
कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम में खरगोन ने बनाया प्रदेश में पहला स्थान
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नस्ल सुधार के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में जिले की बड़ी उपलब्धि
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पशुपालकों से समय पर कृत्रिम गर्भाधान कराने की अपील
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खरगोन 05 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री के दुग्ध उत्पादन दोगुना करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के अनुरूप पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा प्रदेशभर में संचालित कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के अंतर्गत खरगोन जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए मध्यप्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जिले में वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित 01 लाख 23 हजार 696 कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 28 हजार 834 पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान किया जा चुका है, जिसके आधार पर खरगोन प्रदेश में शीर्ष स्थान पर है।
जिले ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 102 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की थी। इस उपलब्धि पर पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा जिले की सराहना भी की गई थी।
कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम के माध्यम से गाय एवं भैंसों में उन्नत नस्ल के वीर्य का उपयोग कर नस्ल सुधार किया जा रहा है। इससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होने के साथ पशुओं की गुणवत्ता बेहतर होगी तथा पशुपालकों की आय में भी बढ़ोतरी होगी। राज्य शासन द्वारा इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए अवर्णित नस्ल की गाय-भैंसों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के लिए लखपति गोपालक दीदी योजना भी प्रारंभ की गई है।
उपसंचालक, पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. जी.एस. सोलंकी ने जिले के सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे अपनी गाय एवं भैंसों में समय पर कृत्रिम गर्भाधान कराकर उन्नत नस्ल के बछड़े एवं बछियों का उत्पादन सुनिश्चित करें। उन्होंने बताया कि कृत्रिम गर्भाधान एक सुरक्षित, वैज्ञानिक एवं प्रभावी तकनीक है, जो पशुओं की नस्ल सुधारने के साथ दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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