
*'हाथी के कत्ल के बाद अब इंसानों की बलि लेने पर तुला प्रशासन! सीतापुर में 24 घंटे से बिजली ठप्प, बूंद-बूंद पानी को तरसी जनता; JE राम लखन शर्मा ने खोला RO बरसत सिंह का राज— संपादक दीपक कुमार गुप्ता का बड़ा प्रहार'*
*मऊगंज/सीतापुर।* मऊगंज के सीतापुर इलाके में वन विभाग और विद्युत विभाग का तुगलकी फरमान और निकम्मापन अब इंसानी जिंदगियों पर भारी पड़ने लगा है। पहले तो अपनी लापरवाही से मासूम हाथी को बिजली के नंगे तारों में झुलसाकर मार डाला, और अब अपनी गर्दन बचाने के लिए पूरे सीतापुर क्षेत्र की बिजली 24 घंटे से काटकर हज़ारों ग्रामीणों को मध्ययुगीन नरक में धकेल दिया गया है! पहले हाथी की बलि चढ़ी और अब बिजली-पानी के बिना इंसानों की जान जाने की नौबत आ गई है— यह हम नहीं, बल्कि पिछले 24 घंटे से सीतापुर की चीखती-चिल्लाती हकीकत बयान कर रही है! जब 24 घंटे से अंधेरे में घुट रही जनता का दर्द लेकर 'इंडिया हेडलाइन 24' ने बिजली विभाग के *जेई (JE) राम लखन शर्मा* से जवाब मांगा, तो उन्होंने साफ शब्दों में पल्ला झाड़ते हुए खुलासा किया कि— "वन विभाग की रेंज ऑफिसर (RO) बरसत सिंह के सीधे आदेश पर पूरे क्षेत्र की लाइट बंद की गई है।" सवाल यह उठता है कि जिस वन विभाग को 6 महीने पहले हाथियों को सुरक्षित रेस्क्यू करना चाहिए था, वह रेस्क्यू का नाटक तब कर रहा है जब हाथी मर गया! और इस नाकामी का बदला सीतापुर की आम जनता से 24 घंटे की ब्लैकआउट करके लिया जा रहा है! जब से सीतापुर में महिला अधिकारी बरसत सिंह की तैनाती हुई है, तब से क्षेत्र के लोगों का जीना दुश्वार हो चुका है। 24 घंटे से बिजली ठप्प होने के कारण पूरे इलाके में पीने के पानी का भीषण संकट पैदा हो गया है। गांव-गांव में लगे पुराने हैंडपंप या तो उखाड़ फेंके गए हैं या बंद पड़े हैं। हालात यह हैं कि लोगों के घरों में न तो पीने के लिए एक घूंट पानी बचा है, न खाना बनाने के लिए और न ही शौच जाने तक के लिए पानी नसीब हो रहा है! एक तरफ झमाझम बारिश का मौसम है, दूसरी तरफ चारों ओर फैला घना अंधेरा। रात के वक्त घरों में सांप, बिच्छू और जहरीले कीड़े-मकोड़े घुस रहे हैं, जिससे ग्रामीणों की जान सीधे खतरे में पड़ गई है। पुराने जमाने में कम से कम केरोसिन (मिट्टी का तेल) मिल जाता था तो लोग ढिबरी या लालटेन जलाकर उजाला कर लेते थे, लेकिन इस 'डिजिटल' मध्य प्रदेश सरकार के राज में न बिजली है, न पानी और न ही मिट्टी का तेल! जनता को पूरी तरह भगवान भरोसे मरने के लिए छोड़ दिया गया है। वन विभाग के ये अफ़सर असल में उत्खनन (खनन) करने वाले अवैध माफियाओं के पीछे-पीछे दौड़ने में मस्त रहते हैं। जो माफिया इन अफसरों को 'लेग पीस' खिलाते हैं और दावतें देते हैं, उनके आगे वन विभाग नतमस्तक रहता है। लेकिन जब वन्यजीवों की सुरक्षा और जनता की बुनियादी सुविधाओं की बात आती है, तो ये अफसर तुगलकी फरमान जारी करके पूरे इलाके को पंगु बना देते हैं। संपादक दीपक कुमार गुप्ता प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधा सवाल पूछते हैं— क्या यही है आपका सुशासन? जहां वन विभाग के घमंडी अफसरों की लापरवाही से पहले एक बेजुबान हाथी मारा जाता है और फिर अपनी नाकामी छिपाने के लिए हज़ारों इंसानों को बिना पानी और बिजली के तड़पने पर मजबूर कर दिया जाता है? अगर सीतापुर की बिजली तत्काल बहाल नहीं की गई और भ्रष्ट RO सिंह सहित ज़िम्मेदार अफ़सरों पर गाज़ नहीं गिरी, तो 'इंडिया हेडलाइन 24' इस प्रशासनिक अत्याचार के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोलेगा!
Mauganj, Rewa | Sep 19, 2026