Public App Logo
Jansamasya
News
पुलिस
Maharashtra
Bjp
National
Police
Bihar
India
Gujarat
भाजपा
Congress
Modi
Delhi
Viral
Bollywood
दिल्ली
Patna
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Madhyapradesh
Pmmodi
Rahulgandhi
यूपी
Bhopal
सपा
Uttarpradesh
Haryana
Hardoi

# **प्रेस विज्ञप्ति** ## **तकनीकी संस्थानों का लगातार बंद होना चिंता का विषय, केवल आंकड़े देना पर्याप्त नहीं : राहुल कस्वां** चूरू लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री राहुल कस्वां ने देशभर में तकनीकी शिक्षण संस्थानों के लगातार बंद होने के मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में लोकसभा में उनके द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्रालय ने राज्योंवार आंकड़े तथा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों की जानकारी तो दी है, लेकिन संस्थानों के बंद होने के वास्तविक कारणों का अपेक्षित विश्लेषण प्रस्तुत नहीं किया है। विशेष रूप से नामांकन (Enrollment) की स्थिति और संस्थानों के लगातार बंद होने के बीच क्या संबंध है, इस महत्वपूर्ण पहलू पर उत्तर में कोई स्पष्ट आकलन नहीं किया गया है। शिक्षा मंत्रालय के उत्तर के अनुसार पिछले तीन वर्षों के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थान लगातार बंद हुए हैं। इस अवधि में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा तमिलनाडु में सबसे अधिक संस्थान बंद हुए हैं। राजस्थान में भी यह स्थिति लगातार गंभीर होती दिखाई दे रही है। वर्ष 2024-25 में जहां 3 संस्थान बंद हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 6 और 2026-27 में 8 हो गई है। इससे स्पष्ट है कि यह समस्या केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशव्यापी स्वरूप ग्रहण कर रही है। मंत्रालय ने अपने उत्तर में यह भी बताया है कि एआईसीटीई से संबद्ध तकनीकी संस्थानों में राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ा है। वर्ष 2023-24 में जहां कुल नामांकन 22.11 लाख था, वह 2024-25 में बढ़कर 27.25 लाख तथा 2025-26 में लगभग 29.59 लाख हो गया। इसके साथ ही एआईसीटीई द्वारा उभरते हुए विषयों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने, स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने तथा उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाने जैसे विभिन्न कदमों का भी उल्लेख किया गया है। श्री राहुल कस्वां ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर नामांकन में वृद्धि का तथ्य सकारात्मक है, लेकिन यदि दूसरी ओर बड़ी संख्या में तकनीकी संस्थान लगातार बंद हो रहे हैं तो इसके पीछे के कारणों का गंभीरता से अध्ययन किया जाना आवश्यक है। केवल नामांकन के आंकड़े प्रस्तुत कर देने से यह स्पष्ट नहीं होता कि संस्थानों की आर्थिक व्यवहार्यता, क्षेत्रीय असंतुलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संकाय की उपलब्धता अथवा अन्य कौन-कौन से कारण इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि तकनीकी संस्थानों के बंद होने के कारणों का व्यापक अध्ययन कराया जाए, नामांकन और संस्थानों की व्यवहार्यता के बीच संबंध का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाए तथा प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर ऐसी नीतियां तैयार की जाएं, जिनसे देशभर में तकनीकी शिक्षा संस्थानों को सशक्त बनाया जा सके और अनावश्यक रूप से संस्थानों के बंद होने की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। श्री राहुल कस्वां ने कहा, **"तकनीकी शिक्षण संस्थान देश के कुशल मानव संसाधन के निर्माण की आधारशिला हैं। यदि राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है और इसके बावजूद विभिन्न राज्यों में संस्थान लगातार बंद हो रहे हैं, तो इस स्थिति का गहराई से विश्लेषण किया जाना चाहिए। सरकार को केवल आंकड़े प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन वास्तविक कारणों की पहचान करनी चाहिए जिनकी वजह से संस्थानों का संचालन प्रभावित हो रहा है, ताकि समय रहते प्रभावी और व्यावहारिक नीति-निर्णय लिए जा सकें।"**

