
ई-विकास प्रणाली से पारदर्शी तरीके से हो रहा उर्वरक वितरण
जिले में सुपर फॉस्फेट एवं एन.पी.के. उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध
यूरिया के साथ फॉस्फेटिक उर्वरकों का प्रयोग किसानों के लिए लाभकारी
जिले में किसानों को उर्वरकों का वितरण ई-विकास प्रणाली के माध्यम से पारदर्शी एवं वैज्ञानिक तरीके से किया जा रहा है। इस प्रणाली में फसल के रकबे एवं प्रकार के अनुसार कृषि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के आधार पर उर्वरक की मात्रा निर्धारित की जाती है, जिससे किसानों को संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
उप संचालक कृषि विभाग ने बताया कि फसलों के बेहतर विकास के लिए नत्रजन (यूरिया) के साथ फॉस्फेटिक उर्वरकों जैसे सुपर फॉस्फेट, एन.पी.के., डी.ए.पी. तथा पोटाश का संतुलित उपयोग आवश्यक है। इसी उद्देश्य से ई-टोकन प्रणाली के तहत यूरिया क्रय करने के साथ सुपर फॉस्फेट, एन.पी.के. अथवा डी.ए.पी. में से किसी एक फॉस्फेटिक उर्वरक का चयन अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने बताया कि जिले के सभी विकासखंडों में सुपर फॉस्फेट एवं एन.पी.के. उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वर्तमान में जिले में 10,463 मीट्रिक टन यूरिया, 5,850 मीट्रिक टन सुपर फॉस्फेट तथा 6,721 मीट्रिक टन एन.पी.के. का भंडारण उपलब्ध है, जिससे किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल यूरिया पर निर्भर न रहें, बल्कि संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर फॉस्फेटिक उर्वरकों का भी उपयोग करें। इससे फसल की वृद्धि एवं उत्पादन में वृद्धि होती है, जबकि केवल यूरिया के अत्यधिक उपयोग से फसलों में कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है।
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