
**'जब बेजुबान हाथी की जान चली गई, तब जागे अंधी-बहरी सरकार के अफसर! मऊगंज-रीवा में मौत के बाद लाए गए 3 ट्रक, जाल और 2 ट्रेंड कुमकी हाथी; संपादक दीपक कुमार गुप्ता का सीधा सवाल— 6 महीने पहले क्यों लकवा मारा था प्रशासन को?'**
**मऊगंज/रीवा।** मऊगंज और रीवा जिले में वन विभाग और विद्युत विभाग की आपराधिक लापरवाही, घमंड और निकम्मेपन का खौफनाक नतीजा अब एक बेजुबान हाथी की दर्दनाक मौत के रूप में देश के सामने आ चुका है। रीवा परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक पी-333 बीट सीतापुर की सीमा के पास ग्राम मलकपुर (कठौतिया टोला) के राजस्व क्षेत्र में शनिवार को विद्युत के नंगे तारों की चपेट में आने से हाथी की तड़प-तड़पकर मौत हो गई। 19 सितम्बर 2026 को घटना के बाद वन विकास निगम और रीवा-सीधी परियोजना मंडल के अधिकारी अब कागजी लीपापोती और कानूनी प्रक्रियाओं का राग अलाप रहे हैं। वन विभाग के अनुसार 20 सितम्बर 2026 को वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा और एनटीसीए (NTCA) की एसओपी (SOP) के अनुसार दाह संस्कार करने का ढोंग रचा जाएगा। लेकिन सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह उठता है कि जिस बेजुबान की जान जाने के बाद आज आनन-फानन में 3 बड़े ट्रक, भारी-भरकम जाल और बिछड़े हाथी को पकड़ने के लिए 2-2 ट्रेंड (कुमकी) हाथी मंगाए गए हैं— आखिर यह तामझाम पिछले 6 महीनों से कहाँ सोया हुआ था? इंडिया हेडलाइन 24 के संपादक दीपक कुमार गुप्ता पिछले 6 महीनों से लगातार पल-पल की खबर देकर इस हाथियों के जोड़े पर मंडराते खतरे और ग्रामीणों की सुरक्षा का अलर्ट जारी कर रहे थे। अगर यही 3 ट्रक, रेस्क्यू जाल और कुमकी हाथी 6 महीने पहले मंगा लिए गए होते, तो आज उस मासूम बेजुबान की इस तरह दर्दनाक बलि न चढ़ती! अभी कुछ ही दिन पहले मऊगंज के डूडा दुआरी में 33 हजार वोल्ट के जर्जर तारों की चपेट में आने से 4 मासूम गायों की तड़प-तड़पकर मौत हुई थी, और अब राष्ट्रीय धरोहर माने जाने वाले हाथी का कत्ल हो गया। यह साफ साबित करता है कि मऊगंज और रीवा जिले के प्रशासन, वन विभाग की DFO, RO वर्षा सिंह और विद्युत विभाग के अधिकारियों की आंखों और जमीर में पूरी तरह 'लकवा' मार चुका है! जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए या बेजुबान बेमौत न मारे जाएं, तब तक ये अफसर एसी कमरों में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं और दावतों में मस्त रहते हैं। अब जब हाथी बिछड़ चुका है और उसका साथी दम तोड़ चुका है, तब जाकर वन महकमा रेस्क्यू की नौटंकी कर रहा है। संपादक दीपक कुमार गुप्ता प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जिला प्रशासन से सीधी मांग करते हैं कि कागजी पोस्टमार्टम और एनटीसीए एसओपी का नाटक करने के बजाय, 6 महीने से कुंभकर्णी नींद सो रहे लापरवाह वन अधिकारियों, DFO, RO वर्षा सिंह और विद्युत विभाग के जिम्मेदार अमले पर **हत्या व आपराधिक लापरवाही की FIR** दर्ज कर उन्हें तत्काल सस्पेंड किया जाए! जब तक बेजुबानों के कातिल अफसरों पर गाज नहीं गिरती, तब तक इंडिया हेडलाइन 24 की यह तीखी और कड़वी कलम बिना डरे, बिना झुके और बिना बिके लगातार इस अंधी-बहरी व्यवस्था पर प्रहार करती रहेगी!
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Mauganj, Rewa | Sep 19, 2026