
सीतापुर का 'सतरंगी' अपराध: पुलिस के हत्थे चढ़ीं 'नाम बदलने की उस्ताद' चोरिनियाँ
सीतापुर: जनपद में कानून का इकबाल इतना बुलंद है कि अब चोर भी अपने नाम के साथ 'एक्सपेरिमेंट' करने से बाज नहीं आ रहे। मामला बिसवां का है, जहाँ पुलिस ने दो ऐसी शातिर 'कलाकारों' को गिरफ्तार किया है, जिनके पास नामों का भंडार किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं।
नाम एक, रूप अनेक!
पकड़ी गई अभियुक्तों में पहली हैं—राधा, जिन्हें दुनिया 'रेखा' के नाम से भी जानती है और प्यार से 'प्रीती' भी बुलाती है। वहीं दूसरी हैं—अर्चना, जिन्हें लोग 'शैलसुता' कहकर भी पुकारते हैं। अब ये नाम उनके आधार कार्ड के हैं या उनके 'पेशेवर' उपनाम, ये तो वे ही जानें, लेकिन पुलिस की फाइलों में इन नामों का जखीरा देखकर ऐसा लगता है मानो वे किसी जासूसी उपन्यास के किरदार हों।
मंदिर के पास 'पवित्र' चोरी
पुलिस के अनुसार, इन 'बहुरूपिया' चोरिनियों ने अपना 'हाथ' साफ करने के लिए चतर्भुज मंदिर को चुना। मंदिर के पास से इन्हें दो पीली धातु के पेंडिल (लॉकेट) के साथ गिरफ्तार किया गया। अब यह पीली धातु वाकई सोना है या केवल चमकती हुई पीतल, यह तो न्यायालय ही तय करेगा, लेकिन फिलहाल इनकी 'शोहरत' बिसवां से निकलकर बाराबंकी के हैदरगढ़ तक पहुँच चुकी, जहाँ इनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी दर्ज है।
पुलिस की पूरी 'आर्मी' बनाम दो महिलाएं
इस गिरफ्तारी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन दो महिलाओं को पकड़ने के लिए बिसवां पुलिस की एक पूरी 'फौज' तैनात थी। एक पुलिस निरीक्षक, दो उप-निरीक्षक, दो हेड कांस्टेबल, चार कांस्टेबल और दो महिला कांस्टेबल—यानी कुल 11 वर्दीधारियों ने मिलकर इन दो शातिर चोरिनियों का पीछा किया।
कहावत है कि 'मक्खी मारने के लिए तोप नहीं चलाई जाती', लेकिन सीतापुर पुलिस ने शायद यह तय कर लिया है कि अपराधी चाहे जैसा भी हो, पुलिस का 'दलबल' पूरा का पूरा मैदान में ही उतरेगा।
फिलहाल, राधा-रेखा-प्रीती और अर्चना-शैलसुता की जोड़ी अब सलाखों के पीछे है। पुलिस ने धाराओं में इजाफा कर उनका चालान कर दिया है। अब देखना यह है कि न्यायालय में पेशी के दौरान ये अपना कौन सा नया नाम सामने लाती हैं!
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