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शादियों का बदलता स्वरूप और विवाह की पवित्रता पर गंभीर चिंतन: लेखक चेत राम ने समाज से की सादगी अपनाने की अपील:-चेत राम प्राथमिक अध्यापक एवं समाज चिंतक चेत राम ने आधुनिक समय में बदलते विवाह समारोहों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए समाज से विवाह की मूल परंपराओं और संस्कारों को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, दो संस्कृतियों और दो आत्माओं का पवित्र मिलन है। भारतीय संस्कृति में विवाह को एक संस्कार का दर्जा दिया गया है, लेकिन आज इसकी पवित्रता पर दिखावे, फिजूलखर्ची और सामाजिक प्रतिस्पर्धा का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अधिकांश लोग विवाह समारोह में केवल औपचारिकता निभाने के लिए पहुंचते हैं। गेट पर शगुन या लेन-देन करके सीधे भोजन स्थल तक जाना, भोजन करना और बिना वर-वधू को आशीर्वाद दिए लौट जाना एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन गई है। कई लोगों को तो यह भी ज्ञात नहीं होता कि विवाह किसका है। जबकि विवाह में सबसे महत्वपूर्ण कार्य नवविवाहित दंपति को आशीर्वाद देना और उनके सुखद वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करना होता है। चेत राम ने कहा कि आज विवाह का निमंत्रण मिलते ही लोगों के मन में खुशी के स्थान पर आर्थिक बोझ और लेन-देन की चिंता घर कर जाती है। समाज में प्रतिष्ठा बनाए रखने की होड़ में लोग अपनी सामर्थ्य से अधिक खर्च करने और कर्ज लेने तक को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की परंपराओं को समाप्त कर केवल आत्मीयता और पारिवारिक संबंधों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि विवाह किसी भी परिवार के लिए आर्थिक संकट का कारण न बने। उन्होंने आधुनिक विवाह समारोहों में बदलती स्वागत परंपरा पर भी प्रश्न उठाते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र "अतिथि देवो भव:" है, लेकिन आज स्थिति इसके विपरीत हो गई है। मेजबान स्वयं स्वागत का केंद्र बन जाते हैं जबकि अतिथियों के सम्मान और आदर की परंपरा धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही है। उन्होंने कहा कि समाज को फिर से उस परंपरा को अपनाना चाहिए जिसमें अतिथियों का सम्मान सर्वोपरि माना जाता था। अपने विचार रखते हुए उन्होंने विवाह समारोहों में अनियंत्रित भीड़ और भोजन की बर्बादी पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि केवल सामाजिक प्रतिष्ठा दिखाने के लिए हजारों लोगों को आमंत्रित किया जाता है, जिसके कारण भोजन की गुणवत्ता प्रभावित होती है और बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री व्यर्थ चली जाती है। विवाह समारोहों में केवल उन्हीं लोगों को आमंत्रित किया जाना चाहिए जिनका परिवार से वास्तविक और आत्मीय संबंध हो। चेत राम ने कहा कि आज विवाह की सबसे महत्वपूर्ण वैदिक रस्में—सात फेरे, पाणिग्रहण और वैदिक मंत्रोच्चार—डीजे, नृत्य और अन्य मनोरंजन के बीच कहीं खो जाती हैं। फेरों के समय अधिकांश लोग भोजन या मनोरंजन में व्यस्त रहते हैं जबकि यही विवाह का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण क्षण होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे मनोरंजन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनका मानना है कि सभी धार्मिक एवं वैदिक रस्में पूर्ण होने तथा नवदंपति को आशीर्वाद मिलने के बाद ही मनोरंजन होना चाहिए। उन्होंने आधुनिक बफेट संस्कृति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले के समय में मेजबान अपने हाथों से प्रेमपूर्वक अतिथियों को भोजन परोसते थे, जिससे आत्मीयता और अपनापन झलकता था। आज यह परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है। विशेषकर बुजुर्गों और सम्मानित अतिथियों के लिए बैठाकर भोजन कराने की व्यवस्था पुनः शुरू की जानी चाहिए। चेत राम ने कहा कि विवाह का सबसे बड़ा उद्देश्य नवविवाहित जोड़े को परिवार और समाज के बड़ों का स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद प्राप्त कराना है। लेकिन वर्तमान समय में लोग केवल फोटो खिंचवाने, सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने और औपचारिकताएं पूरी करने तक सीमित रह गए हैं। यह प्रवृत्ति विवाह की गरिमा को कम कर रही है। उन्होंने दान-दक्षिणा और शगुन की परंपरा पर भी अपने विचार रखते हुए कहा कि यदि परिजन और शुभचिंतक आर्थिक सहयोग करना चाहते हैं तो वह सीधे वर-वधू को दिया जाना चाहिए, ताकि वे अपने नए जीवन की शुरुआत आर्थिक रूप से सशक्त होकर कर सकें। उन्होंने सुझाव दिया कि शगुन की राशि बैंक खाते, फिक्स डिपॉजिट या अन्य उपयोगी माध्यमों से नवदंपति के भविष्य के लिए दी जाए, जिससे उसका वास्तविक लाभ उन्हें मिल सके। अंत में चेत राम ने समाज से अपील करते हुए कहा कि विवाह समारोहों को सादगी, संस्कार, आत्मीयता और पारिवारिक मेल-मिलाप का पर्व बनाया जाए। अनावश्यक लेन-देन, दिखावा और फिजूलखर्ची से बचते हुए केवल प्रेम, सम्मान और शुभकामनाओं का आदान-प्रदान ही विवाह की वास्तविक पहचान होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समाज इस दिशा में सकारात्मक पहल करता है तो विवाह फिर से भारतीय संस्कृति के अनुरूप एक पवित्र संस्कार के रूप में स्थापित होंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श बनेंगे।