
बरकट्टा में विश्व आदिवासी दिवस पर गूंजा जल, जंगल और जमीन का अधिकार
लोकेशन - नौहट्टा | रोहतास
कैमूर पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित बरकट्टा में रविवार को आदिवासी समाज के लोगों ने एकजुट होकर विश्व आदिवासी दिवस मनाया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की संस्कृति, पहचान, शिक्षा और अधिकारों के साथ-साथ जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सरपंच लक्ष्मण उरांव ने की, जबकि मंच संचालन सुदामा उरांव ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत बिरसा मुंडा, सिद्धू-कानू, वीर बुद्धू भगत, नीलांबर-पीतांबर, कांट्या भील, शिबू सोरेन एवं हरि प्रसाद घमड़ी सिंह खैरवार के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलित कर की गई।
शिक्षा को बताया समाज की ताकत
वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की नई पीढ़ी तेजी से शिक्षा से जुड़ रही है। बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के साथ उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। शिक्षा ही समाज को आगे बढ़ाने का सबसे मजबूत माध्यम है।
जल-जंगल-जमीन के अधिकार का मुद्दा उठा
वक्ताओं ने कहा कि आज भी आदिवासी समाज के कई परिवार अपनी आजीविका के लिए जंगल पर निर्भर हैं। जंगल में रहने के बावजूद वनोपज के उपयोग और उसकी खरीद-बिक्री को लेकर कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता है।
कार्यक्रम में महुआ, पीआर सहित अन्य वनोपज की खरीद-बिक्री में छूट देने की मांग उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि जंगल और पहाड़ आदिवासी समाज के लिए सिर्फ संसाधन नहीं, बल्कि उनकी जीवनशैली, संस्कृति और पहचान का हिस्सा हैं।
🗣️ राजू सिंह खैरवार, सुदामा उरांव ने एकजुटता पर दिया जोर
अधौरा के जिला पार्षद सदस्य राजू सिंह खैरवार ने कहा कि आदिवासी समाज को अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। उन्होंने अपनी भाषा और संस्कृति को बचाए रखने की अपील की और कहा कि जल, जंगल और जमीन पूर्वजों की धरोहर है, जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना जरूरी है।
📢 खैरवार जाति के वर्गीकरण में विसंगति का मुद्दा
पटना से पहुंचे ललित भगत ने कहा कि एक ही जाति के लोगों को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। उन्होंने खैरवार जाति को कहीं अनुसूचित जाति तो कहीं अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल किए जाने को बड़ी विसंगति बताते हुए इसके समाधान की आवश्यकता जताई।
कार्यक्रम में झारखंड से विश्वनाथ तिर्की, ललित भगत, राजू सिंह खैरवार, पूर्व सरपंच लक्ष्मण उरांव, पवन सिंह, नंदन सिंह, दुलार खैरवार, दुलार उरांव, अशोक उरांव दुग्धा, मुनि उरांव, सुरेश खैरवार, धर्मेंद्र सिंह खैरवार सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे।
💚 विश्व आदिवासी दिवस सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, पहचान, अधिकार और पूर्वजों की धरोहर को बचाने का संकल्प लेने का अवसर है।
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