
वाह रे हमारी व्यवस्था और ज़िम्मेदार प्रशासन! 👏
शहरी क्षेत्रों में आपदा या संकट के समय जब आम जनता मदद की गुहार लगाती है, तो हमारे अधिकारी अपनी मुस्तैदी का ऐसा नायाब नमूना पेश करते हैं कि देखकर कलेजा ठंडक से भर जाता है।
हाल ही में शिवकुमार शुक्ला 'मधुरेश' जी के साथ जो हुआ, वह हमारी प्रशासनिक मुस्तैदी की जीती-जागती मिसाल है। जब उन्होंने दो दिन-रात शासन और प्रशासन के ज़िम्मेदार अधिकारियों के नंबरों पर बार-बार फोन किया, तो उन्हें तुरंत "रेस्क्यू टीम भेजने की व्यवस्था हो रही है" वाला प्यारा सा आश्वासन मिल गया। भला इससे तेज़ और क्या राहत चाहिए?
अधिकारी शायद यह देखना चाहते थे कि बिना किसी सरकारी तामझाम के लोग खुद पानी में डूबते-उबराते और घबराते हुए बाहर आने का हुनर जानते हैं या नहीं। आखिर जनता को थोड़ा आत्मनिर्भर जो होना चाहिए! और जब वे सुरक्षित बाहर आ गए, तो राजा कॉलेज के राहत शिविर में उनके विश्राम के लिए क्या शानदार इंतज़ाम था! बिना किसी गद्दे के सीधे स्कूल की बेंच पर लेटकर काम चलाने की यह कला सिर्फ हमारे राहत शिविरों में ही देखने को मिल सकती है।
धन्य है ऐसा प्रशासन और ऐसी व्यवस्था, जो जनता की जान बचाने के लिए सिर्फ फोन पर आश्वासन देने की असीम कृपा करती है!
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