
जब प्रशासन "ड्राइंग रूम" में और सागर, अनूप-विकास "पानी" में! 🌊🛶
मानना पड़ेगा भई, हमारे यहाँ का प्रशासन कितना संजीदा और दूरदर्शी है। बाहर बाढ़ का पानी सर चढ़कर बोल रहा है, पीड़ित आंसुओं के समंदर में तैर रहे हैं, और प्रशासन? अरे, प्रशासन तो एसी कमरे में बैठकर "गंभीर चिंतन" कर रहा है कि आखिर पानी इतनी ऊपर तक आया कैसे! कहीं ये कोई प्रशासनिक साजिश तो नहीं? 🤔
उधर, हमारे सीतापुर माटी के तीन जांबाज लाल—सागर गुप्ता, अनूप खेतान और विकास हिन्दू—पता नहीं कौन सी मिट्टी के बने हैं। इन्हें आराम करना रास ही नहीं आता। जब देखो तब बाढ़ के पानी में गोते लगाते हुए, कभी नाव पर तो कभी तैरते हुए सीधे पीड़ितों के घर तक राहत सामग्री पहुँचाने पहुँच जाते हैं। भाईसाहब, ये लोग ठंड में एसी और गर्मी में हीटर... अरे नहीं, बाढ़ में खुद 'जलपरी' बने घूम रहे हैं! प्रशासन की कमी महसूस ही नहीं होने दे रहे, ये तो सरासर प्रशासन के आलस्य पर 'छलावा' है! 😡
अब बात करें जनता की, तो उनका पारा बाढ़ के पानी से भी ज्यादा खौल रहा है। सत्ताधारियों के प्रति जनता का 'प्रेम' अब शब्दों में नहीं, बल्कि सीधे गालियों और तीखे तानों के रूप में बाहर आ रहा है। पब्लिक पूछ रही है— "भई, जब राहत सामग्री बांटने का ठेका इन युवाओं ने ही ले रखा है, तो आप लोग सरकारी गाड़ियाँ सिर्फ सायरन बजाने के लिए दौड़ा रहे हो क्या?"
वैसे, प्रशासन की वितरण प्रणाली पर भी उंगलियाँ उठ रही हैं। जनता कह रही है कि राहत सामग्री कागज पर तो खूब बंट रही है, पर हकीकत में पीड़ितों तक पहुँचते-पहुँचते रास्ते में ही गायब हो जाती है। लगता है फाइलें भी पानी में बह गई हैं!
अतः, सरकार और प्रशासन से हाथ जोड़कर निवेदन है कि कृपया इन युवाओं को रोकें! ये लोग यूंही पीड़ितों की मदद करके सिस्टम की 'कारगुजारियों' का पर्दाफाश करते रहे, तो बाबू लोग बैठकर फाइलें कैसे हिलाएंगे?
बाकी, सागर, अनूप और विकास भईया... तुम लोगों की जय हो! तुम लोग प्रशासन के लिए किसी 'चलते-फिरते तमांचे' से कम नहीं हो! 👏😂
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