उनका आरोप है कि उनके नाम और पहचान का कथित रूप से दुरुपयोग कर ऑनलाइन आपत्तियां दर्ज की गईं। संबंधित लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस में शिकायत, मुकदमा दर्ज करने की मांग
बेहड़ के मुताबिक इस मामले को लेकर कोतवाली किच्छा के प्रभारी निरीक्षक को लिखित शिकायत भी दी गई है। शिकायत में मामले की जांच कर मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की गई है। विधायक ने बताया कि शिकायत की प्राप्ति भी प्राप्त हो चुकी है।
और लोग भी सामने आने का दावा
विधायक तिलक राज बेहड़ का कहना है कि ऐसे अन्य लोग भी सामने आ रहे हैं, जिनके नाम से फॉर्म-7 के तहत आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई है। उनके अनुसार, जिन लोगों से संपर्क किया गया, उनमें से अधिकांश ने कथित तौर पर ऐसी किसी ऑनलाइन आपत्ति की जानकारी होने से इनकार किया है।
बेहड़ ने कहा कि ऐसे लोग भी अब अपने शपथ पत्र प्रस्तुत कर पूरे मामले की जांच की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि दस्तावेजी साक्ष्य और शपथ पत्र एकत्र किए जा रहे हैं।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी
विधायक ने कहा कि मामले से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य जुटाने के बाद पूरे प्रकरण को हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी है। प्रस्तावित याचिका में भारत निर्वाचन आयोग, जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर और अन्य संबंधित अधिकारियों को पक्षकार बनाए जाने की बात भी कही गई है।
उनका कहना है कि अदालत के समक्ष यह सवाल रखा जाएगा कि संबंधित लोगों के नाम से फॉर्म-7 के तहत ऑनलाइन आपत्तियां किस आधार पर दर्ज हुईं और उन्हें स्वीकार करने की प्रक्रिया में किन तथ्यों एवं दस्तावेजों का परीक्षण किया गया।
जांच और कार्रवाई की मांग
बेहड़ ने प्रशासन से मांग की है कि फॉर्म-7 के तहत दर्ज सभी संदिग्ध ऑनलाइन आपत्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी तरह की फर्जीवाड़े या पहचान के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
हालांकि, पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी सामने आना बाकी है। निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित ऑनलाइन आपत्तियां किस माध्यम से और किन परिस्थितियों में दर्ज की गईं।
I7 News के लिए बड़ा सवाल: क्या फॉर्म-7 के तहत दर्ज सभी संदिग्ध ऑनलाइन आपत्तियों की तकनीकी और दस्तावेजी जांच होगी? और यदि किसी व्यक्ति की पहचान का दुरुपयोग कर आवेदन किया गया है, तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है—इसका जवाब अब प्रशासनिक जांच और संभावित न्यायिक कार्रवाई से सामने आने की उम्मीद है।