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नियमत: चलने वाली पुलिस के पीछे तो पूरा देश व संविधान खड़ा होता है परंतु अपराधी को सजा देना पुलिस का काम नहीं--- नवनीत कुमार झा राजद नेता नवनीत कुमार झा ने कहा आज हमारे देश में एनकाउंटर के तमाम मामले शक के घेरे में पूर्व विधानसभा प्रत्याशी श्री झा ने बताया संविधान साफ कहता है कि आप इस तरह किसी को मार नहीं सकते शिवहर-- राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता, शिवहर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी व सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीत कुमार झा ने कहां है कि बिहार के भोजपुर जिले में भारत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर ने देश में पुलिस मुठभेड़ पर एक गंभीर बहस खड़ी कर दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि क्या पुलिस को यह हक है कि वह हथियारबंद व्यक्ति को सीधे जान ले ले ,मुठभेड़ कि इस प्रवृत्ति से कानून का राज्य स्थापित होता है या शासन का इकबाल कमजोर पड़ता है। राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता व सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता नवनीत कुमार झा ने कहा है कि मुठभेड़ से पहले पुलिस अपने नेटवर्क के जरिए सटीक जानकारी जुटाती है उसके बाद वरीय पदाधिकारी के लिखित आदेश के बाद कार्रवाई करती है या गोली चलती है। श्री झा ने स्पष्ट किया है कि अपराधी या आतंकी हमेशा कमजोर पिच पर खेलता है, नियमत: चलने वाली पुलिस के पीछे पूरा देश संविधान खड़ा होता है। एनकाउंटर कानून का राज्य स्थापित करने के लिए होता है ।पुलिस को समाज और व्यवस्था का संरक्षक माना जाता है, यही उसकी मुख्य भूमिका है। परंतु भारत भूषण तिवारी के आत्मसमर्पण करने के बाद निहत्थे व्यक्ति पर एनकाउंटर करना कहीं से न्याय प्रतीत नहीं हो रहा है। पूर्व विधानसभा प्रत्याशी व राष्ट्रीय जनता दल के नेता श्री झा ने कहा है कि एक समय चंबल के डकैतों के साथ पुलिस की खूब मुठभेड़ होती थी, उनको गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की बड़ी-बड़ी टुकड़ियां जाती थी। धर पकड़ के क्रम में डकैतों की तरफ से फायरिंग होती थी तब पुलिस भी आत्मरक्षा में गोली चलाती थी । भारत भूषण तिवारी मुठभेड़ को देख तो सभी तथ्यों का सूक्ष्म परीक्षण न्यायिक आयोग द्वारा किया जाएगा और वस्तु स्थिति सामने आ ही जाएगी। उन्होंने कहा है कि आमतौर पर किसी भी छापे में हथियारबंद पुलिसकर्मी ही जाते हैं। बड़ी छापेमारी में एसटीएफ जैसे प्रशिक्षित बल को उतारा जाता है, 1980 के दशक में चंपारण में के उन्मूलन के लिए ब्लैक पैंथर अभियान चलाया गया था। उन्होंने कहा है कि प्रजातांत्रिक व्यवस्था में पुलिस का कामकाज पारदर्शी होना चाहिए ताकि लोग उसके द्वारा की गई कार्रवाइयों को संदेश की दृष्टि से ना देखें। भारत भूषण तिवारी के मामलों को लेकर उच्च स्तरीय जांच चल रही है। अपराधियों में भय होना चाहिए,अगर पुलिस पर हमला करेंगे तो मारे भी जाएंगे लेकिन निहत्थे को मौत के घाट सुलाना यह कहीं का न्याय नहीं है। नियमत: चलने वाली पुलिस के पीछे तो पूरा देश संविधान खड़ा होता है। परंतु अपराधी को सजा देना पुलिस का काम नहीं, यह माननीय न्यायालय का काम है।

Tariani Chowk, Sheohar | Jun 28, 2026

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