
सनातन धर्म में माता-पिता को जीवित ईश्वर का दर्जा दिया गया है : महंत राजेंद्र पुरी
जग ज्योति दरबार में महंत राजेंद्र पुरी ने समाज में बुजुर्गों के सम्मान व सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की
कुरुक्षेत्र, 11 जुलाई : जग ज्योति दरबार में शनिवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इस अवसर पर श्रद्धालुओं श्रद्धा व भक्ति भाव के साथ पूजन किया तथा कल्याण की भावना से माथा टेक कर अरदास की।
पूजन के उपरांत सत्संग में महंत राजेंद्र पुरी ने आधुनिकता की दौड़ तथा समाज में बुजुर्गों के सम्मान व सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में माता-पिता को जीवित ईश्वर का दर्जा दिया गया है। उनके आशीर्वाद और सेवा के बिना कोई भी पूजा या धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण नहीं माना जा सकता है। माता-पिता की प्रसन्नता से ही देवी देवताओं का आशीर्वाद मिलता है।
महंत राजेंद्र पुरी ने कहा कि माता-पिता एवं बुजुर्ग सभी तीर्थों के समान है। भारतीय संस्कृति के अनुसार माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों को हमारे पहले देवता माना गया है, जिनकी सेवा ही सबसे बड़ी प्रार्थना है। उन्होंने प्रसंग की चर्चा करते हुए बताया कि भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा कर श्री गणेश ने सिद्ध किया था कि माता-पिता की सेवा समस्त तीर्थों के भ्रमण से श्रेष्ठ है।इस मौके पर कुंदन लाल, देवी दयाल शर्मा, जीवन दास, ईश्वर चंद, अनमोल राणा, भारती, मंजूषा, शकुंतला देवी, कृष्ण कुमार भारद्वाज, हरदीप सिंह, अजय राठी, विजय राठी, अक्षय राठी, मनप्रीत सिंह व कन्हैया लाल इत्यादि भी मौजूद रहे।
फोटो परिचय : श्रद्धालुओं के साथ महंत राजेंद्र पुरी।