
#आपणा_जोधपुर
प्रोफेसर इवान का मानना था कि उन्होंने साइबेरिया की -40 डिग्री की ठंड और दुनिया के सबसे खतरनाक जंगलों में सर्वाइव किया है, इसलिए जोधपुर का खाना उनके लिए बच्चों का खेल होगा। लेकिन सूर्यनगरी के स्वाद ने उनके सारे मिलिट्री ट्रेनिंग मॉड्यूल ध्वस्त कर दिए।
सुबह 8 बजे प्रोफेसर इवान माणक चौक पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि एक हलवाई विशाल कड़ाही में मिर्ची बड़े तल रहा है। मिर्च इतनी बड़ी थी कि इवान को लगा यह कोई एंटी-टैंक मिसाइल है।
उन्होंने एक मिर्ची बड़ा उठाया और पूछा, "क्या यह खाने की चीज़ है या बॉर्डर पर इस्तेमाल होने वाला हथियार?"
दुकानदार बोला, "खा के देखो कमांडर साहब!"
इवान ने पहला कौर लिया। अगले ही पल मिर्च और मसालों का ऐसा 'फायर अटैक' हुआ कि उनकी आंखों से आंसुओं की गंगा बह निकली। चेहरा लाल, कान गर्म और माथे पर पसीना।
वह चिल्लाए, "मेडिक! मेडिक! वाटर... वाटर!"
दुकानदार ने तुरंत मिश्रीलाल की मीठी लस्सी का गिलास पकड़ा दिया।
दो घूंट पीते ही इवान शांत हो गए और डायरी में लिखा:
"रूस में दुश्मन को हराने के लिए मिसाइलें बनाई जाती हैं, लेकिन जोधपुर में मिर्ची बड़ा ही काफी है। यह सीधे आत्मा पर हमला करता है और इंसान को जीवन का असली अर्थ समझा देता है।"
शाम को इवान जालोरी गेट पहुंचे। वहां लोहे की विशाल कड़ाही पर पावभाजी बन रही थी। टमाटर, मक्खन और मसालों को ऐसा कूटा जा रहा था जैसे कोई टैंक रेगिस्तान में अभ्यास कर रहा हो।
ऊपर से मक्खन का ऐसा हमला हुआ कि इवान का डिजिटल कैलोरी मीटर बीप-बीप करते हुए बंद हो गया।
इवान बोले, "यह खाना नहीं, यह तो कोलेस्ट्रॉल का परमाणु परीक्षण है!"
पास खड़े एक जोधपुरी ने कहा, "खाओ साहब... यहां पावभाजी नहीं, प्यार परोसा जाता है।"
इवान ने एक चम्मच मुंह में रखी।
स्वाद का ऐसा धमाका हुआ कि वह अनायास ही सावधान की मुद्रा में खड़े हो गए।
उन्होंने डायरी में लिखा:
"रशियन आर्मी का राशन पेट भरता है, लेकिन जालोरी गेट की पावभाजी आत्मा भर देती है। यह मक्खन नहीं, जीवन जीने की ऊर्जा है।"
रात को उन्हें जालोरी गेट के प्रसिद्ध बजरंग पान भंडार ले जाया गया।
दुकानदार ने मुस्कुराते हुए कहा, "कमांडर साहब, आज आपको केवी नवरत्न पान खिलाते हैं।"
इवान ने पान को किसी मिलिट्री कैप्सूल की तरह मुंह में रख लिया।
दो सेकंड बाद चूना, कत्था, गुलकंद और मसालों का ऐसा संयुक्त अभियान शुरू हुआ कि उनका पूरा कमांड सिस्टम हैंग हो गया।
वह कुछ बोल नहीं पा रहे थे। सिर्फ आंखें गोल-गोल घूम रही थीं।
पास खड़े जोधपुरी ने कहा, "अब सामने देखो और जो मन करे कर दो!"
इवान ने पूरी ताकत से पिचकारी छोड़ी।
दीवार पर ऐसा कलात्मक निशान बना कि उसे देखकर एक स्थानीय कलाकार बोला, "वाह! इसे तो फ्रेम करवाना चाहिए।"
अगली सुबह प्रोफेसर इवान ने क्रेमलिन को एक गुप्त संदेश भेजा:
"रशियन मिलिट्री इंजीनियरिंग अब पुरानी हो चुकी है। यदि सैनिकों को निडर बनाना है तो उन्हें जोधपुर भेजो।
माणक चौक का मिर्ची बड़ा खिलाओ, जालोरी गेट की पावभाजी खिलाओ, और अंत में बजरंग पान भंडार का केवी नवरत्न पान खिला दो।
इसके बाद आदमी को न ठंड का डर रहता है, न गर्मी का, न दुश्मन का।
मैं रूस वापस नहीं लौट रहा।
मैंने अपनी बुलेटप्रूफ जैकेट कायलाना झील के किनारे छोड़ दी है, कंधे पर जोधपुरी गमछा डाल लिया है और अब से मेरा नाम 'इवान पेत्रोव' नहीं...
'ईश्वर व्यास" है।
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