
प्रेम विवाह से नाराज परिजनों ने जिंदा बेटी की निकाली शव यात्रा, पुतला फूंककर तोड़े रिश्ते
संवदिया न्यूज (पूर्णिया) – बिहार
पूर्णिया के केनगर प्रखंड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इलाके में चर्चा छेड़ दी है। अंतरजातीय प्रेम विवाह से नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने कथित तौर पर अपनी 18 वर्षीय बेटी को मृत मानते हुए उसकी प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली। इसके बाद कुश से बनाए गए पुतले का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मामला मरंगा थाना क्षेत्र के गंगेली पंचायत अंतर्गत चपय गंगेली वार्ड नंबर-1 का बताया जा रहा है।
बताया गया कि चपय बस्ती निवासी मनोज कुमार गोस्वामी की 18 वर्षीय बेटी रिया कुमारी ने अपनी इच्छा से अपने घर से करीब 100 मीटर की दूरी पर रहने वाले दिलीप पासवान के पुत्र मिलन कुमार के साथ कोर्ट मैरिज कर ली।
परिजनों के अनुसार, मिलन का रिया के घर आना-जाना था और उसकी दोस्ती रिया के भाई से भी थी। इसी दौरान दोनों के बीच प्रेम संबंध होने की बात सामने आई। बाद में दोनों घर से चले गए और शादी कर ली।
मामले की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने दोनों की तलाश की। इसको लेकर पंचायत भी बैठी, जिसमें कथित तौर पर रिया को वापस लाने की बात कही गई। हालांकि, पुलिस के समक्ष धारा 164 के तहत दर्ज बयान में रिया ने अपनी इच्छा से मिलन के साथ रहने की बात कही।
इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ने की बात सामने आई।
बताया जा रहा है कि इसके बाद नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने कुश से रिया का प्रतीकात्मक पुतला तैयार किया। ढोल-नगाड़ों के साथ पूरे चपय बस्ती में पुतले की शव यात्रा निकाली गई। इस दौरान कथित तौर पर ‘राम नाम सत्य है’ के नारे भी लगाए गए।
शव यात्रा के बाद नहर किनारे खेत में पुतले का अंतिम संस्कार किया गया। परिजनों की ओर से कहा गया कि अब रिया से उनका कोई नाता-रिश्ता नहीं रहेगा और सामाजिक परंपरा के अनुसार आगे की रस्में भी पूरी की जाएंगी।
रिया के चाचा शशिधर गिरी ने कहा कि सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ की बात करती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पढ़ाई के बाद बेटी इस तरह का फैसला लेती है, तो फिर लोग अपनी बेटियों को पढ़ाने के बारे में क्या सोचेंगे।
रिया की मां नीतू देवी ने बताया कि उनकी बेटी 12वीं पास है। उनके पति टोटो चलाने के साथ मजदूरी करते हैं और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटी की पढ़ाई कराई। मां का दावा है कि हाल ही में भागलपुर में एक सरकारी शिक्षक से करीब छह लाख रुपये में बेटी की शादी तय की गई थी, लेकिन रिया ने यह रिश्ता स्वीकार नहीं किया।
वहीं, समाजसेवी डब्लू यादव ने कहा कि ढोल-नगाड़ों के साथ प्रतीकात्मक शव यात्रा निकालने के पीछे समाज को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि परिवार की इच्छा के विपरीत विवाह करने पर सामाजिक स्तर पर किस तरह की प्रतिक्रिया हो सकती है।
फिलहाल, जिंदा बेटी की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकालकर पुतले का अंतिम संस्कार किए जाने का मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रेम विवाह के विरोध में अपनाए गए इस तरीके को लेकर सामाजिक स्तर पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह अभी देखना बाकी है।