
गड्ढों में तब्दील देवरी तिराहा, जिम्मेदारों की आंखों पर आखिर क्यों पड़ा पर्दा?
शाहनगर में स्थाई बस स्टैंड नहीं है। पन्ना-कटनी रोड पर देवरी तिराहा ही बसों के खड़े होने और यात्रियों के आने-जाने का प्रमुख स्थान बना हुआ है। लेकिन इस तिराहे की हालत देखकर लगता है कि यहां सड़क नहीं, जिम्मेदारों की लापरवाही का प्रदर्शन चल रहा है।
सड़क पर जगह-जगह करीब एक-एक फीट गहरे गड्ढे मौत को दावत दे रहे हैं। रोजाना बसें, दोपहिया वाहन और पैदल यात्री इन्हीं गड्ढों से होकर गुजरने को मजबूर हैं। बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाता है और इनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासनिक अधिकारियों को ये गड्ढे दिखाई नहीं देते? क्या सड़क की बदहाली जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की नजरों से छिपी हुई है? या फिर चुनाव के समय जनता के बीच बड़े-बड़े वादे करने वाले स्वार्थी नेताओं को सिर्फ अपनी राजनीति दिखाई देती है, जनता की परेशानी नहीं?
शाहनगर के लोगों को आखिर कब तक ऐसी बदहाल व्यवस्था का खामियाजा भुगतना पड़ेगा?
यह सिर्फ गड्ढे नहीं हैं… ये जिम्मेदार व्यवस्था के मुंह पर पड़े वे तमाचे हैं, जो हर दिन जनता की परेशानी की कहानी बयां कर रहे हैं।
अब सवाल सीधा है—इन गड्ढों को कौन भरेगा और जिम्मेदारी कौन लेगा?
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