
मां शारदा मेले में सुगम दर्शन और सुरक्षा व्यवस्था की रही प्रभावी पहल, कलेक्टर-एसपी के नवाचार ने बढ़ाया जनभागीदारी का भरोसा
650 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती, सीसीटीवी-ड्रोन से निगरानी और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए कमियों पर तत्काल कार्रवाई से नवरात्रि मेला शांतिपूर्ण संपन्न
मैहर। त्रिकूट पर्वत पर विराजमान विश्वप्रसिद्ध मां शारदा देवी के शारदीय नवरात्रि मेले का समापन श्रद्धा, आस्था और सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं के बीच शांतिपूर्ण ढंग से हुआ। मेले में देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने, सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ एवं यातायात प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग ने व्यापक इंतजाम किए। कलेक्टर विदिशा मुखर्जी और पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में किए गए प्रयासों के बीच एक नवाचार विशेष रूप से चर्चा में रहा, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों और पत्रकारों को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से जोड़कर व्यवस्थाओं की कमियों को सामने लाने और उन पर त्वरित सुधार करने की पहल की गई।
व्हाट्सएप ग्रुप बना व्यवस्थाओं की निगरानी का प्रभावी माध्यम
नवरात्रि मेले के दौरान व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों और पत्रकारों का एक साझा व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया। इस पहल का उद्देश्य केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान करना नहीं, बल्कि आम श्रद्धालुओं की भावनाओं, उनकी सुविधाओं और मौके पर सामने आ रही समस्याओं पर लगातार नजर रखना था।इस ग्रुप में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने व्यवस्थाओं में कमियों, लापरवाही अथवा श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधाओं के संबंध में खुलकर जानकारी साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद जब लोगों की ओर से समस्याएं और कमियां सामने लाई गईं, तो संबंधित व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार के प्रयास किए गए।प्रशासन की इस पहल ने शिकायतों को केवल दर्ज करने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें सुधार की प्रक्रिया से जोड़ने का काम किया। इससे मैदानी स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं पर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान पहुंचाने और व्यवस्थाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिली। प्रशासन और मीडिया के बीच संवाद की यह पहल बड़े धार्मिक आयोजनों में जनभागीदारी और जवाबदेही का एक सार्थक उदाहरण बनी।
650 से अधिक पुलिसकर्मियों ने संभाली सुरक्षा की जिम्मेदारी
मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए 650 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। मेला क्षेत्र को विभिन्न जोन और सेक्टरों में विभाजित कर अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी, श्रद्धालुओं की आवाजाही और भीड़ नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि दर्शन के दौरान अनावश्यक परेशानी न हो।
सीसीटीवी और आधुनिक ड्रोन से निगरानी
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों के साथ आधुनिक थर्मल निगरानी क्षमता वाले ड्रोन का उपयोग किया गया। इनके माध्यम से मेला क्षेत्र में भीड़ की स्थिति पर नजर रखने और सुरक्षा व्यवस्था के संचालन में सहायता मिली। पारंपरिक सुरक्षा इंतजामों के साथ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल ने निगरानी व्यवस्था को व्यापक बनाने में भूमिका निभाई।
आम श्रद्धालुओं को प्राथमिकता, वीआईपी दर्शन पर अंकुश
मेले में आम श्रद्धालुओं को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से वीआईपी दर्शन पर प्रतिबंध रखा गया। इससे दर्शन व्यवस्था में समानता बनाए रखने और कतारों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। प्रशासन की कोशिश रही कि मां शारदा के दरबार में पहुंचने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुगमता से दर्शन का अवसर मिल सके।
दिव्यांग और दृष्टिबाधित श्रद्धालुओं के लिए विशेष सहयोग
दिव्यांग एवं दृष्टिबाधित श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा गया। जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति की ओर से ऐसे श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के लिए सहयोग उपलब्ध कराया गया। इसके अतिरिक्त पेयजल, साफ-सफाई, धूप से बचाव, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, पार्किंग और यातायात प्रबंधन पर भी ध्यान दिया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों ने किया निरीक्षण और सराहा
मेले के दौरान वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आईजी और डीआईजी स्तर के अधिकारियों ने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और व्यवस्थाओं को सराहा। विभागों के बीच समन्वय और मैदानी अमले की सक्रियता को आयोजन के सफल संचालन का महत्वपूर्ण आधार माना गया।
प्रशासन और मीडिया के समन्वय से मिली नई दिशा
मां शारदा के दरबार में आयोजित नवरात्रि मेले का शांतिपूर्ण समापन सुरक्षा बलों, जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, मंदिर प्रबंध समिति और मैदानी कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों को दर्शाता है। हालांकि, इस आयोजन में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन और पत्रकारों के बीच बनाया गया साझा व्हाट्सएप ग्रुप एक अलग पहल के रूप में सामने आया।इस नवाचार की खासियत यह रही कि व्यवस्थाओं की कमियों को सामने लाने के लिए संवाद का रास्ता खुला रखा गया और प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तत्काल सुधार के प्रयास किए गए। इससे यह संदेश भी सामने आया कि बड़े धार्मिक आयोजनों में बेहतर व्यवस्था केवल संसाधनों और सुरक्षा बलों की तैनाती से ही नहीं, बल्कि संवाद, संवेदनशीलता, जवाबदेही और समय पर सुधार से भी सुनिश्चित होती है।मां शारदा के दर्शन के लिए पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा को केंद्र में रखकर किए गए प्रयासों के बीच कलेक्टर विदिशा मुखर्जी और पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह की यह पहल प्रशासनिक कार्यप्रणाली में जनभागीदारी को महत्व देने वाले नवाचार के रूप में उल्लेखनीय रही।