
सरेआम उड़ी नियमों की धज्जियां, कुप्पों में डीजल लेने लगी लंबी कतार
-नहीं दिखा कोई भय, सडक़ तक लगी लाइन कहां है प्रशासन
अनोखा तीर, भैरुंदा। सरकार के द्वारा बनाए गए नियमों का पालन करना आम नागरिक एवं छोटे तबके के व्यापारियों के लिए अनिवार्य है। लेकिन बड़े व्यापारियों और कंपनियों को नियमों के मामले में खुली छूट मिलती है। इन व्यापारियों पर प्रशासन की कोई भी कार्रवाई नहीं होती है। लेकिन यदि इसके विपरीत छोटे तबके का व्यापारी नियमों का थोड़ा सा भी उल्लंघन कर दे तो उसे पर प्रशासन की तलवार लटक जाती है। पेट्रोलियम कंपनियों के स्पष्ट निर्देश है की डीजल एवं पेट्रोल कुप्पों में ना दिया जाए। कलेक्टर ने भी इस मामले में निर्देश जारी किए हैं। इजरायल- ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे युद्ध का सीधा असर कच्चे माल की आपूर्ति पर पड़ा है। इसलिए डीजल पेट्रोल एक संतुलित मात्रा में देने के निर्देश दिए गए थे। वैसे पेट्रोलियम कंपनी एवं जिला कलेक्टर के निर्देश है कि किसी भी सूरत में कुप्पों डीजल पेट्रोल ना दिया जाए। लेकिन भैरूंदा शहर में नजारा कुछ अलग ही देखने को मिल रहा है। अभी तक तो रात के अंधेरे में चुपके-चुपके डीजल कुप्पों दिया जा रहा था। लेकिन माँ रेवा फ्यूल स्टेशन के हौसले इतने बुलंद हैं कि यहाँ रात की तो बात छोडि़ए, शनिवार के दिन के उजाले में भी नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती रहीं। सुबह होते ही पेट्रोल पंप पर डीजल खरीदने वालों की लंबी कतारें लग गईं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह कतारें वाहनों की नहीं। बल्कि उन सैकड़ों खाली कुप्पों और प्लास्टिक के डिब्बों की थी। जिन्हें भरकर डीजल ले जाने का सिलसिला दिन भर चलता रहा। कलेक्टर द्वारा समय-समय पर स्पष्ट निर्देश जारी किए जाते रहे हैं कि सुरक्षा कारणों से खुले में या बिना उचित सुरक्षा प्रबंधों के कुप्पों में ज्वलनशील पदार्थ जैसे डीजल-पेट्रोल की बिक्री करना सख्त वर्जित है। बावजूद इसके इन आदेशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। प्रशासन के अधिकारी शायद इसी शहर में कहीं तैनात हैं वह भी इस रास्ते से गुजरते होंगे। लेकिन इस पेट्रोल पंप पर मची अफरा-तफरी और सैकड़ों की संख्या में रखे गए डीजल के कुप्पों ने किसी का ध्यान नहीं खींचा।
सघन बस्ती के बीच बारूद के ढेर पर शहर
पेट्रोल पंप की भौगोलिक स्थिति को समझा जाये तो इसके चारों ओर आबादी वाली बस्ती हैं। पेट्रोल-डीजल जैसे अत्यंत ज्वलनशील पदार्थों का भंडारण और इस प्रकार खुलेआम वितरण किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने जैसा है। यदि यहाँ कोई चिंगारी भी उठती है तो आग पर काबू पाना तो दूर पास की बस्ती में तबाही मचाने के लिए चंद मिनट ही पर्याप्त होंगे। एक नहीं बल्कि सैकड़ों कुप्पों में डीजल का स्टॉक करना। उसे वाहनों में लादकर रिहायशी इलाकों की ओर ले जाना। यह सब कुछ एक बम के मुहाने पर बैठने जैसा है। यदि कोई अनहोनी होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या पेट्रोल पंप संचालक की जेब भरी जाएगी और जान जनता की जाएगी?
खरीफ की बुवाई और किसानों की मजबूरी का फायदा
स्थानीय लोगों की मानें तो खरीफ फसल की बुवाई का सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान किसानों को डीजल की आवश्यकता होती है। इसी मांग को भुनाते हुए पेट्रोल पंप संचालक ने अपनी मनमानी शुरू कर दी है। किसान अपनी मजबूरी के चलते बड़ी मात्रा में डीजल का स्टॉक घरों में कर रहे हैं। घरों में डीजल का भारी मात्रा में भंडारण करना आग के खतरे को कई गुना बड़ा देता है। पेट्रोल पंप संचालक को यह पता है कि इस वक्त डीजल की डिमांड अधिक है। इस लिए वह नियमों की परवाह किए बिना मुनाफाखोरी में लिप्त है। हैरानी इस बात की है कि पेट्रोल पंप संचालक को प्रशासन की किसी भी कार्यवाही का कोई डर नहीं है। शहर में स्थित होने के कारण यहाँ से लगातार प्रशासनिक अधिकारियों का आवागमन बना रहता है। इसके बावजूद खुलेआम डीजल वितरण का यह काला कारोबार बदस्तूर जारी है। पंप पर लगी भीड़ और कुप्पों की कतारें इस बात का प्रमाण हैं कि संचालक को कानून का कोई भय नहीं है। क्या यह किसी राजनीतिक संरक्षण का नतीजा है या फिर यह मिलीभगत का उदाहरण है?
Harda, Harda | Jun 14, 2026