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भावांजलि के मंच पर सजी कविता और ग़ज़लों की महफ़िल, कवियों-शायरों ने बांधा समां
राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक आयोजन में दिल्ली, पटियाला, बिजनौर सहित अंबाला के रचनाकारों ने दी यादगार प्रस्तुतियां
अम्बाला, 11 जुलाई। अंबाला क्लब के नीलगिरी हॉल में शनिवार को भावांजलि कला एवं साहित्य मंच द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में साहित्य प्रेमियों को कविता, ग़ज़ल और शायरी की शानदार प्रस्तुतियों का आनंद लेने का अवसर मिला। दिल्ली, पटियाला, बिजनौर और अंबाला से पहुंचे कवियों एवं शायरों ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पटियाला की प्रसिद्ध शाइरा मधु मधुमन ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में फ़रीदाबाद से आए अजय अज्ञात उपस्थित रहे। वे प्रतिष्ठित संस्था परवाज़-ए-ग़ज़ल के संस्थापक भी हैं। विशिष्ट अतिथियों में अरविंद असर, प्रमोद शर्मा 'असर' और रीता अदा शामिल रहे। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन मंच की संस्थापक अंजलि 'सिफ़्र' ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान से हुआ। इसके बाद कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर उठा। समापन अवसर पर अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए तथा मंच के मार्गदर्शक ओम बनमाली ने सभी का आभार व्यक्त किया।
मंच पर डॉ. विनय मल्होत्रा, डॉ. गुलशन राय, लाभ सिंह, पंकज शर्मा, अनवर अंसारी, डॉ. सुमन जैन, मनीषा नारायण 'मन', केवल कृष्ण, रश्मि सिंघल, सवीना वर्मा 'सवी', जगमाल सिंह राणा, अर्चित शर्मा तथा अकीमुद्दीन मंडावरी सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं।
शहर के प्रसिद्ध उद्योगपति संजय कपूर ने हॉल प्रायोजित कर आयोजन को सहयोग दिया। मंच की संस्थापक अंजलि 'सिफ़्र' ने कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन अंबाला की साहित्यिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अध्यक्षीय संबोधन में मधु मधुमन ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट साहित्यिक कार्यक्रम बताया।
यादगार अशआर
प्रमोद शर्मा 'असर' जान के पलड़े से भारी था अना का पलड़ा,
डर से गर्दाब का रस्ता नहीं बदला मैंने।
अजय अज्ञात तभी तक पूछे जाओगे कि जब तक काम आओगे,
चिराग़ों को जलाते ही बुझा देते हैं तीली को।
अरविंद असर हर एक शख़्स से अनबन है, क्या किया जाए,
हमारे हाथ में दरपन है, क्या किया जाए।
रीता अदा धरती को तो बेच लिया इंसानों ने,
सागर की अब सतह खंगाली जाएगी।
मधु मधुमन दिलों में ज़िंदा है प्यार जब तक,
है ज़िंदगी में बहार तब तक।
Ambala, Ambala | Jul 13, 2026