
🎨 देहरादून - लोक संवर्धन पर्व: तीसरे दिन भी दिखी हस्तकला की धूम; राष्ट्रीय शोक के कारण सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे स्थगित! 🇮🇳🛍️
देहरादून: भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विकास निगम द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 'लोक संवर्धन पर्व' के तीसरे दिन भी कला प्रेमियों और खरीदारों का उत्साह कम नहीं हुआ। यद्यपि राष्ट्रीय शोक के चलते सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थगित रहे, लेकिन हस्तशिल्प प्रदर्शनी और फूड कोर्ट में आगंतुकों की भारी भीड़ देखी गई।
📋 तीसरे दिन की मुख्य विशेषताएं:
राष्ट्रीय शोक का सम्मान: कतर के पूर्व अमीर के निधन पर भारत सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रीय शोक के कारण, सभी सांस्कृतिक और मनोरंजक प्रस्तुतियां एक दिन के लिए स्थगित रखी गईं।
कला का संगम: मेले में 150 से अधिक स्टॉल्स पर देशभर के कारीगरों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। इसमें उत्तराखण्ड की प्रसिद्ध 'एपण' कला से लेकर राजस्थान का अजरख प्रिंट और कर्नाटक के चन्नपटना खिलौने तक शामिल हैं।
क्षमता निर्माण सत्र: राष्ट्रीय उद्यमिता एवं लघु व्यवसाय विकास संस्थान (NIESBUD) द्वारा कारीगरों के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उन्हें व्यवसाय विस्तार और बाजार से जुड़ने के व्यावहारिक गुर सिखाए गए।
आर्थिक सशक्तिकरण: प्रवक्ता के अनुसार, आगंतुकों द्वारा की गई प्रत्येक खरीदारी सीधे तौर पर इन हुनरमंद कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण में योगदान देती है।
🏛️ मेले का आकर्षण (क्या है खास):
विविध उत्पाद: हैंड ब्लॉक प्रिंट, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, लकड़ी की कलाकृतियां, पीतल के उत्पाद, खादी, जरी कार्य और चमड़े के सामानों की एक विशाल श्रृंखला।
फूड कोर्ट: उत्तराखण्ड के पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान और बिहार के लोकप्रिय पकवानों ने लोगों का दिल जीता।
भागीदारी: उत्तराखण्ड के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, दिल्ली, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मणिपुर, कर्नाटक, गुजरात, लद्दाख, महाराष्ट्र, असम, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और गोवा के कारीगर शामिल हैं।
महत्वपूर्ण सूचना:
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की वापसी: 14 जुलाई 2026 (आज) से सांस्कृतिक कार्यक्रम पुनः शुरू होंगे, जिसमें 'पांडवास' (Pandavs) जैसे लोकप्रिय लोक बैंड और अन्य प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
समय और प्रवेश: यह महोत्सव 15 जुलाई 2026 तक चलेगा। परेड ग्राउंड में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क है और इसका समय प्रातः 11:30 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक है।
राष्ट्रीय शोक के बावजूद प्रदर्शनी और फूड कोर्ट में आगंतुकों की निरंतर उपस्थिति यह दर्शाती है कि देहरादून की जनता अपनी कला और संस्कृति को कितना महत्व देती है। यदि आपने अभी तक इस भव्य आयोजन का भ्रमण नहीं किया है, तो 15 जुलाई तक आपके पास इसका अवसर है।
💬 क्या आप इस मेले में शामिल हुए? आपको किस राज्य की शिल्पकला या व्यंजन सबसे अधिक पसंद आए? अपने अनुभव साझा करें! 🔄
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