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झारखंड की राजधानी #रांची इन दिनों छात्र आंदोलन का बड़ा केंद्र बन गई है। जयपाल सिंह स्टेडियम में JPSC और JSSC भर्ती प्रक्रियाओं में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन अब तेज होता जा रहा है। छात्र नेताओं ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है और सरकार से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा युवाओं के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बेरोजगारी ने उनकी नींद पहले ही छीन ली है, इसलिए अब वे रातभर जागकर सरकार को जगाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन में शामिल छात्र इसे युवाओं के भविष्य की लड़ाई बता रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर की तरह रांची में भी लगातार धरना, नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन जारी है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। . . . #breakingnewswala #ranchinews #ranchiprotest #BNWTV

Gwalior Gird, Gwalior | Aug 3, 2026

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मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?'

मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है।

वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?' मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

Gwalior Gird, Gwalior | Aug 3, 2026

मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?'

मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है।

वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?' मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

Gwalior Gird, Gwalior | Aug 3, 2026