
आर्शीवाद अभियान का दमोह मॉडल बना पूरे प्रदेश के लिए मिसाल- कलेक्टर श्री यादव
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आशीर्वाद अभियान की सफलता के बाद प्रदेशभर में घर-घर होगी वृद्धजनों की e-KYC
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शासन ने 29 जुलाई 2026 को जारी किए प्रदेशव्यापी क्रियान्वयन के निर्देश
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दमोह जिले से शुरू किया गया 'आशीर्वाद अभियान' अब पूरे मध्यप्रदेश के लिए एक आदर्श मॉडल बन गया है। अभियान के अंतर्गत पात्र होने के बावजूद e-KYC नहीं होने के कारण पेंशन से वंचित वृद्धजनों की पहचान कर उन्हें घर-घर जाकर नि:शुल्क e-KYC सुविधा उपलब्ध कराई गई। अभियान की उल्लेखनीय सफलता को देखते हुए मध्यप्रदेश शासन ने 29 जुलाई 2026 को निर्देश जारी कर प्रदेश के सभी जिलों में 'दमोह मॉडल' के आधार पर इसी प्रकार का अभियान संचालित करने का निर्णय लिया है।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने कहा कि अभियान के तहत जिले में 1664 वृद्धजनों की सूची तैयार की गई, जिनमें से 1638 वृद्धजनों का घर-घर जाकर e-KYC कराया गया और उनकी पेंशन स्वीकृत कर पुनः चालू कराई गई। e-KYC की प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क रखी गई तथा पेंशन स्वीकृति आदेश भी वृद्धजनों के घर पहुंचाकर दिए गए, ताकि उन्हें कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होने कहा यह केवल दमोह जिले ही नहीं, बल्कि पूरे प्रशासन के लिए गर्व का विषय है कि जिले में विकसित मॉडल अब पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। इससे हजारों ऐसे वृद्धजनों को राहत मिलेगी, जिनकी पेंशन केवल e-KYC नहीं होने के कारण बंद हो गई थी।
उन्होंने कहा इस अभियान की शुरुआत एक जनसुनवाई से हुई। जनसुनवाई में एक वृद्ध महिला अपने नाती के साथ पहुंचीं, जिनके हाथ में प्लास्टर बंधा हुआ था। जब सामाजिक न्याय विभाग से पूछा गया कि उनकी पेंशन क्यों बंद है, तो अधिकारियों ने बताया कि कई प्रयास किए जा चुके हैं और विभागीय पोर्टल पर पंचनामा अपलोड कर दिया गया है कि e-KYC संभव नहीं है, इस पर कलेक्टर श्री यादव ने तत्काल आधार केंद्र प्रभारी एवं ई-गवर्नेंस जिला प्रबंधक को निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में महिला की e-KYC कराई जाए।
उन्होंने हाथ धुलवाने, बोरोप्लस जैसी क्रीम लगाने तथा दसों उंगलियों से कम से कम चार बार प्रयास करने के निर्देश दिए। आवश्यकता पड़ने पर आईरिस स्कैनर और फेस ऑथेंटिकेशन का भी उपयोग किया गया। टीम की मेहनत रंग लाई और उसी दिन महिला की सफलतापूर्वक e-KYC पूरी हो गई। e-KYC पूर्ण होने के बाद कलेक्टर स्वयं महिला के घर पेंशन स्वीकृति आदेश लेकर पहुंचे। साथ ही यह भी सामने आया कि संबंधित महिला को पिछले 5-6 महीनों से पेंशन नहीं मिली थी। मामले में जिम्मेदार अधिकारी से राशि की वसूली कर ₹4,800 तत्काल महिला के खाते में स्थानांतरित कराए गए।
इस घटना ने प्रशासन को यह सोचने पर मजबूर किया कि जिले में ऐसे अनेक पात्र वृद्धजन हो सकते हैं, जो केवल तकनीकी कारणों से पेंशन से वंचित हैं। इसके बाद सामाजिक न्याय विभाग के डाटा का विस्तृत विश्लेषण कराया गया। ग्राम पंचायत एवं वार्डवार सर्वे के माध्यम से 1664 वृद्धजनों की सूची तैयार की गई। इसके पश्चात सभी संबंधित अधिकारियों, आधार केंद्र प्रभारियों, पंचायत सचिवों, रोजगार सहायकों तथा अन्य कर्मचारियों की बैठक लेकर विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई।
योजना के अनुसार सभी वृद्धजनों के घर-घर जाकर नि:शुल्क e-KYC करने का निर्णय लिया गया। आधार केंद्रों पर लगने वाला शुल्क भी वृद्धजनों से नहीं लिया गया, बल्कि उसका भुगतान एनजीओ के माध्यम से कराया गया। कर्मचारियों को निर्देश दिए गए कि हाथ धुलवाने, बोरिक पाउडर अथवा क्रीम लगाने, दसों उंगलियों से कई बार प्रयास करने तथा आवश्यकता पड़ने पर आईरिस एवं फेस स्कैनिंग जैसी वैकल्पिक तकनीकों का उपयोग किया जाए। लक्ष्य केवल इतना था कि कोई भी पात्र वृद्धजन तकनीकी कारणों से पेंशन से वंचित न रहे।
इस सुनियोजित प्रयास का परिणाम यह रहा कि 1638 वृद्धजनों की सफलतापूर्वक e-KYC कर उनकी पेंशन स्वीकृत कराई गई और पेंशन की राशि उनके बैंक खातों में पहुंचनी शुरू हो गई। अभियान के दौरान पेंशन स्वीकृति आदेश भी घर-घर जाकर वितरित किए गए, जिससे वृद्धजनों को सम्मानपूर्वक और बिना किसी परेशानी के शासन की योजना का लाभ मिल सका।
कलेक्टर श्री यादव ने कहा प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि पात्र हितग्राहियों तक उनका वास्तविक लाभ पहुंचाना है। दमोह मॉडल इसी सोच का परिणाम है और अब प्रदेशभर में लागू होकर हजारों वृद्धजनों के लिए नई उम्मीद बनेगा