
#विभीषण_ने_छोड़ा_भाई_का_साथ_राम_की_शरण_में_पहुंचे
रावण की हठ के आगे विभीषण की नीति और अंगद की समझाइश बेअसर
बिसाऊ। (अशोक सोनी) कस्बे की विश्वविख्यात ऐतिहासिक मूक रामलीला में रविवार को धर्म, नीति, भाईचारे और अहंकार के टकराव के मार्मिक दृश्य साकार हुए। खुले मैदान में मंचित लीला में विभीषण का प्रभु श्रीराम की शरण में पहुंचना, समुद्र पर सेतु निर्माण, अंगद-रावण संवाद और राम-रावण की सेनाओं के बीच भीषण युद्ध का मंचन किया गया। बिना संवादों के केवल भाव के माध्यम से कलाकारों ने प्रसंगों को जीवंत कर दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
भाई को समझाया, लेकिन अहंकार में अंधे रावण ने लात मारकर निकाला
लीला के दौरान रावण के दरबार में श्री राम और लक्ष्मण को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी बीच विभीषण ने अपने भाई रावण को नीति का मार्ग दिखाते हुए माता सीता को सम्मान पूर्वक श्री राम के पास लौटाने की सलाह दी। लेकिन सद्बुद्धि की बात रावण को नागवार गुजरी। क्रोध में अंधे रावण ने विभीषण को लात मारकर लंका से बाहर निकाल दिया। अपमानित और दुखी विभीषण ने अधर्म का साथ छोड़कर प्रभु श्रीराम की शरण ग्रहण की। इस प्रसंग ने संदेश दिया कि जब सत्ता और अहंकार विवेक पर हावी हो जाते हैं, तब विनाश का मार्ग खुलने लगता है।
समुद्र पर सेतु बना, लंका पहुंची वानर सेना
इसके बाद समुद्र पार करने के लिए श्रीराम की प्रार्थना और समुद्र देव के प्रकट होने की लीला का मंचन हुआ। समुद्र देव ने नल-नील की सहायता से सेतु निर्माण का मार्ग बताया। नल-नील के सहयोग से समुद्र पर सेतु बनाया गया और श्रीराम के नेतृत्व में वानर सेना लंका की ओर बढ़ी। सेतु निर्माण के दृश्य ने रामभक्तों को रोमांचित किया।
अंगद ने दी समझाइश, रावण ने ठुकराया शांति का प्रस्ताव
युद्ध से पहले श्रीराम ने अंगद को दूत बनाकर रावण के दरबार में भेजा। अंगद ने रावण को समझाते हुए माता सीता को लौटाकर युद्ध टालने का अवसर दिया, लेकिन रावण अपनी जिद पर अड़ा रहा। समझाइश और शांति का प्रस्ताव ठुकराते ही संघर्ष टालने की आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गई। इसके बाद राम और रावण की सेनाओं के बीच युद्ध शुरू हो गया। रणभूमि में वानर सेना और राक्षस सेना के बीच संघर्ष के दृश्यों ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। युद्ध में रावण की सेना के योद्धा मारे जाने लगे, तो रावण का पुत्र मेघनाद युद्ध के मैदान में उतर आया। इसी रोमांचक मोड़ पर गुरुवार की लीला को विश्राम दिया गया।
लीला का मंचन आचार्य सुनील शास्त्री व पूर्व मंत्री श्याम सुंदर भानी पुरा के र्निदेशन हुआ जबकि मंच संचालन कपिलेश शर्मा और सुभाष खटीक ने किया।
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