
झारखंड में 42,664 सहियाओं को मिलेगा टैब, तीन साल तक फाइलों में फंसी रही 114 करोड़ की योजना!
10 हजार का टैब अब 18 हजार रुपये में खरीदने की तैयारी, बजट लगभग वही लेकिन इंटरनेट और बीमा की अवधि 5 साल से घटाकर ढाई साल की गई
रांची। झारखंड में ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाने वाली 42,664 सहियाओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की योजना आखिरकार तीन साल बाद फिर आगे बढ़ती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने सहियाओं को टैबलेट उपलब्ध कराने के लिए 114.25 करोड़ रुपये की खरीद योजना को मंजूरी दे दी है। अब झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएमएचआईडीपीसीएल) के माध्यम से निविदा या जेम पोर्टल के जरिए टैब की खरीद की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
हालांकि, इस योजना में देरी का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। जिस टैबलेट की कीमत पहले करीब 10 हजार रुपये निर्धारित की गई थी, उसकी कीमत अब बढ़कर लगभग 18 हजार रुपये हो गई है। इतना ही नहीं, बजट लगभग समान रहने के बावजूद इंटरनेट, बीमा और अन्य सेवाओं की अवधि भी पांच साल से घटाकर ढाई साल कर दी गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि तीन साल की देरी के बाद भी जब खर्च लगभग उतना ही है, तो सहियाओं को पहले के मुकाबले कम अवधि तक सुविधाएं क्यों मिलेंगी?
तीन साल तक खाते में पड़ी रही राशि
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत केंद्र सरकार ने 28 फरवरी 2023 को 39,964 ग्रामीण सहियाओं, 2,500 शहरी सहियाओं और 200 एनईएलपी फैमिली वेलफेयर कर्मियों के लिए टैब खरीदने की मंजूरी दी थी। इसके लिए 114.25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।
लेकिन खरीद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और राशि लंबे समय तक संबंधित निगम के खाते में पड़ी रही। अब करीब तीन साल बाद उसी उद्देश्य से नए सिरे से खरीद की तैयारी की गई है। तकनीकी मानकों में बदलाव और उपकरणों के साथ मिलने वाली सेवाओं की लागत बढ़ने को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है।
10 हजार का टैब अब 18 हजार रुपये में
योजना के पुराने और नए प्रस्ताव की तुलना करें, तो कई महत्वपूर्ण बदलाव सामने आते हैं।
- टैबलेट की कीमत: पहले लगभग 10,000 रुपये, अब करीब 18,000 रुपये।
- सिम और इंटरनेट: पहले 60 महीने, अब 30 महीने।
- बीमा की अवधि: पहले पांच साल, अब ढाई साल।
- एमडीएम सॉफ्टवेयर की लागत: पहले 600 रुपये, अब 1,200 रुपये।
- प्रति सहिया कुल खर्च: पुराने प्रस्ताव में 26,780 रुपये और नए प्रस्ताव में 26,778 रुपये।
यानी प्रति सहिया कुल खर्च लगभग समान है, लेकिन सेवाओं की अवधि आधी हो गई है। टैबलेट की कीमत में करीब 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि सिम-इंटरनेट और बीमा की अवधि 30 महीने कम कर दी गई है।
तकनीकी मानकों में बदलाव के बाद तैयार हुआ नया प्रस्ताव
टैबलेट की खरीद को लेकर विभागीय स्तर पर कई चरणों में विचार-विमर्श किया गया। सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने सुझाव दिया था कि खरीद से पहले उपयोगकर्ता विभाग समिति की सिफारिशों से संतुष्ट हो।
इसके बाद 18 सितंबर 2023 को तकनीकी मानकों के स्वतंत्र मूल्यांकन के लिए समिति गठित की गई। तकनीकी जरूरतों में बदलाव को देखते हुए 11 सितंबर 2025 को फिर एक समिति बनाई गई। इस समिति को टैबलेट के स्पेसिफिकेशन निर्धारित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तय करने की जिम्मेदारी दी गई।
नए तकनीकी मानकों के आधार पर अब खरीद का प्रस्ताव तैयार किया गया है। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली राज्य योजना प्राधिकृत समिति से भी इसके लिए मंजूरी मिल चुकी है।
केंद्र से स्वीकृत राशि से होगी खरीद
विभाग का कहना है कि टैबलेट खरीद के लिए केंद्र सरकार से स्वीकृत राशि का उपयोग किया जाएगा और राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। नवंबर 2025 के बाद से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राशि एसएनए स्पर्श व्यवस्था के माध्यम से संचालित हो रही है। इसके बावजूद उपलब्ध राशि के आधार पर टैबलेट खरीद का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
अब निविदा से वितरण तक की चुनौती
मंजूरी मिलने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण खरीद प्रक्रिया पूरी करना, आपूर्तिकर्ता का चयन करना और सभी लाभार्थियों तक टैबलेट पहुंचाना है। इसके साथ ही सिम, इंटरनेट, एमडीएम सॉफ्टवेयर और बीमा की सुविधाएं निर्धारित अवधि तक उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीन साल की देरी के बाद शुरू हो रही इस योजना से सहियाओं को वास्तव में कितना लाभ मिलेगा? टैबलेट मिलने से स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों के संकलन, रिपोर्टिंग और निगरानी की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने में मदद मिल सकती है। लेकिन योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उपकरण समय पर मिलें और उनके साथ मिलने वाली सेवाएं भी सुचारु रूप से चलें।
Kanke, Ranchi | Oct 10, 2026