
राजविका से जुड़कर मंजू बनीं बैंक सखी, नियमित आय से बदली आर्थिक स्थिति
धौलपुर, 22 सितम्बर। विकसित भारत-जन सेवा अभियान के अंतर्गत सेवा की कहानी के माध्यम से जिले में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं सेवाओं से लाभान्वित होकर जिले के नागरिक आत्मनिर्भर की ओर बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में ग्राम पंचायत गढ़ी खिराना तहसील बाड़ी की मंजू की कहानी महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल है।
मंजू ने राजविका से जुड़कर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की। राजविका से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने और रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। इसी क्रम में उन्होंने बैंक सखी के रूप में कार्य करना शुरू किया। आज मंजू बैंक सखी के पद पर कार्य करते हुए ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने और उन्हें बैंकिंग संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग कर रही हैं।
राजविका से मिला अवसर, बढ़ा आत्मविश्वास
राजविका से जुड़ने से पहले मंजू के सामने आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की चुनौती थी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच नियमित आय का कोई स्थायी माध्यम नहीं था। राजविका से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी क्षमता का उपयोग करने और रोजगार के माध्यम से आगे बढ़ने का अवसर मिला।
नियमित मासिक आय से आर्थिक स्थिति में सुधार
बैंक सखी के रूप में कार्य करने से मंजू को नियमित मासिक आय प्राप्त हो रही है। इस आय से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। अब वे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में आर्थिक रूप से सहयोग कर पा रही हैं और पहले की अपेक्षा अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने निर्णय लेने में सक्षम हुई हैं।
मंजू के लिए यह बदलाव केवल आय प्राप्त होने तक सीमित नहीं है। नियमित रोजगार ने उनमें आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत किया है। आज वे अपने कार्य के माध्यम से स्वयं आगे बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र के अन्य लोगों के लिए भी बैंकिंग सेवाओं को सुलभ बनाने में योगदान दे रही हैं।
ग्रामीण महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
मंजू की सफलता यह दर्शाती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को यदि उचित मंच और अवसर उपलब्ध कराया जाए तो वे अपनी मेहनत और क्षमता के बल पर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं। राजविका से जुड़कर बैंक सखी के रूप में कार्य करना मंजू के जीवन में रोजगार के साथ-साथ आत्मविश्वास और सम्मान का माध्यम भी बना है।
मंजू बताती हैं कि राजविका से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला और बैंक सखी के रूप में कार्य करने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। नियमित आय ने परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग करने का अवसर दिया है और अब वे स्वयं को अधिक आत्मनिर्भर महसूस करती हैं।