
शिकोहाबाद में 30 मई को डेढ़ वर्ष के मासूम आरव की जमीन पर पटक-पटककर नृशंस हत्या के मामले में जनपद न्यायाधीश ने शुक्रवार दोपहर 2.45 बजे हत्यारे की सजा तय कर दी। उसे फांसी की सजा दी गई है। मात्र 41 दिन में आए इस निर्णय ने एक नया कीर्तिमान बनाया है। अदालत ने रिश्ते के चाचा विराज को दोषी करार दिया है।
सिरसागंज तहसील के गांव बामई निवासी रति के डेढ़ वर्ष के मासूम बेटे आरव की शिकोहाबाद की यादव कालोनी में 30 मई की दोपहर जमीन पर पटक-पटक कर हत्या कर दी गई थी। रति की बदायूं के सियाराम नगर निवासी सुमित उर्फ प्रियंक से शादी हुई थी, लेकिन घरेलू विवाद के चलते वह तलाक लेना चाहती थी।
फुफेरा देवर विराज उर्फ जितेंद्र पाठक निवासी शेखुपुरा, बदायूं एकतरफा प्रेम के चलते उससे शादी करने का दबाव बना रहा था, लेकिन रति बच्चे का हवाला देकर उससे मना कर देती थी। इसलिए उसने बच्चे की पटक-पटक कर हत्या कर दी थी। प्रसारित वीडियो में वह आठ बार बच्चे को पटकते हुए दिखा। पुलिस ने उसी दिन विराज को छह घंटे बाद मुठभेड़ में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी। शिकोहkबाद पुलिस ने छह दिन में सभी 13 गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई जनपद न्यायाधीश डा. बब्बू सारंग के न्यायालय में शुरू हुई। न्यायालय ने इस मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए गुरुवार दोपहर उसे दोषी करार दिया। सजा का निर्णय शुक्रवार दोपहर हुआ।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी ने बताया कि अभियोजन की तरफ से 13 गवाह पेश किए। बचाव पक्ष से एक गवाह पेश किया गया था। यह इतना जघन्य हत्याकांड था कि इसका वीडियो एक बार देखने के बाद कोई दोबारा नहीं देख सकता है। डीएम और एसएसपी ने मामले में त्वरित पैरवी के निर्देश दिए थे। न्यायालय ने भी मामले की गंभीरता से लिया। मौत के अलावा इसकी और कोई सजा नहीं हो सकती थी।
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Ballah, Karnal | Jul 11, 2026