मेरठ के चर्चित नीले ड्रम केस में मुस्कान को जरूर फांसी हुई है लेकिन उसे फांसी हो, इसकी संभावना कम दिखती है।
पहली बात तो यह कि उसकी एक बच्ची अभी 1 साल की है। जब तक वह 6 साल की नहीं हो जाती, तक तक तो फांसी का कोई चांस ही नहीं है।
दूसरी बात अब तक देश में किसी महिला को फांसी नहीं दी गई है। अमरोहा की ही शबनम का केस देख लीजिए। 2008 से जेल में बंद है। फांसी की सजा है लेकिन हुई नहीं।
तीसरी बात मुस्कान की दो बेटियां हैं। भविष्य में जब भी अपर कोर्ट में फांसी को बरकरार रखने की बात आएगी, जज उन दोनों बच्चियों के बारे में भी सोचेंगे।
चौथी बात कई बार मामले में देरी फांसी को टाल देती है। निठारी केस में यह दिखा था, जब कोर्ट में तर्क दिया गया था कि फांसी की सजा होने के बाद व्यक्ति का हर दिन मौत के साए में ही बीतता है, उसका मानसिक संतुलन खराब हो जाता है।
हालांकि न्याय में तथ्य मानवीय आधारों पर अक्सर हावी साबित होते हैं। ऐसा होना भी चाहिए। सौरभ राजपूत का मुस्कान से प्रेम 100% शुद्ध था। विश्वासघात मुस्कान और उसके नशेड़ी प्रेमी साहिल ने किया। मौत भी ऐसी दी कि इंसानियत शर्मसार हो जाए।