Bhadra, Hanumangarh | Aug 3, 2026

MORE NEWS

# **प्रेस विज्ञप्ति** ## **तकनीकी संस्थानों का लगातार बंद होना चिंता का विषय, केवल आंकड़े देना पर्याप्त नहीं : राहुल कस्वां** चूरू लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्री राहुल कस्वां ने देशभर में तकनीकी शिक्षण संस्थानों के लगातार बंद होने के मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में लोकसभा में उनके द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न के उत्तर में शिक्षा मंत्रालय ने राज्योंवार आंकड़े तथा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों की जानकारी तो दी है, लेकिन संस्थानों के बंद होने के वास्तविक कारणों का अपेक्षित विश्लेषण प्रस्तुत नहीं किया है। विशेष रूप से नामांकन (Enrollment) की स्थिति और संस्थानों के लगातार बंद होने के बीच क्या संबंध है, इस महत्वपूर्ण पहलू पर उत्तर में कोई स्पष्ट आकलन नहीं किया गया है। शिक्षा मंत्रालय के उत्तर के अनुसार पिछले तीन वर्षों के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त तकनीकी संस्थान लगातार बंद हुए हैं। इस अवधि में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा तमिलनाडु में सबसे अधिक संस्थान बंद हुए हैं। राजस्थान में भी यह स्थिति लगातार गंभीर होती दिखाई दे रही है। वर्ष 2024-25 में जहां 3 संस्थान बंद हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 6 और 2026-27 में 8 हो गई है। इससे स्पष्ट है कि यह समस्या केवल कुछ राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशव्यापी स्वरूप ग्रहण कर रही है। मंत्रालय ने अपने उत्तर में यह भी बताया है कि एआईसीटीई से संबद्ध तकनीकी संस्थानों में राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ा है। वर्ष 2023-24 में जहां कुल नामांकन 22.11 लाख था, वह 2024-25 में बढ़कर 27.25 लाख तथा 2025-26 में लगभग 29.59 लाख हो गया। इसके साथ ही एआईसीटीई द्वारा उभरते हुए विषयों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने, स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने तथा उद्योगों के साथ सहयोग बढ़ाने जैसे विभिन्न कदमों का भी उल्लेख किया गया है। श्री राहुल कस्वां ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर नामांकन में वृद्धि का तथ्य सकारात्मक है, लेकिन यदि दूसरी ओर बड़ी संख्या में तकनीकी संस्थान लगातार बंद हो रहे हैं तो इसके पीछे के कारणों का गंभीरता से अध्ययन किया जाना आवश्यक है। केवल नामांकन के आंकड़े प्रस्तुत कर देने से यह स्पष्ट नहीं होता कि संस्थानों की आर्थिक व्यवहार्यता, क्षेत्रीय असंतुलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संकाय की उपलब्धता अथवा अन्य कौन-कौन से कारण इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि तकनीकी संस्थानों के बंद होने के कारणों का व्यापक अध्ययन कराया जाए, नामांकन और संस्थानों की व्यवहार्यता के बीच संबंध का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाए तथा प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर ऐसी नीतियां तैयार की जाएं, जिनसे देशभर में तकनीकी शिक्षा संस्थानों को सशक्त बनाया जा सके और अनावश्यक रूप से संस्थानों के बंद होने की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। श्री राहुल कस्वां ने कहा, **"तकनीकी शिक्षण संस्थान देश के कुशल मानव संसाधन के निर्माण की आधारशिला हैं। यदि राष्ट्रीय स्तर पर विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है और इसके बावजूद विभिन्न राज्यों में संस्थान लगातार बंद हो रहे हैं, तो इस स्थिति का गहराई से विश्लेषण किया जाना चाहिए। सरकार को केवल आंकड़े प्रस्तुत करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन वास्तविक कारणों की पहचान करनी चाहिए जिनकी वजह से संस्थानों का संचालन प्रभावित हो रहा है, ताकि समय रहते प्रभावी और व्यावहारिक नीति-निर्णय लिए जा सकें।"** - Bhadra News