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#सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामले की सुनवाई के दौरान बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, जिसे छीना नहीं जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल आंदोलन या प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस की बर्बरता या अत्यधिक बल प्रयोग को सही नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला होना भी उतना ही गंभीर और चिंताजनक है। यह मामला 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक निकाले गए CJP के प्रदर्शन से जुड़ा है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि NEET पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे छात्रों पर पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े, संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की और हिंसक झड़प हुई। इस मामले में 100 से ज्यादा लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब सरकार से जवाब मांगा है और कहा है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर स्पष्ट प्रोटोकॉल होना चाहिए। इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर अदालत मंगलवार को एक साथ सुनवाई करेगी। #breakingnewswala #NewsUpdate #BNWTV

Gwalior Gird, Gwalior | Jul 27, 2026

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मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?'

मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है।

वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?' मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

Gwalior Gird, Gwalior | Aug 3, 2026

मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?'

मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है।

वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

मुरैना में बदहाल मत्स्य बीज भंडारण टैंक, ग्रामीणों ने उठाए सवाल—'बजट कहां खर्च हो रहा है?' मुरैना। जिले में मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग द्वारा बनाए गए मत्स्य बीज भंडारण टैंक और नर्सरी लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं। कई टैंकों की हालत जर्जर दिखाई दे रही है, जबकि कुछ टैंकों में वर्षों से मछली के बीज नहीं रखे गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इन टैंकों पर न तो विभागीय गतिविधियां दिखाई देती हैं और न ही कोई अधिकारी या कर्मचारी नियमित रूप से यहां पहुंचता है। उनका आरोप है कि सरकारी धन से टैंक तो बना दिए गए, लेकिन रखरखाव और उपयोग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि मत्स्य विभाग को हर वर्ष बजट मिलता है, तो उसका उपयोग आखिर कहां किया जा रहा है। वहीं, इस मामले में जब मत्स्य विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई तो उनका कहना है कि परिसर में मत्स्य बीज रखने के लिए नर्सरी संचालित की जाती है। हालांकि, मौके पर दिखाई दे रही स्थिति विभाग के दावों से मेल नहीं खाती। टैंकों की बदहाल हालत और गतिविधियों के अभाव ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस ग्राम पंचायत में यह मत्स्य बीज केंद्र स्थापित है, वहां न तो पर्याप्त सुविधाएं हैं और न ही विभाग की ओर से नियमित देखरेख की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग इस मामले का संज्ञान लेकर टैंकों की वास्तविक स्थिति की जांच कराते हैं या नहीं। यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी संसाधनों और बजट के उपयोग की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता होगी।

Gwalior Gird, Gwalior | Aug 3, 2026