
## योगिनी एकादशी पर शूकरक्षेत्र धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, भव्य पंचकोशीय परिक्रमा का शुभारंभ
हरि की पौड़ी में पुण्य स्नान के बाद भगवान वराह का पूजन-अर्चन, हरिनाम संकीर्तन और जयघोषों से गूंजा पूरा परिक्रमा मार्ग
सोरों (कासगंज), आषाढ़ कृष्ण पक्ष की पावन योगिनी एकादशी पर तीर्थराज शूकरक्षेत्र धाम सोरों में पंचकोशीय परिक्रमा का भव्य शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ हुआ। प्रातःकाल से ही हरि की पौड़ी, भगवान श्री वराह मंदिर और विभिन्न तीर्थ स्थलों पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। धार्मिक मान्यता के अनुसार योगिनी एकादशी का व्रत एवं शूकरक्षेत्र की पंचकोशीय परिक्रमा करने से दस हजार वर्षों की तपस्या के समान पुण्यफल प्राप्त होता है तथा ज्ञात-अज्ञात पापों का नाश होकर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
ब्राह्मण कल्याण सभा के संस्थापक अध्यक्ष एवं शूकरक्षेत्र समाज सेवा समिति के संयोजक शरद कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में श्रद्धालुओं ने हरि की पौड़ी स्थित पावन गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। इसके बाद भगवान श्री वराह मंदिर में विधि-विधान से विशेष पूजन-अर्चन कर पंचकोशीय परिक्रमा का शुभारंभ किया गया।
परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु "ॐ जय गंगे, ॐ जय वराह", "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय", "सीता-सीता राम मिला दे, राधे-राधे श्याम मिला दे" जैसे धार्मिक जयघोषों के साथ हरिनाम संकीर्तन और भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़े। भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से संपूर्ण परिक्रमा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो उठा।
श्रद्धालुओं ने चक्रतीर्थ स्थित वराह गौशाला, योगेश्वर महादेव मंदिर, सूर्यकुंड, चंद्रकुंड, जया देवी भद्रकाली मंदिर, बटुक भैरव मंदिर, प्राचीन गृद्धवट, ग्राम देवी मंदिर, सीताराम मंदिर, तुलसीदास जन्मस्थान मंदिर, चौरासी घंटे वाली मैया एवं बाछरू महाराज, सीता रसोई, ममता देवी भवन (प्रेम जी की बगीची), सिग्नल वाले महाराज, करुआ देव महाराज, भगीरथ गुफा, कपिल मुनि आश्रम, वनखंडेश्वर महादेव मंदिर तथा चैतन्य महाप्रभु की बैठक सहित अनेक पवित्र स्थलों के दर्शन किए और अंत में पुनः भगवान वराह मंदिर पहुंचकर परिक्रमा पूर्ण की।
इस अवसर पर शरद कुमार पाण्डेय ने कहा कि सनातन धर्म में प्रत्येक एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है। विशेष रूप से योगिनी एकादशी का उल्लेख धर्मशास्त्रों एवं ब्रह्मवैवर्त पुराण में समस्त पापों का नाश करने वाली, रोगों से मुक्ति दिलाने वाली तथा मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी के रूप में किया गया है। उन्होंने बताया कि शूकरक्षेत्र धाम की पंचकोशीय परिक्रमा भगवान वराह, मां गंगा और इस प्राचीन तीर्थ की दिव्य आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ने का अनुपम अवसर है।
उन्होंने शूकरक्षेत्र धाम के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह वही पावन भूमि है जहां भगवान विष्णु ने वराह अवतार में हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी का उद्धार किया था। हरि की पौड़ी स्थित पावन गंगा कुंड, भगवान वराह मंदिर, गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली, महाप्रभु वल्लभाचार्य की 23वीं बैठक, जयापीठ, आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित कूर्मपृष्ठीय श्री यंत्र तथा अनेक प्राचीन तीर्थ इस धाम की आध्यात्मिक महिमा को और अधिक गौरव प्रदान करते हैं।
परिक्रमा मार्ग में स्थित बाछरू तीर्थ का भी विशेष महत्व बताया गया, जहां पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने वत्सासुर का वध कर गौवंश एवं ग्वाल-बालों की रक्षा की थी। गर्ग संहिता में वर्णित इस लीला के कारण यह स्थान आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
परिक्रमा मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए भजन-कीर्तन, जलपान एवं प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। सीता रसोई पर शिवशक्ति प्रॉपर्टीज की ओर से रामदर्शन महेरे, नीरज तिवारी, ओमप्रकाश मौर्य, माधव महेरे तथा ममता देवी भवन (प्रेम जी की बगीची) पर मुन्नालाल बड़गैयाँ, दीपक बड़गैयाँ, हनी एवं उनके साथियों ने प्रसाद वितरित किया। सिग्नल वाले महाराज स्थल पर गिरीश पाठक, अशोक धमनावत, विजय तिवारी, अवधेश तिवारी एवं सहयोगियों ने श्रद्धालुओं की सेवा की।
इस अवसर पर शिवानंद उपाध्याय, अशोक कुमार पाण्डेय, शशांक दीक्षित, शैलेन्द्र तिवारी, हाकिम सिंह, विनोद दीक्षित, राजकुमार गौड़, योगेश उपाध्याय, सचिन गुप्ता, अभय भारद्वाज, प्रदीप उपाध्याय, रामदयाल, जितेंद्र कुमार हल्दिया, राधाकृष्ण विजय, वीरेंद्र सिंह, राजपाल सिंह, गिरिजाशंकर पाठक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान वराह की आराधना कर पंचकोशीय परिक्रमा में सहभागिता की।
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