
क्या अब छात्रों के समर्थन में खड़ा होना भी अपराध है? आखिर भाजपा युवा मोर्चा की मंडल अध्यक्ष को क्यों हटाया गया?
उत्तराखंड नई टिहरी से सामने आई यह घटना अब राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ रही है। भाजपा युवा मोर्चा की टिहरी मंडल अध्यक्ष मणिका को पद से हटाए जाने के बाद उन्होंने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यदि छात्रों के अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़े होने की वजह से उन्हें पद से हटाया गया है, तो उन्हें इस फैसले का कोई पछतावा नहीं है।
मणिका ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया क्योंकि उनके लिए किसी भी संगठन से पहले सत्य और राष्ट्रहित है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अकेले भी छात्रों के समर्थन में खड़ी रहेंगी। उनके अनुसार, छात्रों और अपने बच्चों को खो चुके परिवारों की आवाज़ बनना ही उनकी प्राथमिकता थी।
उन्होंने सरकार के फैसले की सराहना करते हुए यह भी कहा कि देर से ही सही, लेकिन छात्रों की प्रमुख मांगें मानी गईं, जो लोकतंत्र की जीत है।
लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है—
क्या किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता का छात्रों के साथ खड़ा होना इतना बड़ा अपराध है कि उसे पद से ही हटा दिया जाए?
अगर किसी नेता या कार्यकर्ता की पहली जिम्मेदारी जनता की आवाज़ उठाना है, तो फिर छात्रों के समर्थन में खड़े होने पर कार्रवाई क्यों? क्या राजनीतिक अनुशासन जनता के मुद्दों से ऊपर हो गया है, या फिर संगठन के भीतर अलग राय रखने की कोई जगह नहीं बची?
हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि भाजपा या युवा मोर्चा की ओर से पद से हटाने के कारणों को लेकर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया गया है, यह सामने आने पर पूरी तस्वीर और स्पष्ट होगी। फिलहाल मणिका के बयान ने इस पूरे मामले को राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है।
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