
धरती पर कॉफी पीने के लिए बस एक कप चाहिए, लेकिन अंतरिक्ष में कॉफी पीना इतना आसान नहीं है! वहां कॉफी कप में नीचे बैठने के बजाय हवा में तैर सकती है। फिर नासा के अंतरिक्ष यात्री बिना स्ट्रॉ के कॉफी कैसे पीते हैं?
अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण का असर बहुत कम महसूस होता है। इसे सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण कहते हैं। इसी वजह से पानी और कॉफी जैसे तरल पदार्थ धरती की तरह नीचे नहीं बैठते। उनकी बूंदें गोल आकार में तैर सकती हैं और अगर वे उपकरणों तक पहुंच जाएं, तो परेशानी खड़ी कर सकती हैं।
इसी समस्या का हल निकालने के लिए नासा के अंतरिक्ष यात्री डॉन पेटिट ने एक खास कप का प्रयोग किया। इस कप की बनावट सामान्य कप से अलग है। इसमें एक खास आकार का संकरा रास्ता बनाया गया है, जो तरल को कप के किनारे तक पहुंचने में मदद करता है।
इसका पूरा कमाल पृष्ठ तनाव और केशिका प्रभाव में छिपा है। तरल के अणु एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं और कप की सतह के साथ भी संपर्क बनाते हैं। खास डिजाइन इन बलों की मदद से कॉफी को किनारे की तरफ ले जाता है, जहां से अंतरिक्ष यात्री घूंट भर सकते हैं।
यानी यहां कॉफी को नीचे खींचने के लिए धरती के गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर रहने के बजाय कप की बनावट काम आती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि कॉफी कभी छलक ही नहीं सकती। तरल को संभालने के लिए सही डिजाइन और सावधानी दोनों जरूरी हैं।
इस प्रयोग का फायदा सिर्फ कॉफी पीने तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक इससे समझते हैं कि अंतरिक्ष में पानी, ईंधन और दूसरे तरल पदार्थों को बिना सामान्य गुरुत्वाकर्षण के कैसे नियंत्रित किया जा सकता है। यही जानकारी भविष्य के लंबे अंतरिक्ष अभियानों में काम आ सकती है।
अब आप बताइए, अगर आपको अंतरिक्ष में जाने का मौका मिले, तो सबसे पहले कौन-सा पेय पीना चाहेंगे—कॉफी, चाय या कुछ और?
मूल स्रोत: नासा और अंतरिक्ष स्टेशन अनुसंधान
#Space #NASA #ScienceFacts #Astronaut #SpaceTechnology
Bihar, India | Oct 23, 2026