
*मऊगंज में ओवररेटिंग का खेल!*
*एमआरपी हुई बेबस, शराब दुकान पर खुलेआम वसूली का आरोप; आबकारी विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल*
*पेट्रोल न्यूज़ 🔥मऊगंज।* जिले में शराब बिक्री को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। चाक मोड़ स्थित सिंचाई विभाग के सामने संचालित शराब दुकान पर उपभोक्ताओं से निर्धारित एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि हर क्वार्टर पर 25 से 50 रुपये तक अतिरिक्त राशि ली जा रही है, जबकि शराब की बोतलों पर स्पष्ट रूप से अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) अंकित है।
ग्राहकों का कहना है कि दुकान पर तय कीमत की बजाय ठेकेदार और सेल्समैन अपने हिसाब से रेट तय कर रहे हैं। विरोध करने पर ग्राहकों को या तो शराब नहीं दी जाती या फिर बहस का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उपभोक्ता खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
*एक दुकान, अलग रेट... आखिर क्यों?*
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले की अन्य शराब दुकानों की तुलना में इस दुकान पर शराब सबसे महंगी बेची जा रही है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि सरकार ने प्रत्येक ब्रांड की एमआरपी तय कर रखी है, तो फिर एक ही जिले में अलग-अलग कीमत कैसे वसूली जा रही है? क्या इस पर निगरानी रखने वाला कोई नहीं है?
*आबकारी विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल*
क्षेत्र में चर्चा है कि लंबे समय से कथित ओवररेटिंग का यह सिलसिला जारी है, लेकिन आबकारी विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आई। इससे लोगों के बीच यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या विभाग को इस स्थिति की जानकारी नहीं है, या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही?
*जनता बोली— एमआरपी है तो फिर ज्यादा पैसे क्यों?*
स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि शराब चाहे कोई भी खरीदे, लेकिन उससे एमआरपी से अधिक राशि वसूलना नियमों के खिलाफ है। उनका कहना है कि यदि कोई दुकानदार खुलेआम अतिरिक्त पैसे ले रहा है, तो उसके खिलाफ तत्काल जांच और कार्रवाई होनी चाहिए।
*कलेक्टर से कार्रवाई की मांग*
लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ओवररेटिंग की शिकायत सही पाई जाती है, तो संबंधित ठेकेदार, सेल्समैन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि उपभोक्ताओं के साथ हो रही कथित मनमानी पर रोक लग सके।
*अब सबकी नजर प्रशासन पर*
मामला सामने आने के बाद अब निगाहें जिला प्रशासन और आबकारी विभाग पर टिकी हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ओवररेटिंग के आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है?
Mauganj, Rewa | Jul 16, 2026