
छीपाबड़ौद के गजेंद्र जैन उर्फ गज्जू दबंग व्यक्ति हैं और विकास शील व्यक्ति हैं इसीलिए उनकी पत्नी सीमा जैन को भुगतना पड़ रहा है बड़ा खमीयाजा
कुछ लोगों में चर्चा है कि पूर्व मंत्री प्रमोद जैन के रिश्तेदार हैं इसीलिए भुगतना पड़ रहा है खामीयाजा मगर जब प्रताप सिंह सिंघवी विधायक प्रमोद जैन की हर बात मानते हैं तो फिर गजेंद्र जैन की पत्नी को सरपंच पद की लड़ाई क्यों करनी पड़ रही है यह एक सोचने का विषय है..
मगर सच कड़वा है मगर यह है गजेंद्र जैन एक ईमानदार व्यक्ति हैं जो सत्य के लिए किसी से भी भिड़ जाते हैं चाहे वह परिवार का हो या रिश्तादार चमचागिरी करना नहीं आता और यह उनके मर्यादा के खिलाफ है इसीलिए गजेंद्र जैन की पत्नी सीमा जैन को भुगतना पड़ रहा है और राजस्थान हाई कोर्ट की उड़ रही है खुलेआम धंजीया
क्षेत्र के पत्रकार मौन होकर देख रहे हैं पूरे प्रकरण को जो राजस्थान का सबसे चर्चित प्रकरण है क्योंकि यहां हाई कोर्ट को भी दरकिनार कर दिया गया है और यह इतिहास में पहली बार हुआ है बस जनता में इस बात की पूरी खबर किसी मीडिया कर्मी ने राजस्थान में सार्वजनिक नहीं की है अगर यह पूरा प्रकरण का खुलासा हो जाता तो भारत देश का पहला प्रकरण जिसमें सरकार आंखें बंद कर के हाई कोर्ट के आदेश की धंजीया उड़ा रहा है..
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हाईकोर्ट के 6 स्टे आदेशों की अवहेलना का आरोप: छीपाबड़ौद पंचायत प्रकरण में पंचायती राज विभाग पर अवमानना याचिका, मंत्री के विभाग पर उठे सवाल
बारां/जयपुर। ग्राम पंचायत छीपाबड़ौद से जुड़े बहुचर्चित मामले ने अब गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। विभागीय दस्तावेजों और न्यायालयीन रिकॉर्ड के अनुसार, अतिरिक्त आयुक्त एवं शासन उप सचिव (वित्त) द्वारा जारी छह अलग-अलग आदेशों को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जहां सभी मामलों में अंतरिम राहत (स्टे) प्रदान की गई। इसके बावजूद आदेशों की पालना जारी रहने के आरोप लगाते हुए विभाग के विरुद्ध हाईकोर्ट में अवमानना (Contempt Petition) दायर की गई है।
मामले में आरोप है कि एक ही शिकायतकर्ता की शिकायतों के आधार पर तत्कालीन सरपंच सीमा जैन, पूर्व वार्ड पंच गजेन्द्र जैन तथा अन्य संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अलग-अलग प्रशासनिक आदेश जारी किए गए। इन आदेशों में प्रशासक नियुक्ति, पदमुक्ति, निर्माण कार्यों की जांच तथा कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई के निर्देश शामिल थे।
इसके बाद प्रभावित पक्षों ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार हाईकोर्ट ने सभी छह मामलों में विभागीय आदेशों पर रोक लगा दी। आरोप है कि इसके बावजूद विभागीय स्तर पर कार्रवाई जारी रही, जिसके आधार पर अब अवमानना याचिका दाखिल की गई है।
हाईकोर्ट में लंबित छह प्रमुख याचिकाएं
SBCWP 138/2026
SBCWP 386/2026
SBCWP 6636/2026
SBCWP 7693/2026
SBCWP 11305/2026
SBCWP 11854/2026
बताया जा रहा है कि अवमानना प्रकरण में न्यायालय के समक्ष यह मुद्दा रखा गया है कि यदि किसी आदेश पर हाईकोर्ट द्वारा रोक लगा दी गई हो, तो उसके बाद भी उस आदेश के आधार पर कार्रवाई करना न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना माना जा सकता है। इस मामले पर अंतिम निर्णय अब न्यायालय द्वारा किया जाना शेष है।
इस पूरे घटनाक्रम ने पंचायती राज विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। चूंकि यह विभाग राज्य सरकार के अधीन है, इसलिए राजनीतिक स्तर पर भी इस मामले की चर्चा तेज हो गई है।
(नोट: यह समाचार उपलब्ध विभागीय दस्तावेजों एवं न्यायालयीन अभिलेखों पर आधारित है। प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है। अंतिम निर्णय राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा दिया जाएगा।)
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Ladpura, Kota | Jul 19, 2026