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अब सुखी परिवार योजना के नाम पर प्रदेश को ठगने की योजना बना रहे हैं मुख्यमंत्री : जयराम ठाकुर बिना बजट की सुक्खू जी की योजना चाइनीज खिलौना, शुरू होते ही हो जाती हैं बंद हर बार की तरह इस बार भी बिना बजट हवा-हवाई घोषणा करने में हैं सुक्खू कांग्रेस के आला नेता भी बताएं, क्यों नहीं मिले पाँच लाख रोजगार और हर महिला को ₹1500 शिमला : शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के मुख्यमंत्री अब अपनी सुखी परिवार योजना के नाम पर प्रदेशवासियों को ठगने की योजना बना रहे हैं। बजट में घोषित अपनी योजना को लॉन्च करने के लिए उन्होंने कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी से समय मांगा है, ऐसी खबरें आ रही हैं। लेकिन बिना बजट के ही घोषणाएं करने वाले मुख्यमंत्री को पहले यह बताना चाहिए कि साल-दर-साल समाज कल्याण का बजट कम करके वह योजनाएं कैसे क्रियान्वित करेंगे? बिना बजट के प्रावधान के कोई योजना कैसे ज़मीन पर उतरेगी? क्या बाकी की समाज कल्याण की योजनाएं मुख्यमंत्री बंद करने वाले हैं? क्योंकि बिना बजट का प्रावधान किए कोई योजना चलाना संभव ही नहीं है। क्योंकि सुक्खू सरकार ने इस साल एससी, एसटी, ओबीसी, माइनॉरिटी और समाज कल्याण के लिए आवंटित धनराशि में पिछले साल के मुकाबले 63 फीसदी की ऐतिहासिक कटौती कर दी है। इस साल समाज कल्याण से जुड़े विषयों पर कुल धनराशि ₹604 करोड़ है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा ₹1618 करोड़ था। जब पिछले साल लोगों को वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिल पाई, तो इस बार बजट कटौती के बाद लोगों को कैसे मिलेगी? प्रदेश के लोग यह जानना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू की योजनाएं भी चाइनीज खिलौनों जैसी होती हैं, जिनमें से कुछ शुरू ही नहीं होतीं और कुछ शुरू होते ही खत्म हो जाती हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि झूठी गारंटियां देकर सत्ता में आने के बाद से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू लगातार जनहित की योजनाओं और जरूरतमंद लोगों के लिए चलाई जा रही योजनाओं को निशाना बना रहे हैं। हिमकेयर, सहारा, शगुन और स्वावलंबन जैसी योजनाओं को उन्होंने किस तरह बजट रोककर बंद करने की कोशिश की है, यह पूरा प्रदेश देख रहा है। इसके बाद लोगों पर तरह-तरह के शुल्क लादे गए। सुख की सरकार के नाम पर शुल्क की सरकार चलाई गई। आज भी स्थिति जस की तस है। अब नई योजनाओं की घोषणा की जा रही है। हर बार की तरह इस बार भी उनके विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे, लेकिन किसी को भी ढंग से पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। सरकार लाभार्थियों से ज्यादा विज्ञापनों पर खर्च करेगी और मुख्यमंत्री चरणबद्ध तरीके से झूठ बोलकर योजनाओं को लागू करने की बात करते रहेंगे। इससे पहले भी बजट के दौरान सदन में उन्होंने कई योजनाओं की घोषणा की, लेकिन वे ज़मीन पर तो क्या, कागजों में भी नहीं उतर पाईं। मुख्यमंत्री भी उन्हें घोषित करके भूल गए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने विधानसभा चुनाव के समय मंचों से बड़ी-बड़ी बातें की थीं। पाँच लाख नौकरियां, स्टार्टअप, सम्मान निधि, हर प्रदेशवासी को 300 यूनिट मुफ्त बिजली, बागवान तय करेंगे दाम, दूध ₹100 प्रति लीटर और गोबर की खरीद जैसे वादे सब हवा-हवाई साबित हुए। उन्हें प्रदेश वासियों को बताना होगा कि अब तक उनकी गारंटिया क्यों पूरी नहीं हुई? कांग्रेस के बड़े नेताओं को भी मुख्यमंत्री से हिसाब मांगना चाहिए कि उन्होंने गारंटियों के नाम पर क्या किया? चरणबद्ध तरीके से बढ़ रहे उनके चरण कहाँ-कहाँ तक पहुँचे? विधानसभा में मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों से यह साफ है कि सुक्खू सरकार ने अपनी सभी फ्लैगशिप योजनाओं पर कुल ₹50 करोड़ भी खर्च नहीं किए हैं, जबकि इन योजनाओं के विज्ञापनों पर इससे कहीं ज्यादा पैसे खर्च किए गए हैं। इसलिए हम मुख्यमंत्री से आग्रह करते हैं कि झूठ बोलकर, प्रचार-प्रसार पर भारी-भरकम खर्च करके और आंकड़ों में हेरफेर कर प्रदेशवासियों को बरगलाना बंद करें और जनहित में काम करें।

Dharmpur, Mandi | Jul 10, 2026

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