
करोड़ों डूबे... बांध टूटा! मोतिहारी में विकास के दावों की खुली पोल, दहशत में ग्रामीण!
बिहार के पूर्वी चंपारण (सुगौली) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है! जहाँ एक तरफ अभी बाढ़ का असली सीजन आना बाकी है, वहीं दूसरी तरफ करोड़ों की लागत से बना नया बांध पहली ही बारिश में ताश के पत्तों की तरह ढहने लगा है। विकास के दावों की पोल खुल चुकी है और जनता का करोड़ों रुपया पानी में बहता नजर आ रहा है!
करोड़ों डूबे... बांध टूटा: सुगौली प्रखंड के लालपरसा धुमनी टोला में सिकरहना नदी पर बने इस नए बांध में तीन-चार दिनों की शुरुआती बारिश के बाद ही बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं और कई जगहों पर मिट्टी धंस चुकी है।
बांध बनाया या पगडंडी? स्थानीय ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती गई है। बांध की न तो चौड़ाई सही है और न ही ऊंचाई। यह बांध कम और एक मामूली पगडंडी ज्यादा दिखाई दे रहा है।
मंडरा रहा है महा-संकट: नेपाल और जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश के कारण सिकरहना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पानी का भारी दबाव इस कमजोर बांध पर पड़ रहा है, जिससे कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।
8 साल का दर्द और किसानों का आक्रोश:
"पिछले 8 वर्षों से हम लोग हर साल बाढ़ की विभीषिका झेलते आ रहे हैं। इस बार नए बांध से सुरक्षा की उम्मीद जगी थी, लेकिन इंजीनियरों के इस कारनामे ने हमारी फसलों और आशियानों को फिर से खतरे में डाल दिया है।" — प्रदीप कुमार और मेघन सहनी (स्थानीय ग्रामीण)
❓ जनता का प्रशासन से तीखा सवाल:
आखिर हर बार बाढ़ आने से ठीक पहले ही आनन-फानन में ऐसा काम क्यों किया जाता है? समय रहते पुख्ता तैयारी क्यों नहीं की जाती? ग्रामीणों ने विभाग और प्रशासन से मांग की है कि बिना एक पल गंवाए तुरंत बांध की मरम्मत कराई जाए, वरना पूरा इलाका जलमग्न हो जाएगा।
👇 दोस्तों, क्या ऐसे गैर-जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर सख्त से सख्त कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?
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